RTI के तहत मांगी जाती हैं मजकियां जानकारियां

अक्सर किसी कंपनी के ग्राहक हेल्पलाइन नंबरों पर लोगों के उल्टे-सीधे सवाल करने वालों के बारे में तो आपने सुना होगा. मगर भारत में एक कानून के तहत सरकारी विभागों से भी कुछ ऐसे ही सवाल किये जाते है.

भारत में 12 अक्टूबर 2005 को सरकार द्वारा सभी लोगों को “सूचना का अधिकार” (RTI) दिया गया था. इसके तहत कोई भी आम व्यक्ति सरकारी रिकार्ड या फाइलों में दर्ज सूचना के बारे में जानकारी मांग सकता है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोग इस कानून का ऐसी जानकारियां हासिल करने लिए इस्तेमाल करते है जिसे जानकर जन सूचना के अधिकारी का ही नहीं किसी का भी दिमाग चकरा सकता है. आज हम आपको कुछ ऐसे ही RTI आवेदकों के आवेदन के बारे में बतायेंगे जिन्होंने सूचना के अधिकार के तहत अजब-गजब तरीके की जानकारियां मांगी.

लड़की ने पूछा जार्ज बुस को भेजे गए लड्डू किसने खाए ?

वर्ष 2008 में के फरवरी महीने में उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक लड़की ने सुचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी कि उसने यह अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश को लड्डू भेजे थे वो उन तक नहीं पहुंचे हैं तो उसे किसने खाया ?

पान गुटखा-चबाने के आदतों के बारे में जानकारी

वर्ष 2010 के सितंबर महीने में दिल्ली के एक निवासी ने एमसीडी अधिकारियों के ‘पान’ और तंबाकू चबाने की आदतों के बारे में आरटीआई के तहत जानकारी  मांगा. आवेदन में पान सामग्री के बारे में भी पूछा गया.

राज्यपाल के भोजन के मेन्यु की मांगी जानकारी 

वर्ष 2010 के मई महीने में हैदराबाद के एक निवासी ने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के बारे में जानकारी मांगी कि वे कितनी बार मंदिर जाते हैं. साथ ही आधिकारिक आवास पर आयोजित रात्रि भोज के मेनू की के बारे में जानकारी मांगी.

शादी के लिए मांगी जानकारी 

वर्ष 2010 जनवरी माह में गुजरात के कच्छ का रहने वाला एक 47 वर्षीय आदमी ने तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग से अनुरोध किया कि वे किसी भी सरकारी विभाग में कार्यरत किसी महिला से शादी करने और उसे जीवन साथी बनाने के बारे में जानकारी प्रदान करें.

दुल्हन और लड़की की कीमत की जानकारी मांगी 

वर्ष 2011 के अप्रैल महीने में पंजाब विश्वविद्यालय में सुचना के अधिकार के तहत भारतीय लिपियों , रामायण और महाभारत के अनुसार समय की कीमत की जानकारी मांगी. उसने ग्रंथों के अनुसार सुंदर, धार्मिक दुल्हन और लड़की की कीमत पर भी जानकारी मांगी.

अंडरवियर पहनने के अधिकार की जानकारी मांगी 

वर्ष  2012 के सितंबर महीने में एक सम्मेलन में जहां पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भाषण दे रहे थे, दिल्ली के एक कार्यकर्ता ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कपड़े उतार दिए जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के बाद उस कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी कि एक नागरिक के रूप में उन्हें अपनी पसंद की अंडरवियर पहनने का अधिकार है?

वोटिंग मशीन के रंग के बारे में मांगी जानकारी

वर्ष 2014 के मार्च महीने में एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने भारत के चुनाव आयोग से पूछा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में इस्तेमाल होने वाले चुनाव का प्रतीक काले और सफेद रंग में क्यों होते है, रंगीन क्यों नहीं है.

तो हमरे देश में किसी भी कानून सही इस्तेमाल ही नहीं कुछ इस तरह से इस्तेमाल होता है. जिसके बारे जानकर हर कोई हैरान रह जाता है.

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