दो पाकिस्तानी भाइयों ने किया था पहले कंप्यूटर वॉयरस का आविष्कार

अक्सर कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर में वॉयरस की समस्या देखने सुनने को मिलता है। जिससे छुटकारा पाने के लिए कई सॉफ्टवेयर कंपनिया महंगे-महंगे एंटीवॉयरस बाजार में बेचती है। लेकिन क्या आप जानते है दुनिया का पहला वॉयरस किसने बनाया था ? अगर नहीं जानते तो हम आपको इस लेख के माध्यम बताने जा रहे दुनिया के पहले और सबसे खतरनाक कंप्यूटर वॉयरस के बारे में।

क्या होता है कंप्यूटर वॉयरस ?

VIRUS का पूरा नाम Vital Information Resources Under Siege है। वायरस कम्प्यूटर में छोटे- छोटे प्रोग्राम होते है। जो auto execute program होते जो कम्प्यूटर में प्रवेष करके कम्प्यूटर की कार्य प्रणाली को प्रभावित करते है।

वायरस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कैलिफोर्निया विश्वविधालय के एक विधार्थी फ्रेड कोहेन (Fred Cohen) ने अपने शोध पत्र में किया था | उस विधार्थी ने अपने शोधपत्र में यह दर्शाया था की कैसे कम्प्यूटर प्रोग्राम लिखा जाये जो कम्प्यूटर में घुसकर उसकी प्रणाली पर आक्रमण करे।

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ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार वायरस हमारे शारीर में घुसकर हमें संक्रमित करता है। सर्वप्रथम कम्प्यूटर वायरस को ढूँढना अत्यंत ही कठिन था। इसके बारे में लोगों को 1980 के दशक तक पता नही था।

लोग इस बात को भी अस्वीकार करते थे कि इस तरह का कोई प्रोग्राम होता है जो कंप्यूटर को खराब कर सकता है। उस समय वायरस बिल्कुल नया था अत: लोगो ने इसके बारे में बहुत गंभीरता से नही सोचा।

अमजद तथा बासित दो पाकिस्तानी भाइयों ने इस वायरस को जनवरी 1986 में विकसित किया था। वायरस पर उन दोनों भाइयो का ही पता था जो सही था। इसका उद्देश्य लोगो को अवैध ढंग से साफ्टवेयर खरीददारी के लिए हतोत्साहित करना था।

इसे दुनिया का संभवतः सबसे पहला वायरस माना जाता है। साथ ही अबतक के सभी वायरसों में यह सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला वायरस था। जिसने लाखो कंप्यूटरो को संक्रमित किया था।

माईकलएन्जिलो (Michelangelo) वॉयरस -:

अभी तक का सबसे अधिक कुख्यात वायरस माईकल एन्जिलो का नाम ऐसा इसलिए पड़ा क्योकि यह वायरस 6 मार्च, जो माईकलएन्जिलो की जन्म तिथि है, इस दिन यह डाटा को समाप्त कर देता है। इसलिए इसे “6 मार्च का वायरस” भी कहा जाता है। इस वायरस का पता 1991 के मध्य में लगाया गया था तथा इसके बाद के सभी वायरस निरोधक सॉफ्टवेयर (Anti virus software) इसे समाप्त करने में सक्षम थे।

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इस वायरस के कुख्यात होने के पीछे यह भी कारण था की बहुत सारे एंटी वायरस शोधकर्ताओ ने 6 मार्च को कम्प्यूटर प्रणाली के व्यापक सर्वनाश की भविष्यवाणी की थी। इस भविष्यवाणी का डर लोगों के दिल में 1990 के पूरे दशक तक प्रत्येक 6 मार्च को रहता था जो बहुत बाद में समाप्त हुआ।

जेरुसलेम (Jerusalem) वॉयरस –:

यह वायरस पहली बार हेवरेयु विश्वविध्यालय, जेरुसलेम में लगभग 1987 में पाया गया था। इसलिए इसका नाम जेरुसलेम पड़ा। इसकी एक खास बात यह थी कि यह केवल शुक्रवार को ही सक्रिय होता था। यह वायरस बहुत खतरनाक था। यह वायरस शुक्रवार के दिन जिन – जिन फाइलों पर काम किया जाता था उन सभी फाइलों को नष्ट करता था।

कोलम्बस (Columbus) वॉयरस –:

कोलम्बस वायरस को डेटाक्राइम तथा 13 अक्टूबर के नाम से भी जाना जाता है। इसका नामांकरण 13 अक्टूबर इसलिए हुआ था की यह पूरे विश्व के सक्रमित कंप्यूटरो पर 13 अक्टूबर 1989 को ही सक्रीय हुआ था। यह भी जेरुसलेम की तरह ही यह क्रियान्वयन योग्य फाइलों को संक्रमित कर हार्डडिस्क के डेटा को नष्ट करता था।

डिस्क वाशर (Disk Washer) –:

डिस्क वाशर वायरस का नाम इसके अन्दर समाहित सन्देश “Disk Washer with Love” के कारण पड़ा। जिसका पता भारत में 1993 के आखिरी महीनो में लगाया गया। यह वायरस इतना खतरनाक था की यह कंप्यूटर के हार्डडिस्क में उपलब्ध सभी डाटा को समाप्त कर देता था। 1994 तथा इसके बाद तैयार किये जाने वाले एंटीवायरस साफ्टवेयर इस वायरस का पता लगाने तथा इसे समाप्त करने में सक्षम थे।

मैकमैग (Macmag) वॉयरस –:

यह वायरस आपके मानिटर पर शांति सन्देश देकर समाप्त हो जाता था। यह केवल एपल मैकिन्टाश कम्प्यूटरों को ही संक्रमित करता था। रिचर्ड ब्रांडो को इस वायरस का जन्मदाता समझा जाता है। रिचर्ड मैकमैग पत्रिका के प्रकाशक थे तथा वायरस का नाम इस पत्रिका पर ही पड़ा।

 

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