लोगों को लुभा रही है फिल्म केसरी की ये विशेषताएं…

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हाल ही में रिलीज हुई केसरी फिल्म दर्शकों को काफी भा रही है. बता दें यह फिल्म अब तक करीब 150 करोड़ की कमाई बॉक्स ऑफिस पर कर चुकी है. 21 मार्च को रिलीज हुई अक्षय कुमार की इस फिल्म ने अभी भी सिनेमाघरों में अपना दबदबा कायम रखा है.

इस फिल्म के रिलीज होने के बाद जॉन अब्राहम की रॉ और ताशकंद फाइल्स जैसी बहुचर्चित फिल्मे भी रिलीज हुई. लेकिन केसरी के कलेक्शन पर इसका कोई असर होते नहीं दिखा.

फिल्म की कहानी सारागढ़ी में हुई लड़ाई पर आधारित है, जो 12 सितंबर 1897 में लड़ी गई थी. इस लड़ाई के दौरान एक ब्रिटिश आर्मी पोस्ट पर तैनात 21 सिख सैनिकों पर दस हजार अफगानों ने हमला कर दिया था, और इन्ही 21 सिखों ने मिलकर उन हजारों अफगानों का बहादुरी से मुकाबला किया.

केसरी में अक्षय, हवलदार ईशर सिंह का किरदार निभा रहे हैं.

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चलो जानते है, इस फिल्म की कुछ विशेषताए और इस फिल्म को देखना क्यों जरुरी है.

बदलेगी सरदारों के प्रति बनी प्रतिमा

अक्सर हम संता-बंटा पर बने जोक्स के माध्यम से सरदारों का मजाक उड़ाते है. इसलिए खास तौर पर इस फिल्म को उन्हें देखना चाहिए जो हसीं मजाक में ही सही पर सरदारों का मजाक उड़ाते है.

इस फिल्म में वो काबिलियत है की, ज्यादातर लोगों में मन में बसी सरदारों के प्रति बनी प्रतिमा ही बदल जायेगी.

पर हम यह स्पष्ट करना चाहते है कि, बहादुरी और वीरता किसी भी एक समुदाय व धर्म से जुडी या सिमित नहीं है.

पर इसके बावजूद हम यह दावें के साथ कह सकते है की, इस फिल्म में सिख समुदाय को ऐसे प्रस्तुत किया है कि, जिसे आप कभी नहीं भूल पाएंगे.

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अगर आप यह फिल्म बच्चों के साथ देखने का plan कर रहे हो , तो इस फिल्म में कुछ सेक्सुअल दृश्य है और आपको uncomfortable महसूस हो सकता है

फिल्म केसरी का सबसे मजबूत पक्ष है फिल्म की सिनेमैटोग्राफी जो वाकई काबीले तारीफ़ है. दूसरी बात यह की, कई फिल्मो में ज्यादातर वही चुनिंदे जाने पहचाने चेहरे सहायक कलाकारों के रूप में हमारे सामने आते है.

पर इस फिल्म की ख़ास बात यह की, इसमें जिन्होंने सहायक कलाकारों के किरदार निभाए है वह बिलकुल नए है. बावजूद इसके उन्होंने अपना किरदार बखूबी निभाया है. फिल्म की casting पर काफी मेहनत की गई है जो की लाजवाब है.

अक्षय कुमार इस फिल्म की जान है. अक्षय का अब तक का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कहा तो गलत नहीं होगा. ईशर सिंह नाम से किरदार निभा रहे अक्षय इस फिल्म के पहले फ्रेम से लेकर आखिरी फ्रेम तक छाए हुए है.

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निर्देशक अनुराग सिंह ने इस फिल्म में किसी नॉन-लीनियर कथा का सहारा नहीं लिया. इसके बजाय इस गंभीर घटना को आधार बनाकर अपनी कल्पकता से कहानी को काफी रचनात्मक राहत दी है.

और एक बात यह की, इस फिल्म के गाने कथा को बाधित नहीं करते. फिल्म के आखिर में ‘तेरी मिठ्ठी’ यह गाना दर्शकों को भावुक कर देता है.

आजकल की सर्वश्रेष्ठ पटकथाए यानी एक वाक्य की कहानी और एक पंक्ति का कथन होता हैं. जैसे की इस फिल्म में दिखाई गई ऐतिहासिक लड़ाई मे सभी 21 सिख सैनिकों ने 10,000 अफगानों से लड़ाई लड़ी. बस! लेकिन जिस तरह से निर्देशक ने इसे पेश किया है वह कमाल का है.

इस फिल्म की और एक महत्वपूर्ण बात यह की, यहां बस मुख्य कथा पर फोकस किया गया है.
इसके अलावा, फ़िल्म में कोई अन्य जटिल साइड स्टोरीज नहीं है. नाहि बैक स्टोरी के जरिए अतीत में जाने की कोशिश की गयी है. इसके अलावा फिल्म में आने वाले कॉमिक सीन्स जबरदस्ती घुसेड़ दिए है, ऐसा कहीं पर भी नहीं लगता.

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कहानी के जरिए किसी भी समुदाय का टार्गेट नहीं किया गया. भले ही ब्रिटीश फ़ौज में होने के कारण सिख सैनिक अफगानों से लड़ती दिखती है. पर फिल्म में ये एहसास होता रहता है की अंग्रेज ही common enemy हैं.

लेकिन सौभाग्य से इसमें किसी भी प्रकार के भारी संवाद समाविष्ट नहीं है.

इसलिए आखिर में कहना पड़ेगा की, इस फिल्म को कम से कम एक बार जरूर देखना चाहिए. 21 जांबाज सिख सिपाहियों की बहादुरी और शहादत देखकर आंखे तो नम हो ही जाती है. अनुराग सिंह जैसे talented निर्देशक को तहे-दिल से आभार, जो उन्होंने अपने समृद्ध इतिहास की ऐसी घटना पर एक बेहतरीन फ़िल्म बनाई.

और इस फिल्म द्वारा, लोगोंको हमारा उज्ज्वल इतिहास जानने का अवसर मिल रहा है.

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