लखनऊ में होगी कड़ी टक्कर? आसान नहीं होगी राजनाथ सिंह की राह

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देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी को घेरने का हर संभव प्रयास विरोधी दलों द्वारा किया जा रहा है. ऐसे में सूबे की राजधानी लखनऊ की सीट पर कडे मुकाबले के संकेत मिल रहे है.

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वोटों का बंटवारा टालने के लिए पहले ही समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रिय लोकदल ने यूपी में महागठबंधन बनाकर बीजेपी को कड़ी चुनौती दी है.

लेकिन अब एक एक कर मोदी सरकार में से कद्दावर नेताओं को घेरने की योजना विरोधी दल कर रहे है. चलिए उस संभावना को टटोलने की हम कोशिश करते है जिसकी चर्चा यूपी के सियासी गलियारों में हो रही है.

2014 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ से जीत हासिल कर चुके केंद्रीय मंत्री एवं बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को इस बार परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. 

बीजेपी में रहकर भी पिछले चार सालों से लगातार मोदी सरकार की आलोचना करने वाले बीजेपी के सांसद एवं फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा आज अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की मौजुदगी में समाजवादी पार्टी में शामिल हुई.

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साथ ही अब सपा-बसपा-आरएलडी महागठबंधन की ओर से पूनम सिन्हा को लखनऊ से राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा गया है. अब वह 18 अप्रैल को अपना चुनावी नामांकन दाखिल करेगी.

इतना ही नहीं बल्कि राजनाथ के लिए खतरे की घंटी ये है कि, कांग्रेस ने यहां आचार्य प्रमोद कृष्णम को मैदान में उतारा है, जो हिंदू वोटों में सेंधमारी कर सकते है.

पहले तो यूपी की सियासी गलियारों में ये चर्चा रही की कांग्रेस यहां उम्मीदवार खड़ा नही करेगी और सीधा पूनम सिन्हा को समर्थन देगी. पर अभी अपना प्रत्याशी घोषित कर राजनाथ के सामने कांग्रेस ने और भी चुनौती खड़ी कर दी है.

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बता दे की, पिछले 2 दशक से बीजेपी में रह चुके शत्रुघ्न सिन्हा हाल ही में बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो चुके है.

क्योंकि इन चार सालों में बीजेपी में होने के बावजूद उनके बीजेपी के आलाकमान से हालात ठीक नही रहे. इसलिए वे लगातार अपने बयानबाजी से बीजेपी के नीतियों पर तंज कसते रहे. सिन्हा इस बार खुद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बनाम बिहार के पटना साहिब से लढ रहे है. 

बीजेपी का गढ़ है लखनऊ:
अमूमन लखनऊ बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है. 1991 के लोकसभा चुनाव से लेकर अभी तक यहां लगातार भाजपा का ने ही परचम लहराया है.

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी इसी सीट से 1991 से 2009 तक प्रत्याशी रहे है.

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इसके बाद 2009 के चुनाव मे बीजेपी के नेता लालजी टंडन इस सीट से चुनाव जीते. लालजी टंडन ने तब कांग्रेस के रीटा बहुगुणा जोशी को 40000 वोटों से हराया था.

2014 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ सीट से चुनाव लड़े और 272749 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की.

पर इस बार विरोधी दल जातीय समीकरण के आधार पर राजनाथ को मात देने की योजना बना रही है.

तो देखते है क्या है लखनऊ के जातीय समीकरण:
लखनऊ चुनाव क्षेत्र में करीब 23 लाख मतदाता हैं. जातीय समीकरणों की अगर बात करें तो इस लोकसभा सीट पर वैश्य और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. अब कांग्रेस द्वारा यहां से आचार्य प्रमोद कृष्णम के खड़े होने से इन वोटों में सेंधमारी हो सकती है.

इसके आलावा कायस्थों का प्रभाव भी लक्षणीय है. वैश्य मतदाताओं की बड़ी भूमिका को देखते हुए पहले माना जा रहा था कि, अखिलेश यादव यहां वैश्य उम्मीदवार उतार सकते हैं.

पर सपा ने पूनम सिन्हा को यहां से उतारा जो की कायस्थ है. जानकारों की माने तो सिन्हा इस जाती के वोटों पर प्रभाव डाल सकती है.

वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं के बाद यहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 21 फीसदी है, जो काफी अहम मानी जाती है.

सियासी जानकारों की माने तो कांग्रेस की ओर से आचार्य प्रमोद कृष्णम होने के कारण मुस्लिम मतदाताओं के मन में अब कोई दुविधा नहीं होगी. मुस्लिमों का रुख साफ हो सकता है. यह 21 फीसदी वोट सीधे महागठबंधन को transfer हो सकते है.

शहरी क्षेत्र होने के कारण यहां अभी तक भाजपा को फायदा मिलता रहा है. पर अगर यह जातीय समीकरण काम करें तो राजनाथ सिंह को सपा प्रत्याशी पूनम सिन्हा से कड़ी चुनौती मिल सकती है.

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