एक असाधारण बीमारी से जूझने वाले परिवार की प्रेरणादायी कहानी

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आज तक हम लोगों ने बड़ी से बड़ी बीमारियों और कई तरह के डिसॉर्डर के बारे में सुना है मगर मैं आज आपको एक ऐसे डिसॉर्डर या बीमारी के बारे में अवगत करा रही हूँ जिसके बारे में शायद बहुत कम लोगों को जानकारी है।वो है cervical dystonia।

ये एक ऐसी बीमारी या शारीरिक तकलीफ है, जिसका शायद ही कोई सटीक इलाज हो. मुझे तो लगता है की ये एक अभिशाप ही है, जो हमारा बुरा वक्त अपने साथ लेकर आता है।मैं तो प्रार्थना करती हूँ कि ये कभी किसी दुश्मन को भी ना हो।

Cervical Dystonia (ग्रीवा दुस्तानता) के लक्षण- ये एक ऐसी भयावह परिस्थिति है जिसमें गर्दन की माँसपेशियाँ अकड़ जाती हैं। बहुत कोशिश करने के बाद भी आप अपनी गर्दन को इच्छानुसार घुमा नहीं सकते। गर्दन का सारा नियंत्रण चला जाता है जैसे किसी नवजात का गर्दन पर नियंत्रण नही रहता ठीक वैसे ही होता है।

बार बार गर्दन को झटके लगते हैं। गर्दन का झुकाव एक ही दिशा में हो जाता है। शारिरिक असमान्यता आ जाती है। जो व्यक्ति इस परेशानी से जूझता है वह सामान्य जीवन नही जी पाता।

यह विकार किसी भी उम्र में हो सकता है। अगर शुरुवात में ध्यान नहीं दिया तो यह विकार भयावह हो सकता है। इसका कोई उपचार या इलाज नहीं। इसके होने के पीछे क्या कारण होते हैं ये डॉक्टर भी ठीक से नहीं बता पाते।

Cervical dystonia के उपचार- वैसे तो कोई सटीक उपचार नहीं इसका, पर बोटुलिनम टोक्सिन (botulinum toxin) इंजक्शन से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है पर ये इंजक्शन एक सामान्य व्यक्ति की पहुँच से बाहर है। एक इंजक्शन की कीमत 35 हजार से 40 हजार तक है। वो भी छह महीने में पूरी उम्र लेना पड़ता है। धीरे धीरे इंजक्शन का प्रभाव भी कम हो जाता है। इसलिए कहा जा सकता है की ये बीमारी लाइलाज होने के साथ साथ एक अभिशाप भी है।

जब किसी का बुरा वक्त आता है तो ये बीमारी हो सकती है। मैंने भी अपने पूरे जीवन में पहली बार इस डिसॉर्डर का नाम सुना और अपने बहुत ही करीब के व्यक्ति को cervical dystonia का शिकार पाया।

पीड़ित परिवार- मेरी एक अंतरंग और बहुत करीबी सहेली, जिसका एक हँसता खेलता परिवार, पति,पत्नी और एक आठ वर्ष की बेटी।पता नहीं इस हँसते खेलते परिवार को किसकी नजर लग गई। उसके परिवार को अचानक एक तूफान का सामना करना पड़ा। ऐसा तूफान जिसके बारे में कुछ पता नहीं कि कब रुकेगा।

मेरी ये सहेली मुझसे अपना हर सुख दुःख बांटती है। उसने जो उसके बुरे दिनों की दास्तां सुनाई वो आपसे अपने शब्दों के जरिये बाँटना चाहती हूँ।

रिचा मेरी बहुत ही खास सहेली,उसकी कहानी मेरे शब्दों के द्वारा….

मेरा एक हँसता खेलता परिवार जिसमे मेरे पति सुमित और एक आठ वर्ष की बेटी।सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था।

Happy Family Kuchh Naya

पर एक दिन मैंने नोटिस किया कि सुमित जब कुछ भी खाता है तो उसकी गर्दन एक तरफ झुक जाती है, मुझे थोड़ा अजीब लगा तो मैंने सुमित से पूछा की गर्दन में कुछ हुआ है क्या, कुछ अकड़ रहा है क्या? पर सुमित को ये सब महसूस नहीं हो रहा था, शायद। पर मेरा ध्यान बार बार वहीं जाता। मेरा मन किसी तूफान के आने की आशंका जता रहा था।

