पाकिस्तान को क्यों छोडना पडा विंग कमांडर अभिनंदन को ? असली कारण है यह खास समझौता!

27 फरवरी 2019 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक सैन्य हवाई लड़ाई में दोनों देश के एक-एक युद्ध विमान ध्वस्त हो गए थे। इस लड़ाई में भारत के मिग-21 युद्ध विमान के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान लापता हो गए। हालांकि पाकिस्तान ने दावा किया कि अभिनंदन उनके कब्जे में हैं और उनके कुछ फोटोज व विडियो भी जारी किए।

वीडियो में पकड़ा गया शख्स भारतीय वायुसेना की वर्दी पहने हुए है। कह रहा है कि उसका नाम विंग कमांडर अभिनंदन है और उसका सर्विस नंबर 27981 है। मैं एक फ्लाइंग पायलट हूं और मेरा धर्म हिंदू है। बहराल सच्चाई जो भी हो। यदि ऐसा हुआ भी होगा तो पाकिस्तान भारतीय पायलट का कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि युद्धबंदियों पर जिनेवा संधि के नियम लागू होते हैं।

दरअसल भारतीय वायु सेना द्वारा 26 फरवरी 2019 को किये गए एयर स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान सेना और सरकार ने अभिनंदन को छोड़ने के बजाय जिनेवा संधि का उल्लंघन ही नहीं उनके साथ बुरा बर्ताव भी किया कर रही है। ये कोई नया मामला नहीं है जब पकिस्तान सेना जिनीवा संधि का उल्लंघन कर रहा। बल्कि इससे पहले भी पकिस्तान कई बार इस तरह का बर्ताव कर चुका है। तो आइये जानते है ये जिनीवा संधि है क्या ?

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युद्धबंदियों और मानवता को बरकरार रखने के लिए है जिनीवा-:

चाहे घोषित युद्ध का मामला हो या नहीं। प्रिजनर ऑफ वॉर (POW) युद्धबंदियों के अधिकारों को बरकरार रखने के लिए जिनेवा समझौते (Geneva Convention) में कई नियम दिए गए हैं। जिनेवा समझौते में चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं, जिसका मकसद युद्ध के वक्त मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना है।

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मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी। इसके बाद दूसरी और तीसरी संधि 1906 और 1929 में हुई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी।

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इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास के मुताबिक जिनेवा समझौते में युद्ध के दौरान गिरफ्तार सैनिकों और घायल लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना है इसको लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसमें साफ तौर पर ये बताया गया है कि युद्धबंदियों के क्या अधिकार हैं ? साथ ही समझौते में युद्ध क्षेत्र में घायलों की उचित देखरेख और आम लोगों की सुरक्षा की बात कही गई है। जिनेवा समझौते में दिए गए अनुच्छेद 3 के मुताबिक युद्ध के दौरान घायल होने वाले युद्धबंदी का अच्छे तरीके से उपचार होना चाहिए।

नहीं होना चाहिए युद्धबंदियों के साथ बुरा बर्ताव-:

युद्धबंदियों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होगी। जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता। इसके अलावा उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता।

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संधि के मुताबिक युद्धबंदियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है। साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लैटाना होता है। कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता। युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है।

पकिस्तान की तरफ से सोशल मीडिया पर जारी विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के वीडियो के दावे पर पुष्टि करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने 27 फरवरी 2019 को एक बयान में कहा था कि हमारा एक पायलट पाकिस्तान की कस्टडी में है और हम पाकिस्तान से उसे वापस भेजे जाने मांग करते हैं। अभिनंदन के विडियो को पाकिस्तान द्वारा सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया जाना जिनेवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन है।

इससे पहले भी जिनेवा संधि का हो चुका है उल्लंघन-:

सन 1999 के करगिल लड़ाई के दौरान इंडियन एयरफोर्स के पायलट अजय आहुजा अपने विमान से सुरक्षित कूद चुके थे। भारत का दावा है कि पाकिस्तानी सेना ने उनकी हत्या कर दी थी। इसी तरह एक और पायलट नचिकेता को भी पाकिस्तानी सेना ने अगवा कर लिया था। हालांकि, बाद में जिनेवा कन्वेंशन को लेकर भारत के दबाव के बाद पाकिस्तान को आखिरकार 8 दिनों बाद नचिकेता को भारत को लौटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कौन हैं विंग कमांडर अभिनंदन?

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21 जून, 1983 को पैदा हुए 35 वर्षीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पास सेलायुर इलाके रहने वाले हैं। साल 2004 में उनकी भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति हुई थी। अभिनंदन वर्तमान के पिता रिटायर्ड एयर मार्शल एस.वर्तमान भी इंडियन एयर फोर्स में देश की सेवा और सुरक्षा कर चुके हैं।

स्रोतविकिपीडिया, अमर उजाला, NBT

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