राजनीती में सच्चाई का आदर्श कायम करनेवाले असामान्य नेता : मनोहर पर्रीकर

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देश के पूर्व रक्षामंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। कल शाम को यह खबर आई और पूरा देश उनके दुखद निधन का दर्द महसूस कर रहा है।

अपने सरल जीवन से सर्व परिचित और ईमानदारी से काम करनेवाले मनोहर पर्रिकर ने अपने पूरे करियर में भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके गुजर जाने के बाद देश को बड़े स्तर पर क्षती पहुंची है ऐसी भावना सभी स्तरों पर व्यक्त की जा रही है।

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पर्रिकर देश के पहले IITian मुख्यमंत्री हैं। लेकिन इतना ही नहीं, ऐसी कई चीजें हैं जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग व्यक्तित्व की पहचान देती हैं।

हमारे पास उनके सादगी और विनम्रता के कई उदाहरण हैं। हमारा देश लोकतांत्रिक है, इसलिए हमारे नेताओं को जनता का सेवक माना जाता है। उसका सबसे अच्छा उदाहरण मनोहर पर्रिकर हैं।

1३ दिसंबर, १९५५ को गोवा के मापुसा में जन्मे मनोहर पर्रिकर, भारत के पहले IITian मुख्यमंत्री थे। उन्होंने मुंबई IIT से डिग्री ली।

पर्रिकर छोटी उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए और उनकी काबिलयत देखकर २६ साल की उम्र में ही उन्हें गोवा में आरएसएस का केंद्रीय समन्वयक बना दिया गया।

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१९९४ में वे पहली बार विधायक बने। १९९९ में, पर्रिकर गोवा विधानसभा में विपक्ष के नेता थे।

जब १९९४ में पर्रिकर पहली बार विधायक बने थे, तब भाजपा सरकार के पास राज्य में केवल ४ सीटें थीं। लेकिन पर्रिकर ने गोवा में छह साल में गोवा में भाजपा की सरकार ले ली।

पर्रिकर के प्रशासनिक और संगठनात्मक कौशल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रभावित हुए । यही कारण है कि मोदी ने २०१४ में पर्रिकर को मंत्रिमंडल में रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी।

उनकी पत्नी मेधा की २००१ में कैंसर से मृत्यु हो गई थी, उनके उत्पल और अभिजात नामक दो बच्चे हैं। उत्पल ने अमेरिका के मिशिगन स्टेट कॉलेज से इंजीनियरिंग की है, अभिजात एक स्थानीय व्यापारी हैं।

बेटे की शादी में सभी सूट बूट में आने वाले मेहमानोंका स्वागत पर्रिकरजी ने उनकी सिंपल हाफ शर्ट और पैंट में किया, जिसके लिए वे सुपरिचित थे।

मुख्यमंत्री होने के बावजूद, उन्होंने अपने कार्यालय जाने के लिए दोपहिया वाहनों का उपयोग किया।उनके कामको सबसे ज्यादा प्राथमिकता देनेवाले पर्रिकर, दिन में १६ से १८ घंटे काम करते हैं।

एक बार आधी रात तक, वह गिरिराज वर्नेकर के साथ एक परियोजना पर चर्चा कर रहे थे। जब वर्णेकर ने पूछा, कल कितने बजे मिलना है , तो पर्रिकर ने कहा कि कल थोड़ी देर से यानि सुबह ६:३० बजे आया तो भी चलेगा ।

जब वर्नेकर सुबह ६:१५ बजे मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे, तो उन्होंने महसूस किया कि पर्रिकर सुबह ५:१५ बजे से कार्यालय में काम कर रहे थे।

फिल्म फेस्टिवल २००४ के उद्घाटन समारोह में, पर्रिकर पुलिस के साथ कार्यक्रम स्थल के बाहर यातायात को संभालने के लिए काम कर रहे थे।

पर्रिकर, २०१२ में जब तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने मंचपर आए तो उन्होंने हर एक व्यक्ति से हाथ मिलाया जो उन्हें बधाई देने आये हुए थे।

पर्रिकर एक उतने ही भावुक व्यक्ति थे जितना कि वह अनुशासित! मार्च २०१२ में, पर्यटन मंत्री, श्री मातंजन सल्दान्हा की मृत्यु को देखकर वे बहुत शोकाकुल हुए थे और अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे ।

पर्रिकर नियमों के पक्के थे। लेकिन उनसे इंसानियत की सीख से सकते है। एक बार अपने बेटे के साथ एक महिला साप्ताहिक जनता दरबार में पहुंची और अपने बेटे के लिए एक लैपटॉप मांगा, तो अधिकारी ने बताया कि लड़का योजना के तहत नहीं हैं ।

पर्रिकर को याद आया की वह अपने जनसंपर्क अभियान के दौरान महिला से मिले थे और उन्होंने इस योजना के बारे में बताया था। पर्रिकर ने तुरंत लड़के को लैपटॉप देने की व्यवस्था की और अपनी जेबसे पैसे दिए।

पर्रिकर इकोनॉमी क्लास से यात्रा करते हैं। कई लोगों ने उन्हें एक आम नागरिक के रूप में देखा है, और येभी देखा है की वह बोर्डिंग बस के सफ़र कर रहे है और यात्रियों की कतार में खड़े हैं।

निस्वार्थ और सेवाभाव से काम करने वाले राजनीतिक नेताओंकी कमी महसूस होती है, और ऐसे आजके ज़माने में, सरल जीवन ईमानदारी की संस्कृति में समर्पित मनोहर पर्रिकर जैसा व्यक्तित्व मुश्किल से मिलेगा।

एक आदर्श राजनेता कैसा हो इसकी मिसाल की स्थापना करने वाले मनोहर पर्रिकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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