तो प्रलय की असली भविष्यवाणी ये है !

दुनिया में प्रलय जैसी प्राकृतिक आपदा की भविष्यवाणी तो कई भविष्यज्ञाता लंबे अरसे करते आ रहे है. कोई पक्के दावे करता है तो इंसानों द्वारा किये जा रही प्राकृतिक पर्यावरण के दोहन को प्रलय की वजह बता रहा है. ऐसी ही कई समस्यों और भविष्यवाणी को लेकर दुनियाभर के हजारों वैज्ञानिक चिंतित है. जी हां अब दुनिया में प्रलय का कोई भविष्यवाणी नहीं किया जा रहा है बल्कि एक वैज्ञानिक शोध से दावा किया गया है की यदि समय रहते प्राकृतिक पर्यावरण को संरक्षित नहीं किया गया तो वाकही प्रलय निश्चित है. तो आईये जानते है क्या है दुनिया भर के हजारों वैज्ञानिकों की चिंता…..!

 

वेदों-पुराणों में प्रलय का जिक्र

lord kalki kuchhnaya

 

देखा जाय तो दुनिया में प्रलय की भविष्यवाणी वेदों-पुराणों में पहले किया जा चुका. महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र है, लेकिन यह किसी जल प्रलय से नहीं बल्कि धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा. महाभारत के वनपर्व में उल्लेख मिलता है कि कलियुग के अंत में सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि सातों समुद्र और नदियां सूख जाएंगी. जिसमे जिसमे भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की बात कही गयी है.

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भविष्यज्ञाताओं भविष्यवाणी

kuchhnaya

वर्ष २०१२ से लेकर वर्ष 2017 में भी 23 सितम्बर को प्रलय आने की भविष्यवाणी कई भविष्य ज्ञाताओं ने कर डाली है. जो अंत में झूठी साबित हुई. आगे भी इस तरह की भविष्यवाणी की जा रही है.

दुनियाभर के वैज्ञानिकों की चिंता

माना की यह 23 सितम्बर की भविष्यवाणी गलत निकली लेकिन इसी साल 184 देशों के 15000 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने एक साथ आकार इंसानियत को बचाए रखने के लिए दस्तावेज़ ऑनलाइन प्रकाशित किया है ,

इस तरह का पहला पत्र लिखा गया था 1992 में विश्व भर के 1500 वैज्ञानिकों द्वारा ताकि दुनिया को बदलते वातावरण और उसके द्वारा होने वाले नुकसान को समझाया जा सके.

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लेकिन पिछले 25 सालों में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 26 % तक घट चुकी है , मृत क्षेत्र यानी की ऐसा स्थान जहाँ वायु इतनी ज्यादा खराब है की मनुष्य वहाँ नहीं रह सकता जो 75 % बड़ा है. लगभग 300 करोड़ एकड़ जंगल इंसानों ने अपनी जरूरतों के लिए नष्ट कर दिया.

पृथ्वी की जनसँख्या 35 % से ज्यादा बढ़ गयी है. दो दशकों बाद अब स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गयी है कि इस बार पृथ्वी की दयनीय दशा सबको समझाने के लिए विश्व वैज्ञानिक परिसर के 15000 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने इस आधिकारिक पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसमे यह साफ़ साफ़ लिखा है कि अगर जल्दी ही मनुष्य द्वारा वातावरण की सफाई के लिए जरूरी कदम नहीं उठाये गये तो आने वाले समय में हमे किसी प्रकार की बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है. जो किसी प्रलय से कम नहीं.

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