सुमित को कितनी बार बोला की डॉक्टर के यहाँ चलते हैं पर उसने ध्यान नहीं दिया। फिर वो तूफान आ ही गया जिससे मन घबरा रहा था।अचानक सुमित को गर्दन में झटके आना शुरू हुए और सिर एक तरफ झुक गया।

हम दोनों ही घबरा गए समझ नहीं आया किस डॉक्टर के यहाँ जाए? आनन फानन में और्थोपेडिक के यहाँ गये, उसने परिस्थिति देख कर बोल दिया की आप न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।पूरी रात जागती आँखों में ही गुजारी। फिर न्यूरोलॉजिस्ट का appointment लिया, मुंबई के बड़े हॉस्पिटल में।

सुमित का दर्द और झटके दोनो बढ़ते जा रहे थे, टैक्सी में बैठना भी मुश्किल हो रहा था। उस समय,मैं खुद को ,इतना असहाय महसूस कर रही थी। बार बार लगता कि काश उसका दर्द मैं सह पाती। जब हॉस्पिटल पहुँचे तो वहाँ का माहौल देखकर बहुत डर गई थी। हर तरह के मरीज वहाँ थे।

जब डॉक्टर सुमित का चेक अप कर रहे थे तो मन बहुत घबरा रहा था। फिर डॉक्टर ने बोला की इनको cervical dystonia हुआ है। कोई ऐसी दवा नही जो इसे ठीक कर सके।पूरी उम्र ऐसी disability के साथ जीना होता है।

Botulinum toxin इन्जक्शन ही इसका इलाज है, पर ये महंगे बहुत रहते है और कोई गारंटी भी नहीं। हो सकता है उम्र भर लेने पड़े। पर उन्होंने ये भी बोला की cervical Dystonia जानलेवा नहीं हैं।

cervical dystonia Kuchh Naya
Wikipedia

उन्होंने कहा, तो मुझे लगा जानलेवा तो नहीं पर रोज जो घुट घुट कर मर रहे हैं उसका क्या? उन्होंने कुछ दवाइयाँ लिख दी और बोला कि इंजक्शन के बारे में सोचिये जरूर। घर आकर इंटरनेट पर ढूँढा इस बीमारी के बारे में।जो वीडियो देखे वो रूह कंपकपाने के लिए काफी थे।हम दोनों यही सोचते कि हमने कभी किसी का कुछ बुरा नहीं किया फिर हमारे साथ ऐसा क्यूँ?

हम दोनों अंदर ही अंदर बहुत रो रहे थे, पर एक दूसरे को मजबूत करने के लिये दोनों ने कुछ दर्शाया नहीं। सुमित को नौकरी तो छोड़नी ही पड़ी पर कैसे खुद को पहले वाली स्थिति में लाये समझ नहीं आ रहा था।

फिर एक,अन्य न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क किया। बहुत ही वयस्क और अनुभवी डॉक्टर थे।हम दोनों के उदास चेहरे देख कर उन्होंने बोला, बेटा तुम लोग अभी कितने छोटे हो, पूरी उम्र पड़ी है सामने तुम्हारे। इच्छाशक्ति मजबूत रखो, मैं भगवान तो नहीं पर कोशिश जरूर करूँगा। उनका इतना कहना हुआ और मेरी आँखे भर आयी। लगा किसी ने तो सकारात्मक जवाब दिया। फिर उनके यहाँ इलाज शुरू हुआ।

लोकल ट्रेन से ही जाना पड़ता था। आने जाने वाले सभी हम दोनों को बड़ी अजीब नज़रों से देखा करते थे। जैसे कोई अजूबा हो। तब लगा की वाकयी कितना बड़ा साहस चाहिए किसी शरीरिक कमी के साथ जीवन जीने के लिये।

एक तो वैसे ही व्यक्ति अपने कष्टों से उबर नहीं पाता ऊपर से ये दुनिया वाले जीने नहीं देते। पर सुमित वाकयी बहुत मजबूत इच्छाशक्ति रखने वाला और साहसी इंसान था।बहुत शारिरिक और मानसिक दोनों ही तकलीफ सह रहा था। मैं भी कुछ कम परेशान नहीं थी। मुझ पर तो दोहरी जवाबदारी आ गयी थी। घर, बाहर और सुमित, सब को मुझे ही संभालना था। एक सिंगल पैरेंट,जिस तरह का जीवन जीता है शायद मेरा भी यही हाल था। पर अपना दर्द किससे बांटती? लोग फिर मुझे कमजोर समझते।

