रेलवे के इन नंबरों में छिपी होती है ट्रेन की पूरी कुंडली !

भारतीय रेल (आईआर) एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. यह १६० वर्षों से भी अधिक समय तक भारत के परिवहन क्षेत्र का मुख्य घटक रहा है. हम सब जानतें है कि इतना बड़ा नेटवर्क होने के साथ-साथ भारतीय ट्रेनों में बहुत सारे कोच होते है और इन पर कुछ संख्या अंकित होती है, साथ ही इन डिब्बों के हर सीट पर सफ़र करने लिए एक टिकट भी जारी किया जाता है. जिसपर गाड़ी का डिटेल, यात्रा की तारीख, मूल्य लिखा होता है. इसके अलावा एक खास दस अंकों का नंबर भी होता है. लेकिन आपने कभी सोचा है कि ये नंबर क्या कहते है? चलिए हम आपको इसके बारे में बताते है!

सबसे पहले हम आपको डिब्बे पर लिखे उन नंबरों के बारे में बतायेंगे जो गाड़ी नंबर होते है. जिसके आधार पह हम टिकट बुक करते है और इसी नंबर के साथ गाड़ी का नाम जुड़ा होता है. बता दे कि भारतीय रेलवे ने अब गाड़ी नंबर को 5 डिजिट का कर दिया है. इससे पहले यह 4 डिजिट का हुआ करता था. यात्रियों की सहूलियत के हिसाब से भारतीय रेलवे ने 20 दिंसबर 2010 को ट्रेन के 4 डिजिट नंबर को 5 डिजिट नंबर में तब्दील कर दिया. ट्रेन नंबर का पहला डिजिट 0 से लेकर 9 तक हो सकता है और हर एक का अलग मतलब होता है.

गाड़ी नंबर का पहला अंक

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0 – स्पेशल ट्रेन (समर, स्‍पेशल और हॉलीडे)
1 – लंबी दूरी की ट्रेन
2 – यह भी लंबी दूरी की ट्रेन को दर्शाता है, लेकिन ऐसा तब होता है जब ट्रेन का पहला डिजिट (4 डिजिट नंबर में से) 1 से शुरू होता है।
3 – यह कोलकाता सब अर्बन ट्रेन के बारे में बताता है।
4 – यह चेन्नई, नई दिल्ली, सिंकदराबाद और अन्य मेट्रोपॉलिटन शहर को दर्शाता है।
5 – कन्वेंशनल कोच वाली पैसेंजर ट्रेन
6 – मेमू ट्रेन
7 – यह डूएमयू और रेलकार सर्विस के लिए होता है
8 – यह मौजूदा समय में आरक्षित स्थिति के बारे में बताता है
9 – यह मुंबई क्षेत्र की सब-अर्बन ट्रेन के बारे में बताता है.

दूसरा और उसके बाद के अंक

ट्रेन नंबर के दूसरे और उसके बाद के डिजिट का मतलब उसके पहले डिजिट के अनुसार ही तय होता है. किसी ट्रेन के पहले डिजिट 0, 1 और 2 से शुरू होते हैं तो बाकी के चार डिजिट रेलवे जोन और डिवीजन को बताते हैं.  आपको बता दें कि भारतीय रेलवे में कुल १७ जोन में ६७ मंडल है. जिनके नियंत्रण में  115,000 किलोमीटर रेल मार्ग की लंबाई पर 7,172 स्‍टेशन हैं.  7,910 इंजनों का बेड़ा हैं.

 

0- कोंकण रेलवे
1 – सेंट्रल रेलवे, वेस्ट-सेंट्रल रेलवे, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे
2 – सुपरफास्ट, शताब्दी, जन शताब्दी को दर्शाता है. इन ट्रेन के अगले डिजिट जोन कोड को दर्शाते हैं।
3 – ईस्टर्न रेलवे और ईस्ट सेंट्रल रेलवे
4 – नॉर्थ रेलवे, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे
5 – नेशनल ईस्टर्न रेलवे, नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे
6 – साउथर्न रेलवे और साउथर्न वेस्टर्न रेलवे
7 – साउथर्न सेंट्रल रेलवे और साउथर्न वेस्टर्न रेलवे
8 – साउथर्न ईस्टर्न रेलवे और ईस्ट कोस्टल रेलवे
9 – वेस्टर्न रेलवे, नार्थ वेस्टर्न रेलवे और वेस्टर्न सेंट्रल रेलवे
तो इस हिसाब से अगर आपकी ट्रेन का नंबर 12451 है तो

ट्रेन के डिब्बों पर लिखे नंबर का मतलब 

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कोच पर आमतौर से 4, 5 या 6 अंकों की संख्याएं अंकित होती है, जिसमें से पहले दो अंक डिब्बे के निर्माण वर्ष को दर्शाते हैं. उदाहरण के लिए, 8439 जिसका अर्थ है 1984 में निर्मित, 04052 जिसका अर्थ है 2004 में निर्मित, या फिर 92132 जिसका अर्थ है 1992 में निर्मित कोच.

