श्री देवी को नहीं थी दिल की बीमारी…

बॉलीवुड की पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी का 24 फरवरी शनिवार की रात दुबई के जुमेराह अमीरात टावर्स होटल में अचानक मौत हो गयी. जिसके बाद पूरा बॉलीवुड समेत श्रीदेवी के चाहने वाले सदमे में रहे. मीडिया खबरों के मुताबिक उनकी मौत की वजह कार्डिक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) बताई जा रही है.

हालाँकि उनकी मौत को लेकर मीडिया में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. श्रीदेवी का पोस्टमार्ट भी किया गया. 26 फरवरी की दोपहर बिजनेस मैन अनिल अंबानी के प्राइवेट जेट से लाया गया. जिन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

दिल की मरीज नहीं थी श्रीदेवी 

श्रीदेवी के देवर और एक्टर संजय कपूर ने उनकी मौत को लेकर संजय कपूर ने सऊदी अरब के स्थानीय अखबार खलीज टाइम्स को बताया  था कि जब श्रीदेवी की मौत से कुछ वक्त पहले तक वह होटल के कमरे में ही थी. हम सब सकते में हैं, उन्हें कभी भी दिल से जुड़ी कोई बीमारी नहीं थी. श्रीदेवी के साथ शादी में संजय कपूर भी दुबई गए थे. रात 12 बजे संजय दुबई से मुंबई लौट आए, लेकिन मुंबई पहुंचते ही उन्हें श्रीदेवी के निधन की खबर मिली। इस पर उन्होंने फिर से दुबई की फ्लाइट पकड़ ली।

श्रीदेवी ने ही दुबई में रहने की जताई थी ख्वाहिश

दरअसल, दुबई में श्रीदेवी के भांजे मोहित मारवाह की 20 फरवरी को शादी थी. इस शादी में शामिल होने श्रीदेवी, अपने पति, दोनों बेटियों, देवर संजय कपूर और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गईं थी. शादी संपन्न होने के बाद श्रीदेवी ने दुबई में कुछ दिन और रुकने की ख्वाहिश जाहिर की थी जिसके बाद ये लोग दुबई में कुछ और दिन रुक गए.

क्या होता है कार्डिएक अरेस्ट?

कार्डिएक अरेस्ट की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन दिल से जुड़ी कुछ बीमारियां इसकी आशंका बढ़ा देती हैं. जिसमे कोरोनरी हार्ट की बीमारी, हार्ट अटैक, कार्डियोमायोपैथी, कॉनजेनिटल हार्ट की बीमारी, हार्ट वाल्व में परेशानी, हार्ट मसल में इनफ्लेमेशन, लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम जैसे डिसऑर्डर, इसके अलावा कुछ दूसरे कारण हैं, जो कार्डिएक अरेस्ट को बुलावा दे सकते हैं, जैसे- बिजली का झटका लगना, जरूरत से ज्यादा ड्रग्स लेना, हैमरेज जिसमें खून का काफी नुकसान हो जाता है, पानी में डूबना.

लेकिन कार्डिएक अरेस्ट होता क्या है, दरअसल, कार्डिएक अरेस्ट अचानक होता है और शरीर की तरफ से कोई चेतावनी भी नहीं मिलती. ये इंसानी शरीर के लिए इतना खतरनाक साबित होता है और ये हार्ट फेल होने या दिल का दौरा पड़ने से अलग है.

हार्ट ओआरजी के मुताबिक इसकी वजह आम तौर पर दिल में होने वाली इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है, जो धड़कन का तालमेल बिगाड़ देती है. इससे दिल की पम्प करने की क्षमता पर असर होता है और वो दिमाग, दिल या शरीर के दूसरे हिस्सों तक खून पहुंचाने में कामयाब नहीं रहता.

इसमें चंद पलों के भीतर इंसान बेहोश हो जाता है और नब्ज भी जाती रहती है. अगर सही वक्त पर सही इलाज न मिले तो कार्डिएक अरेस्ट के कुछ सेकेंड या मिनटों में मौत हो सकती है.

अमरीका में प्रैक्टिस कर रहे सीनियर डॉक्टर सौरभ बंसल के मुताबिक, ‘ये काफी दुखद है. किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की होगी.’ ‘दरअसल, कार्डिएक अरेस्ट हर मौत का अंतिम बिंदु कहा जा सकता है. इसका मतलब है दिल की धड़कन बंद हो जाना और यही मौत का कारण है.’

‘इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं. आम तौर पर इसकी वजह दिल का बडा दौरा पड़ना हो सकता है. हालांकि बात ये भी है कि 54 साल की उम्र में आम तौर पर जानलेवा दिल का दौरा पडने का खतरा कम रहता है. उन्हें दूसरी मेडिकल दिक्कतें पहले से भी रही हो सकती हैं, लेकिन जाहिर है इसके बारे में हम लोग नहीं जानते.’

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार दिल में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की दिक्कतें शरीर में जब रक्त नहीं पहुंचाती तो वो कार्डिएक अरेस्ट की शक्ल ले लेता है. जब इंसान का शरीर रक्त को पम्प करना बंद कर देता है तो दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. ऐसा होने पर इंसान बेहोश हो जाता है और सांस आना बंद होने लगता है. सबसे बडी मुश्किल ये है कि कार्डिएक अरेस्ट आने से पहले इसके कोई लक्षण नहीं दिखते. यही वजह है कि कार्डिएक अरेस्ट की सूरत में मौत होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

इसकी सबसे आम वजह असाधारण हार्ट रिदम बताई जाती है जिसे विज्ञान की भाषा में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन कहा जाता है. दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधियां इतनी ज्यादा बिगड़ जाती हैं कि वो धड़कना बंद कर देता है और एक तरह से कांपने लगता है.

ऐसा था फिल्मी करियर

13 अगस्त 1963 जन्मी श्रीदेवी ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत महज चार वर्ष की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट की थी. उनकी पहली फिल्म बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट थुनविन थी. श्रीदेवी ने अपने वयस्क करियर की शुरुआत साल 1979 में हिंदी फिल्म सोलवां सावन से की थी. हालंकि उन्हें बॉलीवुड में पहचान फिल्म 1983 में आई फिल्म हिम्मतवाला से मिली. उनके कर‍ियर की यादगार फ‍िल्‍मों में सदमा, नगीना, कर्मा, चांदनी, लम्‍हे, चालबाज वगैरह शामिल हैं. 2017 में वह पर्दे पर फ‍िल्‍म मॉम में नजर आई थी. अंत में 24 फरवरी 2018 को फिल्मी दुनिया की हवा-हवाई अपने चाहने वालों को छोड़ गयी.

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