भविष्य में अंधकार के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा था। कभी कभी लगता अपने आप को कुछ कर लूँ। पर जब मासूम बेटी और सुमित का चेहरा नजर आता तो मुझे खुद से घृणा होती की इतनी मतलबी कैसे हो सकती हूँ मैं।

Couple Kuchh Naya

मुझे तो मेरे परिवार और पति कि ताकत बनकर उन्हें इस परेशानी से बाहर लाना है। तभी मैंने फैसला कर लिया कि अब जो भी हो दोनों साथ मिलकर झेलेंगे।

खूब मजबूत किया खुद को, एक पत्थर की तरह। खुद को बहुत आत्मनिर्भर बनाया।अब जो बाहर के काम सुमित करते थे, वो मैं करने लगी। बस नौकरी नहीं तलाश रही थी क्यूंकि उस समय मेरे पति को मेरी बहुत जरूरत थी। उसे ऐसा अकेला नहीं छोड़ सकती थी क्यूँकि उसे उस समय एक मानसिक सहारा चाहिये था।

इन बुरे दिनों में क्या क्या नहीं सहा हम दोनों ने, पैसे तो गया ही मनोबल भी कमजोर हो रहा था धीरे धीरे। क्या क्या नहीं किया उस समय, एलोपेथी,आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, पूजा पाठ, ज्योतिषी और ना जाने क्या क्या, मुझे तो अब याद नहीं, वो कहते हैं ना बातें भूल जाती हैं यादें याद आती हैं।

ज्योतिषी भी ऐसे समय बहुत मूर्ख बनाते हैं, ये भी एक आर्टिकल लिखने के लिए अच्छा विषय है।

एक दिन की बात है, मैं और सुमित डॉक्टर के यहाँ से आ रहे थे तो रास्ते में एक व्यक्ति मिला। वो सुमित को बार बार देख रहा था, मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था। अचानक उसने नजदीक आकर बोला की मेरे पिताजी को भी यही प्रॉब्लम थी। शिरडी से एक वैद्य जी आते हैं उनकी दवा से वो ठीक हुए, मैं आपको उनका नंबर दे सकता हूँ।

मन तो नहीं किया उस पर विश्वास करने का, पर उस समय ,मैं बड़ी श्रद्धा से साई बाबा के व्रत कर रही थी तो एक पल को लगा शायद उन्हीं की महिमा हो ये। मैंने उससे वैद्य का नंबर लिया।

घर आकर दोनों ने तय किया कि इस नंबर पर फोन करते हैं, शायद कुछ अच्छा होने वाला हो।  जब वैद्य को फोन किया तो वो बोला की मैं कल ही मुंबई आ रहा हूँ, इसके बाद तीन महीने बाद आऊँगा।

फिर हम दोनों ने सोचा की तीन महीने का इंतजार नही कर सकते कल ही चलते हैं, फिर उनको हाँ बोलकर वहाँ का पता लिया। उसने एक होटल का पता दिया।मेरा मन तो आशंका से ग्रसित हो रहा था, होटल क्यूँ बुलाया, एक तो सुमित की ऐसी स्थिति और मैं अकेली। फिर भी हिम्मत करके वहाँ पहुँचे।

उसने सुमित की नाड़ी चेक की फिर बोला मैं कुछ दवाई बनाऊंगा, मेरी फीस 200 रुपये है, दवाइयाँ महंगी हो सकती हैं।हम दोनों ने सोचा इस प्रॉब्लम से निकलने के लिये महंगा सस्ता क्या सोचना।

वह हमें एक मेडिकल शॉप में ले गया और कई भस्म मिलाकर एक दवा तयार की जब शॉप वाले ने बिल बोला तो दोनों के जैसे होश ही उड़ गए, सीधा चालीस हजार का बिल।

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उस वक्त इतना कैश भी नहीं था हमारे पास, उसे थोड़ा पैसा जमा कर दूसरे दिन आकर दवाई लेंगे ऐसा बोला। अगले दिन वो दवाई collect की।

