अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी में उसकी बराबरी करे

मौसम की सटीक भविष्यवाणी, दवाओं के निर्माण आदि के लिए बीएचयू का आईआईटी संस्थान भी भारत सरकार के राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन से हालही में जुड़ गया है। इसके लिए संस्थान में 500 टेराफ्लाप क्षमता का परम शिवाय सुपर कंप्यूटर लगाया गया है। गूगल से लेकर फेसबुक और यूट्यूब से लेकर टि्वटर तक, ये सभी सर्विसेस आज पूरी दुनिया की धड़कनों में बसती हैं।

पर क्या आप जानते है …? कि एक साथ करोड़ों लोगों को दी जानेवाली ये डिजिटल सर्विसेज किसी छोटे-मोटे कंप्यूटर से नहीं बल्कि सुपर कंप्यूटर से ऑपरेट होती हैं। आज भले ही दुनिया में काफी संख्या में सुपर कंप्यूटर मौजूद हों लेकिन भारत के पहले सुपर कंप्यूटर की तो बात ही कुछ और है, क्‍योंकि भारत का पहला सुपर कंप्यूटर देश के वैज्ञानिकों ने खुद विकसित किया और फिर कई देशों को दिया। तो चलिए जानते सुपर कंप्यूटर की कहानी…!

मोदी से पहले ही देखा था डिजिटल भारत का सपना-:

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आज भले ही डिजिटल इंडिया का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रहा हो मगर इनसे पहले राजीव गांधी ने डिजिटल इंडिया के लिए सबसे पहले काम शुरू किया था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में हत्या कर दी गई थी। इससे पहले राजीव गांधी ने भारत में कंप्यूटर के लिए बहुत काम किया। उन्हें देश में कंप्यूटर क्रांति का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि उन्होंने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारतीय घर तक लाने का काम किया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया।

सुपर कंप्यूटर खासियत-:

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करोड़ों लोगों की इलेक्ट्रॉनिक जरूरतों को पूरा करने का साधन है सुपर कंप्यूटर। यह एक ऐसा कंप्यूटर है जो आम जरूरतों को पूरा करने वाले किसी भी कंप्यूटर से हजारों, लाखों गुना ज्यादा क्षमता और स्पीड वाला होता है। इसकी स्पीड ही इसकी पहचान है। सुपर कंप्यूटर की स्पीड को कई अरब या खरब कैलकुलेशन प्रति सेकंड की दर से नहीं बल्कि Flops में मापा जाता है। सुपर कंप्यूटर की क्षमता को मापने का यही आधुनिक पैमाना है। सुपर कंप्यूटर के शुरुआती दौर में जहां Mega Flops में कंप्यूटर की स्पीड मापी जाती थी, वहीं बाद में गीगा Flops और फिर टेरा फ्लॉप और आजकल पीटा Flops में इस कंप्यूटर की क्षमता और स्पीड मापी जाती है।

जब राजीव गांधी ने खरीदना चाहा सुपर कंप्यूटर तो अमेरिका ने अड़ा दी टांग-:

80 से 90 के दशक में भारत को 21 सदी में ले जाने का सपना संजोय जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सुपर कंप्यूटर लाने की योजना बनाई तो उसमे अमेरिका ने टांग अड़ा दी। दरअसल भारत जिस कंपनी से सुपर कंप्यूटर खरीदना चाहता था वो अमेरिका की सबसे प्रसिद्ध कंपनी थी। जिसका नाम Cray था। विश्व के टॉप 500 सुपर कंप्यूटर्स में से बहुत सारे इसी कंपनी द्वारा बनाए गए हैं। साल 1980 के आसपास जब भारत ने इस कंपनी से एक सुपर कंप्यूटर खरीदना चाहा था तो अमेरिका ने रोक लगा दी थी।

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दरअसल सुपर कंप्यूटर परमाणु हथियार डेवलप करने के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बस इसी डर से अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत भी डिजिटल टेक्नोलॉजी में उसकी बराबरी करें, इसलिए उसने Cray कंपनी द्वारा भारत को यह सुपर कंप्यूटर लेने से रोक दिया। इसके बाद तो भारत ने ठान लिया कि अब हम अपना सुपर कंप्यूटर खुद ही बनाएंगे और फिर 1980 में शुरू हुआ भारत का सुपर कंप्यूटर प्रोग्राम।

कम लागत में बनकर तैयार हुआ था भारत का सुपर कंप्यूटर-:

कहा जाता है जितनी लागत में अमेरिका से एक सुपर कंप्यूटर खरीदा जाना था उतनी ही लागत में भारत के होनहार वैज्ञानिकों ने डॉ विजय भटकर की अगुवाई में सिर्फ कंप्यूटर ही नहीं बल्कि एक ऐसा प्रोग्राम बनाया जिसने पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त की। भारत ने साल 1990 में अपने स्वदेशी सुपर कंप्यूटर प्रोग्राम को डेवलप किया जो परमाणु हथियारों के विकास में योगदान दे सकता था।

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भटकर के नेतृत्व में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग यानी C-DAC की स्थापना पुणे में किया गया। सीडैक को 3 साल का शुरुआती समय दिया गया सुपर कंप्यूटर को डेवलप करने के लिए। जिसमे 30 करोड रुपए की शुरुआती फंडिंग की गई थी। यह लगभग उतना ही समय और पैसा था जोकि अमेरिका से सुपर कंप्यूटर को खरीदने में लगने वाला था।

अंततः भारत ने सुपर कंप्यूटर प्रोटोटाइप मॉडल को 1990 में ज्‍यूरिख में हुए सुपर कंप्यूटिंग शो में अपने पहले सुपर कंप्यूटर परम 8000 को पेश किया। जिसका फाइनल रिजल्ट 1 जुलाई साल 1991 में सामने आया। सुपर कंप्यूटिंग शो में दुनिया के लगभग सभी देशों के कंप्यूटर्स को पीछे छोड़ दिया और अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर काबिज हो गया।

परम शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका मतलब होता है सुप्रीम यानी कि सबसे ऊपर। आज भले ही दुनिया में टॉप 500 कंप्यूटर में से 9 सुपर कंप्यूटर भारत के गिने जाते हैं, लेकिन PARAM 8000 ने डिजिटल जगत में भारत को जो पहचान और ख्याति दिलाई उसकी बराबरी कोई भी दूसरा सुपर कंप्यूटर नहीं कर सकता।

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बिल्कुल इसके जैसा एक दूसरा सुपर कंप्यूटर 1991 में ही ICAD Moscow में रूस के सहयोग से स्थापित किया गया। सरकार ने परम सीरीज को जारी रखा और आज भर में बेचा भी जा रहा है। परम सीरीज के कंप्यूटर्स की सबसे लेटेस्ट मशीन ‘परम ईशान’ है इसे साल 2016 में स्‍थापित किया गया यह कंप्‍यूटर 250 TFLOPS क्षमता वाला है। आज ये सुपर कंप्यूटर मौसम विज्ञान, सिविल इंजीनियरिंग, स्‍पेस साइंस समेत तमाम फील्‍ड्स में देश के लिए कमाल का काम कर रहे हैं। हालही में बीएचयू के आईटी संस्थान में स्थापित सुपर कम्यूटर भी परम का ही सीरीज है जिसका नाम है परम शिवाय…!

स्रोत- जागरण Inext

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