दुनिया की ऐसी रहस्यमय किताब जिसे न कोई पढ़ पाया और न ही इसके लिखे जाने के उद्देश्य काे समझ पाया

दुनिया भर में ऐसी कई बहुचर्चित किताबें है जिन्हें किसी न किसी उद्देश्य से अलग-अलग भाषाओं में लिखा गया और अनुवादित कर कई देशों तक पहुंचाया। मगर दुनिया की एक ऐसी किताब भी है जिसका न तो कोई नाम है और न ही इसके लिखने वाले का पता। यही नहीं इस किताब की लिपि ऐसी है जिसे आजतक कोई समझ ही नहीं पाया। तो आईये जानते है वॉयनिक मैनुस्क्रिप्ट किताब से जुडी कुछ खास बातें जो आज भी रहस्य है….!

रहस्यमयी है किताब की पांडुलिपि-:

किताब में जो कुछ भी जिस किसी के बारे में लिखा वह वॉयनिश लिपि में है। साइंस और टेक्नोलॉजी में इतनी तरक्की कर चुकने के बावजूद इसके बारे में जो थोड़ी-बहुत भी जानकारी मिली है, वह इन किताबों पर बनी हुई तस्वीरों की वजह से है। इसे सबसे रहस्यमय पांडुलिपि माना जाता है।

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माना जाता है कि यह 14वीं सदी में उत्तरी इटली में इसे किसी ने बनाया था। इस पांडुलिपि का नाम एक बुक डीलर के नाम पर रखा गया है। इस डीलर का नाम विल्फ्रेंड वॉयनिक था। उसने इस पांडुलिपि को 1921 में खरीदा था। इस पांडुलिपि के कुछ पन्ने गायब है और अब 240 पन्ने ही बचे हैं। वैज्ञानिक इसे वोय्निच मेन्युस्क्रिप्ट (Voynich Manuscript) कहते हैं।

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किताब में ज्यादातर पेड़ पौधे, महिलाओं के चित्र बने हुए है। इसमें कई ऐसे भी चित्र है जो धरती पर किसी भी चीज मेल नहीं खाते। इस किताब में चित्रों के बारे में एक सांकेतिक भाषा है।

अत्याधुनिक कंप्यूटर भी नहीं समझ पाए किताब की भाषा-:

वॉयनिक के आलावा इस किताब की भाषा को समझने के लिए दुनिया भर के भाषा विशेषज्ञों के पास इस किताब के लिखे शब्दों की भाषा को समझने के लिए भेजा गया मगर किसी को पूर्ण सफलता नहीं मिल सकी। किताब की भाषा को अत्याधुनिक कंप्यूटर भी नहीं समझ सके। कहा जाता है इस किताब में लिखा कुछ शब्द लैटिन और जर्मन भाषा में है।

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रेडियो कार्बन डेटिंग द्वारा जांच में पाया गया की यह किताब 14 वीं शताब्दी के प्रारंभ में लिखी गयी थी। कई इतिहासकार इस किताब को फर्जी मानते थे मगर जब इस किताब की सूक्ष्म तरीके से जांच की गयी तो पता चला इस किताब में बने चित्रों में इस्तेमाल किये गए रंग प्राचीन काल में इस्तेमाल किये जाने वाले महंगे रंगों में से एक थे।

किताब के पन्ने ऐसे चमड़े के बने है जो उस जमाने के हिसाब से काफी कीमती थे और हर किसी इस्तेमाल के बजट में नहीं था। इतने महंगे रंग और चमड़े के पन्नो वाली इस किताब के बारे कई जानकर यही अनुमान लगाते है कि इस किताब के निर्माण में उस जमाने में बहुत पैसे खर्च किये गए होंगे।

वॉयनिच पांडुलिपि नाम से जानी जाती है-:

किताब के पन्नो की जब माइक्रोस्कोप द्वारा परिक्षण किया गया तो पता चला इस किताब में कुल 260 से भी ज्यादा पन्ने थे। खास बात ये कि पूरी किताब की लिखावट में कोई त्रुटि नहीं थी। हालांकि इस किताब का वास्तविक नाम तो किसी को पता नहीं मगर इसे वॉयनिक मैनुस्क्रिप्ट नाम से जाना जाता है।

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फिलहाल इस किताब न्यू हेवेन में बाइनिका रेयर बुक एंड मेन्यू स्क्रिप्ट लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा गया है। इस किताब में क्या लिखा है इसे कोई नहीं जानता और नाही जान पाया। प्रत्येक वर्ष शोधकर्ता यहां जाते किताब भाषा को समझने का प्रयास करते है। मगर उनको सफलता नहीं मिलती।

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