कुछ मामलों में पहले दो अंक उस वर्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें कोच को क्षेत्रीय रेलवे में स्थानांतरित किया गया था और कभी-कभी उस वर्ष का प्रतिनिधित्व भी करते हैं जिस वर्ष कोच को फिर से बनाया गया था. 2000 के बाद से, निर्माण वर्ष के रूप में ’00’, ’01’, आदि को कोच पर शुरूआती संख्या के रूप में दर्शाया जाता है.

नंबर से डब्बे के श्रेणी कि पहचान 

अक्सर आपने देखा होगा लंबी दूरी के किसी भी ट्रेन में पांच प्रकार के डिब्बे होते है जिसमे स्लीपर क्लास यानि शयनयान जो सबसे अधिक होता है, एसी प्रथम श्रेणी, एसी द्वितीय श्रेणी, एसी तृतीय श्रेणी, जनरल डिब्बे और रसोईयान यानि पेंट्रीकार होते है. इनकी भी पहचान का एक नंबर होता है. जिसमे  001-025: एसी प्रथम श्रेणी (AC first class),

026-050- समग्र 1 एसी + एसी -2 टी (Composite 1AC + AC-2T),

051-100- एसी -2 टी (AC-2T) यानी 2 टियर एसी
101-150- एसी -3 टी (AC-3T) यानी 3 टियर एसी
151-200- सीसी (एसी चेयर कार) CC (AC Chair Car)
201-400- एसएल (द्वितीय श्रेणी स्लीपर) SL (2nd class sleeper)
401-600- जीएस (सामान्य द्वितीय श्रेणी) GS (General 2nd class)
601-700- 2 एस (द्वितीय श्रेणी सिटींग / जन शताब्दी चेयर कार) 2S (2nd class sitting/Jan Shatabdi chair cars)
701-800- एसएलआर SLR (Seating cum Luggage Rake)
801+ पैंट्री कार, वीपीयू, आरएमएस मेल कोच, जनरेटर कार आदि.

अब अगर हम दिए गए कोच के नंबर को देखे 
8439 – यह कोच 1984 में निर्मित हुआ था, 39 का मतलब समग्र 1 एसी + एसी -2 टियर कोच
04052 – यह कोच 2004 में निर्मित हुआ था और 052 का मतलब एसी -2 टियर है.
92132 – यह कोच 1992 में निर्मित हुआ था और 132 का मतलब एसी -3 टियर है .

क्या कहते है PNR नंबर ?

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ट्रेन में सफर करने के लिए आप जो टिकट बुक कराते हैं, आपकी पूरी कुंडली होती है. आपकी टिकट पर जो PNR नंबर होता है वो कोई मामूली नंबर नहीं होता. इस दस अंको के नंबर में आपकी पूरी जानकारी छुपी होती है.

PNR का पहला तीन अंक ये दर्शाता है कि आपने जो टिकट बुक किया है वो किस जोन के PRS (पसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम) से किया गया है. बाकि के सात अंको का मतलब रेलवे के हिसाब से लेकर आपके सफर कि जानकारी के साथ आपके द्वारा दिए गए विवरण को दर्शाते है. जिसमे आपका नाम, उम्र, पता, यात्रियों की संख्या और मोबाइल नंबर.

सुरक्षा और सुविधा के लिए नंबर

देश भर चलने वाली अलग-अलग ट्रेनों में लाखों दिन रात सफर करते हैं. ऐसे में चोरी, डकैती, असुविधा जैसी समस्याओं होना लाज्मी है. जिन्हे दिन रखते हुए भारतीय रेल कई नंबर जारी करता है. जो तीन अंक से १० अंक तक होते है. जो ट्रेनों के डिब्बों में लिखा आपको चेतावनी के साथ लिखा रहता है.

सुरक्षा के लिए नंबर

बता  दें कि रेलवे में  दो तरह की सुरक्षा इकाइयां आरपीएफ (रेल सुरक्षा बल) और जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) यात्रियों की सुरक्षा और सहायता के लिए दिनरात कार्यरत रहती। ट्रेन में यदि सफर के वक्त कोई संकट आ जाये तो इनसे संपर्क करने के लिए नंबर होता है. जिसमे आरपीएफ के लिए १८२ है और जीआरपी का दस अंको  नंबर अलग-अलग राज्यों के अनुसार जारी होता है. उदाहरण के लिए मुंबई जीआरपी का नंबर ९८३३३३११११ होता है.

सुविधा के लिए नंबर 

सफर के वक्त ट्रेनों में  यदि किसी यात्री को साफसफाई, खानपान टिकट संबंधित समस्या के समाधान और शिकायत के लिए भी रेलवे देश व्यापी नंबर जारी किया है. जो टिकट पर ही अंकित होता है। रेलवे के किसी टिकट से जानकारी के लिए १३९ और खानपान के शिकायत लिए १३२ सीधे कल किया जा सकता है.

तकरीबन 164 साल पहले, 16 अप्रैल 1853 को भारतीय रेलवे ने अपनी सेवाएं शुरू की थी और पहली ट्रेन मुंबई से थाने तक 33 किलोमीटर की दूरी तय की थी. इस ट्रेन में 14 कोच थे और जब ट्रेन 400 यात्रियों के साथ सुबह 3:30 बजे बोरी बंदर पहुंची तब उस दिन को सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित किया गया.

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