अब सरकारी नौकरी पाने से पहले सेना में ट्रेनिंग जरुरी

केंद्र या राज्य सरकार में नौकरी करनी है तो फिर आपको पांच साल तक मिलिट्री सर्विस देनी पड़ सकती है. जिसके लिए संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने ये प्रस्ताव दिया है. जिसे हालही में संसद में पेश किया गया. आर्म्ड फोर्सेज में जवानों की कमी को पूरा करने के लिए ये प्रस्ताव भेजा गया है. बता दें कि आर्म्ड फोर्सेज में 40 हजार जवानों की कमी है.

केंद्र में लाखों और राज्य सरकार में है करोड़ों सरकरी नौकरियां 

कमेटी ने जो प्रस्ताव दिया है उसमें कहा गया है कि केंद्र और राज्य में राजपत्रि अधिकारी के तौर पर सीधे ज्वॉइन करने वाले लोगों के लिए पांच साल मिलिट्री सर्विस देनी होगी.

केंद्रीय नौकरियों में रेलवे के पास 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं जबकि राज्य सरकारों में दो करोड़ से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले वक्त में जो भी सरकारी नौकरी ज्वॉइन करे उसे निश्चित तौर पर आर्मी सर्विस देने का प्रस्ताव दिया गया है.

संसद में पेश की गई रिपोर्ट

पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की ये रिपोर्ट हाल ही में संसद में पेश की गई है. प्रस्ताव में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय इस मामले में पर्सनल एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर काम करे.

इजराइल में सभी नागरिकों को अनिवार्य है सेना का प्रशिक्षण

इज़राइल में 18 वर्ष की उम्र तक पहुंचने पर हर नागरिक को सेना में अपनी सेवायें देना अनिवार्य है.  पुरुषों के लिए 3 साल और महिलाओ के लिए 2 साल का सैन्य प्रशिक्षण और सेवा जरुरी है. यह दुनिया के मुट्ठी भर देशों (नॉर्वे और इरिट्रिया के साथ) में से एक है जहाँ महिलाओं के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा है. आपको ये जानकार बिलकुल हैरानी नहीं होनी चाहिए की इस देश में नियम है की चाहे कितना भी बड़ा व्यक्ति हो सेना के सेवाएं देने का कानून सबके लिए यहाँ एक समान है.

युक्रेन  में 9 से 13 साल के बच्चों को दी जाती है सेना की ट्रेनिंग

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जन विरोध के बावजूद यूक्रेन में 9 साल से लेकर 13 साल के बच्चों को सेना की ट्रेनिंग दी जाती है. जी हां, खेलने-कूदने की उम्र में उन्हें अनुशासन, देश भक्ति और बंदूक चलाने का पाठ पढ़ाया जाता है.

यहां बच्चों को युद्ध के वो सारे गुर सिखाए जा रहे हैं जो एक सैनिक को सिखाया जाता है जैसे- हमले के दौरान कैसे बचा जाए, क्या खाया जाए, दुश्मन पर हमला कैसे किया जाए. इन छोटे बच्चों को सेना की ट्रेनिंग देने के लिए बकायदा यूक्रेन के स्वयंसेवी संस्था अजोब ने आर्मी कैंप भी लगाया जिसमें करीब 850 बच्चों ने हिस्सा लिया.

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