दुनिया के सबसे रोचक और मांसाहार पौधे


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अब तक आपने सुना होगा कि पेड़-पौधों में जीव होता है और ये भी हमारी ही तरह सांस लेते है। जो धुप और कार्बनडाई ऑक्साइड अपना पोषण कर लेते है।

मगर क्या आप जानते है दुनिया में कुछ ऐसे भी पेड़-पौधे है जो अपने आप में रोचक और कई जीवों के लिए घातक भी।

जो सिर्फ धुप और कार्बनडाई ऑक्साइड से नहीं बल्कि कीड़े-मकोड़े खाकर अपना पोषण कर लेते है। लिविंग थिंग में पढ़ाया जाता है कि पेड़-पौधों भी हमारी तरह सांस लेते हैं तो और वे मांसाहारी भी हो सकते हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ पेड़-पौधों के बारे में बताएंगे..

पौधे कैसे बनाते है शिकार-:

वैसे तो मांसाहारी पेड़-पौधों का ख़याल बहुत पुराना है। पुरानी कहानियों में ऐसे पेड़ों का ज़िक्र मिलता है। मांसाहारी पौधों में से कुछ पौधे ऐसे भी होते हैं जो खास तरह की गंध फैलाते हैं।

जिस गंध को महक कर कीट पौधों की तरफ खिंचे चले आते हैं। जैसे ही कीड़े पास आते हैं ये उन्हें जकड़ लेते हैं और पौधों में खास तरह के बैक्टीरिया और एंजाइम जो इन कीड़ों को पचाने में सहायक होते हैं।

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मांसाहारी पौधों में से कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिन पर कांटे लगे होते हैं और वह इन कांटों से कीड़े और छोटे परिंदों को आसानी से पकड़ लेता है।

वहीं कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिनकी सतह काफी फिसलन भरी होती है और जैसे ही कीट इन पौधों के पत्तों पर बैठते हैं तो फिसलकर नीचे गिर जाते हैं।

कुछ पौधों में रेशे निकले होते हैं जो अपने अंदर कीड़ों को फंसा लेते हैं। कुछ पौधों का मुंह तो ढक्कन जैसा होता है जिसमें कीड़े फंस जाते हैं। मांसाहारी पौधे कीड़ों को अपना भोजन बनाकर अपने पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।

घटपर्णी पौधे (Pitcher plants)-:

घटपर्णी पौधे श्रीलंका और असम के दलदली इलाकों में पाया जाने वाला नेपेंथेसी कुल का कीटभक्षी पौधा है।

ये अधिक नम जगहो में उगते हैं। इन पौधों के पत्ते पूर्ण रूप से या उनका कुछ भाग सुराही के आकार का होता है, जिसकी लंबाई एक इंच से एक फुट तक देखी गई है।

ये कीटभक्षी पौधे कीड़े मकोड़ों को अपनी ओर रंगीन चमकदार ढक्कनों और मधुग्रंथियों द्वारा आकर्षित करते हैं। इस प्रकार आकर्षित कीट पौधे की चिकनी सतह से फिसलते हुए अंदर की ओर चले जाते हैं और अंत इसके 30 से 40 सेंटीमीटर लंबे पत्ते के अंदर जाते है। जहां एक चिपचिपा द्रव होता है। इस द्रव में पड़नेवाला कीट पहले डूब जाता है और कुछ देर बाद पचा लिया जाता है।

सरसैनिया (Sarsainiya)-:

इसमें पूर्ण पत्ता सुराही के मुख जैसा होता है और उसमें पानी भरा रहता है। जिसके ऊपरी भाग पर नीचे की ओर मुड़े हुए कई बाल रहते हैं।

शहद के लालच में कीड़ा पत्ते पर आकर बैठ जाता है और पत्ते के खाली जगह में फिसल जाता है।

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बाहर निकलने का प्रयत्न करने पर पत्ते के मुँह पर लगे हुए बाल उसे फिर से अंदर ढकेल देते हैं। अंदर मौजूद तरल में डूबकर कीड़ा मर जाता है और पाचक रस द्वारा उसका शोषण होता हैं। दूर से दिखनेवाली मधु की सुराही वास्तव में कीड़े के लिए मौत की सुराही रहती है।

नेपेंथीस (Nepenthes)-:

पंजाब केसरी

इसका पत्ता भी सुराही के आकार का होता है और इसके ऊपर एक ढक्कन सा बना होता है।

जब भी कोई कीट इस पर बैठता है ,इसका ऊपर का ढक्कन गिर जाता है और के सुराही में गिर जाता है। इसका ढक्कन जब ही खुलता है जब कीट का पूर्ण रूप से पौधा अवशोषण कर लेता है।

