इस कलेंडर की वजह से दुनिया भर में मनाया जाता है एक जनवरी को नया साल !

भारत के लगभग सभी धर्मों में नया साल अलग-अलग दिन मनाया जाता है. पंजाब में नया साल बैशाखी के दिन मनाया जाता है. पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में भी बैशाखी के आस-पास ही नया साल मनाया जाता है. महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के महीने में आने वाली गुड़ी पड़वा के दिन नया साल मनाया जाता है. गुजराती में नया साल दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है. वहीं, इस्लामिक कैलेंडर में भी नया साल मुहर्रम के नाम से जाना जाता है. जबकि हिन्दू धर्म में नववर्ष का आरंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है. हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी इसलिए इस दिन से नए साल का आरंभ भी होता है.

हर धर्म में अलग-अलग दिन और महीनों में नया साल मनाने की प्रथा है. लेकिन इनके बावजूद हम सभी 1 जनवरी को क्यों नया साल मनाते हैं? जानते है क्यों? नहीं तो चलिए जानते है…!

ग्रिगोरियन कैलेंडर की मान्यता 

ग्रेगोरी कालदर्शक, दुनिया में लगभग हर जगह उपयोग किया जाने वाला कालदर्शक या तिथिपत्रक है. यह जूलियन कालदर्शक का रुपातंरण है. (जूलियन कैलेंडर प्राचीन प्रकार का रोमन सौर कैलेंडर था जो ये दोषपूर्ण था. इसकी जगह आज ग्रेगोरी कैलेंडर चलता है) ग्रेगोरी कालदर्शक की मूल इकाई दिन होता है. 365 दिनों का एक वर्ष होता है, किन्तु हर चौथा वर्ष ३६६ दिन का होता है जिसे अधिवर्ष (लीप का साल) कहते हैं. सूर्य पर आधारित पञ्चांग हर 146,097 दिनों बाद दोहराया जाता है. इसे 400 वर्षों में बाँटा गया है और यह 20871 सप्ताह (7 दिनों) के बराबर होता है. इन 400 वर्षों में 303 वर्ष आम वर्ष होते हैं, जिनमे 365 दिन होते हैं और 97 लीप वर्ष होते हैं, जिनमे 366 दिन होते हैं. इस प्रकार हर वर्ष में 365 दिन, 5 घंटे, 49 मिनट और 12 सेकेंड होते है.

एक खास वजह से पूरी दुनिया में जनवरी महीने के पहली तारीख को मनाया जाता है नया साल

1 जनवरी से शुरू होने वाले कैलेंडर को ग्रिगोरियन कैलेंडर की शुरूआत 15 अक्टूबर 1582 में हुई. इस कैलेंडर की शुरूआत ईसाईयों ने क्रिसमस की तारीख निश्चित करने के लिए की. ऐसा माना जाता है कि नव वर्ष आज से लगभग 4,000 वर्ष पहले बेबीलीन नामक स्थान से मनाना शुरू हुआ था. एक जनवरी को मनाया जाने वाला नया वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है. इसकी शुरुआत रोमन कैलेंडर से हुई. इस पारंपरिक रोमन कैलेंडर का नया वर्ष 1 मार्च से शुरू होता है, लेकिन रोमन के प्रसिद्ध सम्राट जूलियस सीजर ने 46 वर्ष ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया था. इसमें उन्होंने जुलाई का महीना और इसके बाद अपने भतीजे के नाम पर अगस्त का महीना जोड़ दिया. दुनियाभर में तब से लेकर आज तक नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है.

प्रभु यीशु भी खास वजह 

-birthjesus kuchhnayaa

क्रिसमस ईसाईयों के बीच बहुत खास होता है. इसी दिन प्रभु यीशु का जन्म हुआ था. यीशु ने लोगों के हितों के लिए अपनी जान दी और इनके इस त्याग को हर साल क्रिसमस के तौर पर मनाया जाता है. इसी वजह से अमेरिका के नेपल्स के फिजीशियन एलॉयसिस लिलिअस ने एक नया कैलेंडर प्रस्तावित किया. रूस के जूलियन कैंलेंडर में कई सुधार हुए और इसे 24 फरवरी को राजकीय आदेश से औपचारिक तौर पर अपना लिया गया. यह राजकीय आदेश पोप ग्रिगोरी ने दिया था, इसीलिए उन्हीं के नाम पर इस कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन रखा गया. जिसे 15 अक्टूबर 1582 को लागू कर दिया गया. आज यही ग्रिगोरियन कैलेंडर पूरी दुनिया में मशहूर है और इसी में मौजूद पहले दिन यानि 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है.

 

 

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