दुनिया के खतरनाक आतंकी संगठन, जिनकी निर्दयता और बर्बरता से थर्राती है इंसानियत

इन दिनों आतंकवाद को लेकर पूरी दुनिया में चर्चाए हो रही है। भारत जैसे देश में तो आयेदिन आतंकियों को ढ़ेर किया जा रहा है। मगर पूरी दुनिया में ऐसे सैकड़ों आतंकवादी संगठन है जो कई देशों में अपनी मनमर्जी करते है। दुनिया के सबसे खतरनाक और निर्दयी आतंकवादी संगठन ISIS ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस आतंकी संगठन से मुकाबले के लिए अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को मोर्चा संभालना पड़ा। तो आइए जानते है उन आतंकी संगठनों के बारे में जो कई देशों के नाक में दम कर रखा है…!

अल कायदा

यह एक बहुराष्ट्रीय उग्रवादी सुन्नी इस्लामवादी संगठन है जिसका स्थापना ओसामा बिन लादेन, अब्दुल्लाह आज़म और 1980 के दशक में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियतों के आक्रमण के विरोध करने वाले कुछ अन्य अरब स्वयंसेवकों द्वारा 1988 में किया गया था। यह दुनिया का पहला ऐसा संगठन है जिसने अपने आतंकवादियों को हाईटेक बनाया और आतंक की दुनिया में ऐसे उच्च शिक्षित पुरुषों और महिलाओं को आतंकवाद को फैलाने में लगाया जिनसे उम्मीद नहीं की जाती थी कि इतने पढ़े-लिखे और उच्च शिक्षा प्राप्त पेशेवर इस तरह का काम करेंगे।

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इतना ही नहीं, इन्होंने आत्मघाती बनने का रास्ता चुना। अल कायदा का गठन अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क के ट्‍विन टॉवर को धराशायी करने वाले आत्मघाती हमलावरों को तैयार के लिए किया गया था। दावा किया जाता है कि इस संगठन का अंत 2011 में अमेरिकी सेना ने ओसामा को पाकिस्तान के एबटाबाद में मारकर किया लेकिन मिस्र के अयमान-अल-जवाहिरी ने ओसामा की मौत के बाद इस संगठन को बनाए रखा।

इस्लामिक स्टेट इन सीरिया एंड इराक (ISIS)-:

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आईएसआईस इराक एवं सीरिया में सक्रिय जिहादी सुन्नी सैन्य समूह है। इस संगठन का गठन अप्रैल 2013 में हुआ। इब्राहिम अव्वद अल-बद्री उर्फ अबु बक्र अल-बगदादी इसका मुखिया है। इस संगठन का एकमात्र मकसद एशिया तक पहुंचकर पूरे विश्व का इस्लामीकरण करना है। वर्तमान में यह संगठन काफी सक्रिय है और यह दुनिया का सबसे अमीर आतंकी संगठन है जिसका बजट 2 अरब डॉलर का है। इस संगठन का मूल उद्देश्य दुनियाभर में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना और दुनिया के सभी देशों में शरिया कानून लागू करना है। आईएसआईएस के सदस्यो की संख्या करीब 10,000 हैं।

तालिबान

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1994 में मुल्ला मोहम्मद उमर के नेतृत्व में इस संगठन का निर्माण हुआ। इस आतंकी संगठन का एकमात्र मकसद पूरे अफगानिस्तान में इस्लामी कानून को मनवाना था। इसमें यह संगठन काफी हद तक सफल भी रहा। तालिबान के कुछ ऐसे फरमान थे जो महिलाओं के लिए काफी सख्त थे। जिसमें महिला को नौकरी करने की इजाजत नहीं दी जाती थी। लड़कियों के लिए सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दरवाजे बंद कर दिए गए। कई महिलाओं को घर में बंदी बनाकर रखा जाता था। इसके कारण महिलाओं में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ने लगे। लेकिन अमेरिकी सैनिकों ने इस संगठन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। हालांकि यह संगठन फिर से अफगानिस्तान में पनपने के लिए हाथ-पैर मार रहा है।

लश्कर-ए-तैयबा

दक्षिण एशिया के सबसे बडे़ इस्लामी आतंकवादी संगठनों में से एक है। इसकी शुरुआत लाहौर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के प्रोफ़ेसर हप़ीज़ मोहम्मद सईद ने 1980 के दशक के अन्त में की थी। इसकी स्थापना में अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआइए का योगदान था। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसके आतंकवादियों ने मुंबई में 2006 में आतंकी हमला कर 166 लोगों की जान ले ली थी। वर्ष 2000 में दिल्ली के ऐतिहासिक किले पर हमले की जिम्मेवारी इस समूह ने ली। 2001 में सीमासुरक्षाबल के जवानों की हत्या की जिम्मेवारी भी इसने ली।

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दिसम्बर 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में 14 लोग मारे गए थे। इस संगठन का मुख्य काम भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाना है। यह पूरे पाकिस्तान में मानवीय हितों की रक्षा करने वाले संगठन के नाम से जाना जाता है। इसके आतंकियों को पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का संरक्षण हासिल है।

बोको हराम

बोको हराम नाइजीरिया का प्रमुख इस्लामी आतंकी संगठन है। 2002 में बोको हराम का गठन हुआ। इसका एकमात्र मकसद पूरे नाइजीर‍िया में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना है। बोको हराम अरबी शब्द है जिसका मतलब है ‘पश्चिमी शिक्षा हराम’ है। इस संगठन का औपचारिक नाम ‘जमात-ए एहले सुन्नी लिदावती वल जिहाद’ है इन अरबी शब्दों का मतलब है जो लोग पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा में और जिहाद फैलाने में यकीन रखते हैं।