बड़ी श्रद्धा और विश्वास से सुमित ने वो दवा लेना शुरू किया। मगर ये परेशानी तो नहीं गई, उसके विपरीत side iffect होने लगे। दवा गर्म थी तो छाले और ना जाने क्या क्या? अंत् में परेशान होकर दवा बंद कर दी। मैंने हताश होकर खुद अपने हांथो से उस चालीस हजार की दवा को पानी में बहा दिया और बहुत रोयी।

ऐसी स्थिति में मुझे मेरे मायके वालों का वित्तीय आधार तो मिला ही पर जो उन्होंने मुझे मानसिक संबल दिया वो मुझे इन कठिन दिनों में जीने का हौसला देता रहा। मेरी माँ का मेरी पीठ पर फेरा हुआ हाथ, कि बेटा अभी मैं जिंदा हूँ तू परेशान मत हो, हम सब हैं ना, तू खाली सुमित की तरफ ध्यान दे, पैसे की चिंता तू मत कर।

बुरे समय में अगर पैसे की मदद ना मिले बस कोई प्यार से दो सकरात्मक शब्द बोल दे तो कठिन दिनों में भी जीना आसान हो जाता है, मुझे ये बोलने में बिल्कुल भी झिझक नहीं की वो मानसिक आधार, प्यार और सहानुभूति के शब्द सिर्फ मुझे मायके से ही मिले, इसलिए उस बुरे समय में जिन्होंने मुझे प्यार के दो शब्द तक नहीं कहे, ऐसे लोग मुझसे हमेशा के लिए दूर हो गए, कुछ रिश्ते खाली नाम के होते हैं ये मैंने तब अनुभव किया, बुरे समय में बहुत लोगों के ताने भी सुने. पर किसी के दिये ताने कभी कभी जिंदगी बदल देते हैं. मुझे मेरा अस्तित्व ढूंढ़ने में उन तानो का बहुत सहारा मिला।

मुझ पर जॉब करने का दवाब बढ़ता जा रहा था. ताने भी सुनने पढ़ते थे. पर मैंने सोचा था जब तक सुमित की स्थिति थोड़ी ठीक नहीं हो जाती, मुझे सब कुछ चुपचाप सहन करना ही होगा.

एक स्त्री के लिये बहुत कठिन होता है ऐसी स्थिति में जीना. जब पति जॉबलेस हो जाए और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ ना हो तो. पुरूषों की बुरी नजरों का सामना करना उसके लिये कितना मुश्किल होता है वो भी उस बुरे वक्त में महसूस किया मैंने.

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हर एक व्यक्ति उस समय यही सोचता है की इनका वैवाहिक जीवन कैसे चल रहा होगा?मेरे कुछ करीबी और खास लोगों ने उस समय ये सवाल किया था, पर उस समय मैंने हँसकर टाल दिया. चूंकि आज मैं अपने बारे में लिख रही हूँ तो मुझे किसी भी विषय पर खुलेपन से लिखने में कोई झिझक नहीं.

मैं इस समाज से पूछना चाहती हूँ की क्या केवल शारीरिक संबंध ही पति पत्नी के रिश्ते की नींव होते हैं,उनके बीच वो प्यार, वो अपनापन, वो जज्बात,इसके कुछ मायने नहीं क्या? फिर क्यूँ लोग ऐसे बेहूदा सवाल पूछने की हिम्मत करते हैं. वाकयी ये वादविवाद के लिये अच्छा विषय है.

अब आगे का बताती हूंँ, दो तीन महीने ऐसे ही गुजारने के बाद एक ceragem center के बारे में पता चला, जो अक्यूप्रेशेर बेड है। यहाँ पर लोगों को फ्री थेरेपी देते हैं. जब पहली बार वहाँ पहुंचे तो उन्होंने आश्वासन दिया की जो लोग सारे इलाज करने के बाद हार जाते हैं, वो यहाँ थेरेपी लेकर ठीक होते हैं, वो बेड scientifically proved है.आपको इस सेंटर की जानकारी इंटरनेट से मिल सकती है. इंडिया में इसके पाँच सौ केंद्र है. इस सेंटर पर सुमित को रोज स्कूटी पर लेकर जाती।

Ceragem Kuchh naya
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Ceragem सेंटर की फ्री सुविधा और उससे होने वाले फायदे के कारण लंबी लाइन होती थी, घंटों इंतजार करना पड़ता था| मैं रोज जल्दी जल्दी घर के काम खत्म करती और सुमित को वहाँ ले जाती, अब रोज की यही दिनचर्या बन गई थी.

