राम के नाम से बन गयी ऐसी परंपरा कि, न होती है राम की पूजा न जाता है कोई मंदिर

पिछले कई वर्षों से भगवान राम के नाम और मंदिर निर्माण को लेकर कई तरह के विवाद और विरोध देखने-सुनने को मिलते रहे हैं। राम के नाम से तो पिछले पांच सालों में खूब राजनीति भी होती रही है। मगर भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में एक ऐसा समुदाय है जो अपने पूरे बदन पर राम नाम का टैटू गुदवाता है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कैसे रामनामी नाम का समुदाय विकसित हुआ और पूरे शरीर पर राम नाम का टैटू बनवाने की परंपरा बन गयी संस्कृति…!

नख से सिख तक राम नाम का गोदना-:

inmarathi.com

शरीर के किसी भाई अंग पर कई तरह के टैटू बनवाने का शौक आज भले ही फैशन के रूप में देखा जाता हो मगर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आदिवासी इलाके में एक समुदाय है। जहां लोगों के पूरे शरीर पर राम नाम लिखा हुआ होता है।

Gyanpanti.com

सिर से लेकर पैर तक, पेट से लेकर पीठ तक जहां देखो राम नाम लिखा हुआ रहता है। यहां हर एक व्यक्ति के शरीर पर लाखों बार राम नाम लिखा जाता है। इसी वजह से इन्हें रामनामी कहा जाता है।

जितना लिखा बदन पर राम उतना ही मिलता है प्रतिष्ठा और सम्मान-:

शरीर के किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाने वाले रामानामी, माथे पर राम का नाम लिखवाने वाले को शिरोमणि और पूरे माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को सर्वांग रामनामी कहा जाता है।

Inext Live

वहीं जो पूरे शरीर पर राम का नाम लिखवाता है उसे नखशिख रामनामी के नाम से जाना जाता है। ये अपने समुदाय में विशेष दर्जा प्राप्त लोग होते हैं।

संस्कृति और परंपरा के लिए राम नाम का टैटू जरुरी-:

इस समुदाय के इस परंपरा और संस्कृति के पीछे एक विरोधाभास घटना को जिम्मेदार माना जाता है। दरअसल सैकड़ों साल पहले ऊंची जाती के लोग नीच जनजाति के लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया। जिसका विरोध करते हुए उन्होंने पूरे शरीर पर राम नाम लिखवाना शुरू कर दिया। इसकी वजह से इन्हें रामनामी जाति का समुदाय ही कहा जाने लगा।

Quint Hindi

ये छत्तीसगढ़ के चार जिलों में निवास करते हैं। बदलते दौर में के युवा पीढ़ी पूरे शरीर पर राम नाम नहीं लिखवाती, लेकिन छाती पर इनके लिए भी राम नाम का टैटू बनवाना जरूरी है। ये इनकी संस्कृति और परंपरा का प्रमुख हिस्सा है।

न मंदिर से वास्ता ना मूर्ति की पूजा-:

रामनामी समुदाय के लोग राम नाम को शरीर पर गुदवाते हैं, राम नाम लिखे वस्त्र पहनते हैं। रामचरित्र मानस की पूजा करते हैं। उनका पूरा एक संप्रदाय है। लेकिन ये लोग न किसी मंदिर जाते हैं ना राम की मूर्ति की पूजा करते हैं। इन्हें अयोध्या के राम मंदिर से भी कोई वास्ता नहीं है। सम्रदाय की मान्यता के अनुसार इनके राम मंदिर और मूर्तियों में नहीं हर मनुष्य पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं में समाए हैं।

youtube

तन और वस्त्र दोनों पर बस राम ही राम-:

राम नाम का गुदना (टैटू) शरीर पर होता है, तो टोपी से लेकर कुर्ता, गमछा तक राम नाम से गुदा होता है। ये अपने घरों पर राम-राम लिखवाते हैं और मिलने पर एक दूसरे राम-राम कहकर अभिवादन भी करते हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों के मुताबिक रामनाम की परंपरा करीब सवा साल पुरानी है।

इस सुंप्रदाय के लोग इन रामनामी भजन मेले में मिलते हैं। मेलों का उद्देश्य सप्रदाय के लोगों का आपस में मिलना जुलना और नए लोगों को दीक्षित करने का होता है।

दिनेश की दुनिया

रामनामी भजन मेले में परिवार के साथ शामिल होते हैंं सम्प्रदाय के लोग, नए लोगों को दी जाती है दीक्षा।रामनामी भजन मेले में परिवार के साथ शामिल होते हैंं सम्प्रदाय के लोग, नए लोगों को दी जाती है दीक्षा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *