जब जलाया गया था नालंदा विश्विद्यालय तब महीनों जलती रही प्राचीनतम किताबें और पांडुलिपियां

बीमारी हालत में आखरी सांस ले रहे तुर्की लूटेरे बख्तियार खिलजी की जान बचाने वाले वैधराज की जान भी थी मुसीबत में, तब चली वैधराज ने ऐसी चाल की बचगयी दोनों की जान

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