एक महीने में सुमित को फर्क पड़ने लगा तो विश्वास बढ़ गया. धीरे धीरे तीन चार महीनों में सुमित की स्थिति में काफी सुधार आया. फिर वो अकेले ही जाने लगे और मैंने एक पार्ट टाइम जॉब शुरू किया. वहाँ मुझे थोड़ी थोड़ी ग्रोथ मिलती गई. पर मैंने अपने वर्किंग प्लेस पर कभी किसी को महसूस नहीं होने दिया कि मैं अंदर ही अंदर कितना परेशान थी. हमेशा एक मुस्कुराता चेहरा लेकर घूमती थी ताकि किसी को मेरे दुखों का पता ना चले और कोई मेरी मजबूरी का फायदा ना उठा सके.

खुद को मैने खूब आत्मनिर्भर बनाया और मेरे अंदर जो खूबियाँ थी उन्हे पहचान कर खुद का एक अस्तित्व साबित करने की कोशिश की. इन सब परिथितियों में एक नन्ही सी जान भी पिस रही थी, वो थी मेरी बेटी, उसको समझ नहीं आ रहा था कि पापा को अचानक क्या हुआ? उसके फ्रेंड भी अजीब अजीब सवाल करते उससे.

वो भी मुझसे पूछती कि सबके मम्मी पापा घुमाने ले जाते हैं मगर हम कहीं नहीं जाते. उसे क्या समझाती मैं. फिर कई बार उसे अकेले ही ले जाया करती थी, उसे जहाँ जाने का मन होता वहाँ।

हम लोगों ने उस समय जो भी सहन किया उसे शब्दों में बयां करना बहुत कठिन है. मुझे इतना पता है कि जिन लोगों में साहस और इच्छाशक्ति मजबूत होती है उनके आगे बड़ी से बड़ी परेशानी भी घुटने टेक् देती है. शायद ईश्वर को भी मजबूर होना पड़ा दोनों के मजबूत इरादे देखकर.
सुमित ने इस परेशानी को एक चैलेंज समझ कर स्वीकार किया. सुमित ने घर पर खाली बैठना उचित ना समझकर, एम. बी.ए. किया. क्यूंकि तब तक पूरी तरह ठीक नहीं था, इसलिए मौका नहीं गवाया और एक डिग्री हासिल की.

पूरे एक से डेढ़ साल तक संघर्ष करने के बाद ,एलोपेथी और ceragem थेरेपी लेने के बाद, सुमित अब पूरी तरह स्वस्थ है, उसे बढ़िया जॉब भी मिला और पहले वाला ओहदा और पद् भी मिला एक कंपनी में.

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अब संघर्ष करते करते जिंदगी थोड़ा पटरी पर आई है, ईश्वर से यही प्रार्थना है की वो ऐसा कठिन वक्त किसी दुश्मन पर भी ना लाये।(लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती)।

जिंदगी का ये बुरा वक्त हमें जिंदगी जीना सिखा गया,हर पल् यहाँ जी भर जियो जो है समा कल हो ना हो। जिंदगी में आये इस तूफान ने मेरे जीवन में सकारत्मकता भी लायी।मैं बहुत ही आत्मनिर्भर और साहसी बन गई।मुझे और मेरी काबिलयत दोनों को पहचाना मैंने। ये थी हमारे संघर्षों की सच्ची कहानी, इसमें कुछ भी बनावटीपन् नहीं हैं, ये मेरे खुद के व्यक्तिगत अनुभव है।

आप dystonia और ceragem centre की जानकारी इंटरनेट से ले सकते हैं। अगर आपको कोई इस डिसॉर्डर से ग्रसित दिखे तो कृपया उन्हें भ्रमित ना करके उचित सलाह दें, ताकि किसी का जीवन नर्क होने से बच जाए।

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One thought on “एक असाधारण बीमारी से जूझने वाले परिवार की प्रेरणादायी कहानी

  • March 18, 2019 at 8:40 am
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    तुम्हारा blog पढ़ कर परिस्थिति आखों के सामने आ गयी। आज के समय में बीमारी पूरे परिवार को तोड़ सकती है पर इस परिवार ने सब कुछ सह कर भी अपना मनोबल बना कर रखा।
    मेरा बहुत अभिनंदन और तुम्हारे लेखन को बधाई।

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