मक्खाजाली (Drosera)-:

पानी के किनारे पाया जाने वाला पौधा इस पर छोटी -छोटी पतियाँ होती हैं। उन पतियों पर ही एक अजीव पदार्थ होता है। कीट जब उनपर बैठते है, तो कीट चिपक जाता और पौधे का शिकार बन जाता है।

panjab kesari

ब्लैडर (Bladderwort)-:

यह बारीक पत्तोंवाला जड़तरहित पौधा है, जो तालाबों में तैरता हुआ पाया जाता है। इसकी कुछ पत्तियाँ फूलकर थैली या ब्लैडर के आकार की हो जाती हैं। प्रत्येक थैली के मुँह के पास एक द्वार रहता है जो केवल अंदर की ओर खुलता है।

Lake Stewards of Maine

ब्लैडर के मुँह पर तीन संवेदक बाल रहते हैं। पानी में तैरता हुआ कीड़ा इन बालों के स्पर्श में आते ही ब्लैडर के अंदर ढकेल दिया जाता है। द्वार बंद हो जाता है और ब्लैडर के अंदर कैद किया गया कीड़ा मर जाता हैं।

पाचक द्रव द्वारा अब इस कीड़े के मांस का शोषण होता है। ब्लैडर की दीवारो पर लगे हुए कई छोटे छोटे बाल रहते हैं, जो ब्लैडर के पानी को बाहर निकाल देते हैं और द्वार फिर से खुल जाता है।

सुंदरी का पिंजड़ा (Venus s flytrap)-:

यह पौधा बहुत ही खतरनाक होता है। इसकी पत्तियों दो भागों में बंटी होती है और पत्तियों के किनारे आरी जैसे रोयें होते हैं जब कोई कीट इनपर बैठता है तब दोनों पत्तियों बंद हो जाती हैं और कीट का पाचन करने के बाद खुलतीं है।

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क़ुदरत में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं जो मांसाहार से ज़िंदगी बसर करते हैं. हालांकि जीवों को खाकर बसर करने वाले इन पौधों की तादाद बहुत कम है और ये बड़ी तेज़ी से ख़त्म होते जा रहे हैं.

कई पशु-पक्षियों के आकृति वाला चमत्कारी बरगद-:

आंध्रप्रदेश के नालगोंडा में स्थित यह चमत्कारी बरगद काफी मशहूर है।

इस पेड़ पर विभिन्न जंगली जानवरों की आकृतियां बनी हुई। इस पेड़ पर आपको सांप, बिच्छु, मगरमच्छ, शेर, अजगर आदि खतरनाक पशु और पक्षियों की खूबसूरत आकृति देखने को मिलेगी।

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कुछ लोगों को मानना है कि इन कलाकृतियों को गढ़ा गया है, वहीं कुछ लोग कहते है कि यह पेड़ अनोखी प्रजाति का पेड़ है।

दो कमरों वाला फ्रांस का ओक ट्री-:

17वीं शताब्दी के अंत में करीब 30 हजार डिग्री सेंटीग्रेड के बिजली का झटका झेलने बाद आज भी सैकड़ों सालों से शान से खड़े फ्रांस के ओक ट्री के बारे में कई कहानियाँ मशहूर है। स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार ये हजार साल पुराना है।

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फिर भी विशेषज्ञों का आकलन है कि ये 800 साल पुराना है। कहा जाता है कि यह पेड़ 13वीं शताब्दी से लगा हुआ है।

उस समय फ्रांस में लुइस नौवें का शासन था और फ्रांस एक मजबूत हुकूमत हुआ करती थी। यह पेड़ हंड्रेड ईयर वॉर, ब्लैक डैथ, रीफॉर्मेशन और नेपोलियन के शासन में भी कायम रहा।

फ्रांस का अलोउविले-बैलेफॉसे गांव ‘शैने चैपेले’ के लिए मशहूर है। इसका मतलब होता है ओक के पेड़ में बना चैपल।

आर्किटेक्चर का यह अनोखा नमूना एक ओक के पेड़ पर बना हुआ है।

इसमें पेड़ के सहारे लकड़ी की घुमावदार सीढ़ियां बनी हैं। ये सीढ़ियां ऊपर बने दो चैंबर्स में पहुंचाती हैं। स्थानीय लोग इन कमरों का प्रयोग पूजा के लिए करते हैं।

स्रोत- बीबीसी, पंजाब केसरी, विकिपीडिया, दैनिक भास्कर

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