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इस संगठन का केन्द्र नाइजीरिया का मेदुगुरी शहर रहा है। बोको हराम अब न सिर्फ नाईजीरिया तक ही सीमित है बल्कि उसने विस्तार कर पड़ोसी देशों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। जो भी इस संगठन के खिलाफ जाता है, उसे ये मारते हैं और जला भी देते हैं। बर्बरताओं और हत्याओं के मामले में यह आईएसआईएस से भी आगे है।

पाकिस्तानी तालिबान

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जिसे कभी-कभी सिर्फ़ टी-टी-पी (TTP) या पाकिस्तानी तालिबान भी कहते हैं। पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा के पास स्थित संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र से उभरने वाले चरमपंथी उग्रवादी गुटों का एक संगठन है। तालिबान का उदय 90 के दशक में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ। यह अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान से अलग है हालांकि उनकी विचारधाराओं से काफ़ी हद तक सहमत है।

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पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल के 132 बच्चों सहित 148 लोगों की हत्या करने वाला आतंकवादी संगठन है। इसे बहुत खतरनाक संगठनों में गिना जाता है। यह आतंकी संगठन दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक माना जाता है। पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की हिमायती मलाला यूसुफजयी को गोली से मारने के लिए इसी के आतंकियों को जिम्मेदार माना जाता है।

अल-नुसरा फ्रंट

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सीरिया को इस्लामिक देश स्थापित करने के उद्देश्य से अल-नुसरा फ्रंट का गठन 23 जनवरी 2012 में किया गया। सीरिया में इसे अल कायदा के नाम से जाना जाता है। पूरे विश्व के इस्लामीकरण के पक्ष में सक्रिय यह संगठन काफी खतरनाक है। पश्चिमी देशों के साथ इस संगठन का विरोध अक्सर देखा जा सकता है और इसे इसराइल के कट्‍टर शत्रुओं में गिना जाता है।

जेमाह इस्लामिया

जेमाह इस्लामिया दक्षिण-पूर्व एशिया में अल कायदा की एक शाखा है। इस संगठन ने 2002 में बाली में विस्फोट किया था जिसकी वजह से 202 लोगों की जानें गई थीं।

अल कायदा इन अरेबियन पेनिनसुला

The Jamestown Foundation

वर्ष 2006 में कई आतंकवादी गुटों का यमन में विलय होने के बाद इस संगठन का अस्तित्व सबके सामने आया। यह संगठन यमन में काफी सक्रिय है और वहां पूरी शिक्षा पद्धति, रहन-सहन को बदलने की कोशिश कर रहा है। पूरा आतंकी संगठन इस बात का ध्यान देता है कि आने वाली पीढ़ी केवल इस्लामी रिवाजों को माने।

अबू सय्याफ

अबू सय्याफ दक्षिण-पूर्व एशिया में फिल‍ीपीन्स देश का एक आतंकी संगठन है। इस संगठन का काम लोगों को लूटना है। फिल‍ीपीन्स के सल्लू टापू और तटवर्ती पानी में अपहरण और फिरौती करके इसके सदस्य अपना खर्चा चलाते हैं।

जैश-ए-मुहम्मद

यह एक पाकिस्तानी जिहादी संगठन है जिसका मकसद भारत से कश्मीर को अलग करना है हालांकि यह अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में भी शामिल समझे जाता हैं। इसकी स्थापना मसूद अज़हर नामक पाकिस्तानी नेता ने मार्च 2000 में की थी। हालही में 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले की जिम्मेदारी भी इसी संगठन ने ली है। जिसमें सेना के करीब 40 जवान शहीद हुए थे।

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उपरोक्त विश्व के आलावा  खतरनाक कौमी एकता मूवमेंट, बास्कस, आयरिश नेशनल लिबरेशन आर्मी, रेड ब्रिगेड्स, शाइनिंग पाथ, रेड आर्मी गुट, पापुलर फ्रंट फार लिबरेशन आफ पैलेस्टाइन, अबु निदाल गुट, उल्स्टर डिफेंस एसोसिएशन, पीपुल्स मूवमेंट फार लिबरेशन आफ अंगोला, सराजो, अल्फोरा विवा, नेशनल यूनियन फार द टोटल, इंडीपेंडें आफ अंगोला, तमिल इलाम मुक्ति शेर, ख्मेर रूज, नेशनल लिबरेशन आर्मी, नेशनल डिग्रीटी कमांड, कारेन नेशन लिबरेशन आर्मी, हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी आतंकी संगठन दुनियाभर में सक्रिय है।

विश्वभर में आतंकियों के बढ़ती गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए अब तक सैकड़ों आतंकी संगठनों पर भारत का प्रतिबंध रहा है जिसमे मोरक्को का इस्लामिक काम्बैटेंट ग्रुप, मिस्र का इस्लामिक जिहाद, उजबेकिस्तान का इस्लामिक मूवमेंट, इंडोनेशिया का जेमाह इस्लामिया, लीबिया का इस्लामिक जिहाद ग्रुप और फिलीपींस का इंटरनैशनल इस्लामिक रिलीफ ऑर्गनाइजेशन शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रावधानों के अनुरूप भारत पहले से ही इन प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों पर निगाह रखता रहा है।

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