आखिर क्यों देश के सर्वोच्च अदालत के जज कर रहे है बगावत

स्वतंत्र लोकतांत्रिक भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ. जिसके उपलक्ष्य में आजतक हर २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है. संविधान के उसी कायदे पर अपने फैसले सुनाने वाली भारत के सर्वोच्च न्यायालय न्याय व्यवस्था पर आज आरोप लग रहे है. जो गणतंत्र दिवस से ठिक 16 दिन पहले हो रहा है. आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चिट्ठी जारी की, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं. जजों के मुताबिक यह चिट्ठी उन्होंने चीफ जस्टिस को लिखी थी. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित 7 पन्नों के पत्र में जजों ने कुछ मामलों के असाइनमेंट को लेकर नाराजगी जताई है. कहा जाता है एक लोकतांत्रिक देश का सर्वोच्च अदालत सरकार और समाज से ऊपर होता है. मगर इन दिनों भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के सर्वोच्च अदालत के चार जज ही अपने मुख्य जज के खिलाफ बगावत कर बैठे है. कानून के ज्ञाता इसे ऐतिहासिक घटना मानते हुए अपनी अलग-अलग विचार धारा व्यक्त कर रहे है. तो चलिए जानते है आखिर क्या है मामला और 23 जजों में से चार जजों ने अपने मुख्य न्‍या‍याधीश  पर किस तरह के आरोप लगाया है..!

मुख्य न्‍या‍याधीश को लिखी गयी चिठ्ठी के कुछ अंश 

kuchhnaya

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा उस उस परंपरा से बाहर जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत अहम मामलों में फैसले सामूहिक तौर पर लिए जाते रहे हैं.
केसों के बंटवारे में चीफ जस्टिस नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट की अखंडता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मामलों को मुख्‍य न्‍या‍याधीश बिना किसी वाजिब कारण के अपनी प्रेफेरेंस (पसंद) की बेंचों को सौंप देते हैं. इससे संस्थान की छवि बिगड़ी है.
हम इनमें से बहुत ज़्यादा केसों का हवाला नहीं दे रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उतराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसफ और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है.
जस्टिस केएम जोसफ ने ही हाईकोर्ट में रहते हुए 21 अप्रैल, 2016 को उतराखंड में हरीश रावत की सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को रद्द किया था.
इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट में सीधे जज बनने वाली पहली महिला जज होंगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल जस्टिस आर भानुमति के बाद वह दूसरी महिला जज होंगी.
सुप्रीम कोर्ट में तय 31 पदों में से फिलहाल 25 जज हैं, यानी जजों के 6 पद खाली हैं.

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने हालही में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर दुनिया के सामने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया. सवाल उठाने वाले ये सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायलय) के चार जज, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ‘राष्ट्र और न्यापालिका के प्रति हमारी जिम्मेदारी है, जिसके कारण हम यहां हैं. हमने मुद्दों को लेकर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी. लोकतंत्र इस तरह से जीवीत नहीं रह सकता है.’

जस्टिस चेलमेश्वर जाहिर तौर पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के उस मामले का उल्लेख कर रहे थे, जिसमें पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के दो शीर्ष जजों के बीच टकराव देखा गया था. नवंबर में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस चेलमेश्वर के बीच पैदा हुए मतभेद के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि कई अन्य जज चीफ जस्टिस के कामकाज के तरीके से खुश नहीं थे.

इस तरह पहली बार मीडिया के सामने आए सुप्रीम कोर्ट के जज

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पहली बार मीडिया के सामने आते हुए यह बातें कहीं. न्‍यायाधीशों ने मीडिया से कहा, हम आज इसलिए आपके सामने आए हैं, ताकि कोई ये न कहे कि हमने अपनी आत्‍माएं बेच दीं.

 

 

 

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