अखंड नहीं…. खंड-खंड है भारतवर्ष, जिससे टूटकर बने है कई देश

आज हम जिस भारत के 29 राज्यों एवं संघ राज्यों को अखंड भारत मानते है वास्तव में ये अखंड नहीं बल्कि कई भागों में खंड-खंड है। 15 अगस्त 1947 में भारत स्वतंत्र तो हुआ साथ ही दो खण्डों में विभाजित भी हो गया। अब ये विभाजन कौन से नंबर का था; शायद ही सभी को पता हो। इससे पहले अंग्रेजों, फ्रांसीसियों, पुर्तगालियों और मुगलों द्वारा इससे पहले किए गए ‘भारत विभाजन’ को लोग भूलते गए।

दरअसल 1947 के पहले किए गए विभाजन के कई कारणों में से एक कारण यह रहा कि अंग्रेज नहीं चाहते थे कि स्वतंत्रता संग्राम में भारतीयों की जनशक्ति बढ़े। इस संग्राम से उन्होंने भारत के कई बड़े भू-भाग को काट दिया। आज हम इस लेख के माध्यम आपको बताने जा रहे कि सिर्फ पाकिस्तान और बंगलादेश ही नहीं बल्कि ऐसे भी कई देश है जो कभी अखंड भारतवर्ष का हिस्सा हुआ करते थे।

क्या कहता है इतिहास-:

दरअसल इतिहास के पन्नों में ऐसा कही उल्लिखित नहीं है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, भूटान, पाकिस्तान, मालदीव या बांग्लादेश पर किसी ने आक्रमण किया। बल्कि इतिहास के पन्नों में तो लिखा है ‘भारतवर्ष के जनपदों या रियासतों पर आक्रमण किया गया’ जैसा की हम सभी जानते है कि प्राचीन इतिहास में भारतवर्ष को कुल नौ और 16 महाजनपदों में बांटा गया था। तब प्रत्येक जनपदों के शासक के रुप में राजा-महाराजा हुआ करते थे। सन 1857 के पहले भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। वर्तमान में भारत का क्षेत्रफल 32 लाख 87 हजार वर्ग किलोमीटर है।

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रामायण काल और महाभारत काल में कई महाजनपदों में बंटा भारतवर्ष-:

प्राचीनकाल में संपूर्ण भारत महाजनपदों में बंटा हुआ था। प्रत्येक महाजनपद के अंतर्गत जनपद और उप-जनपद होते थे। जैसे वर्त्तमान में एक राज्य होता है और उसकी एक राजधानी होती है। ये महाजनपद आपस में अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ते रहते थे। जिस भी राजा का संपूर्ण भारत पर एकछत्र राज हो जाता था उसे चक्रवर्ती सम्राट मान लिया जाता था। आगे चलकर ये जनपद छोटे-बड़े होते रहे लेकिन सभी मिलकर भारतवर्ष ही कहलाते थे जिनका केंद्र कभी अयोध्या, कभी अवंती, कभी मथुरा, कभी हस्तिनापुर, कभी तक्षशिला तो कभी पाटलीपुत्र रहा।

राम के काल 5114 ईसा पूर्व मगध, अंग (बिहार), अवंती (उज्जैन), अनूप (नर्मदा तट पर माहिष्मती), (मथुरा), धनीप (राजस्थान), पांडय (तमिल), विंध्य (मध्यप्रदेश) और मलय (मलाबार) कुल नौ प्रमुख महाजनपद थे जिसके अंतर्गत उप-जनपद होते थे।
महाभारत काल 3112 ईसा पूर्व कुरु, पंचाल, शूरसेन, वत्स, कोशल, मल्ल, काशी, अंग, मगध, वृज्जि, चे‍दि, मत्स्य, अश्मक, अवंती, गांधार (अफगानिस्तान) और कंबोज (अफगानिस्तान) कुल 16 प्रमुख महाजनपद होते थे।

प्राचीनकाल में संपूर्ण धरती को आर्यों ने 7 द्वीपों में बांट रखा था। जिसमे जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर। इसमें से जम्बू द्वीप सभी के बीचोबीच स्थित है। जिसके पहले राजा स्वायंभुव मनु थे। बाद में उनके पुत्र राजा प्रियवृत इसके शासक बने। राजा प्रियवृत के बाद अग्नीन्ध्र ने शासन भार संभाला। अग्नीन्ध्र ने जम्बू द्वीप को अपने 9 पुत्रों के नाम से 9 खण्डों में बाटकर उनको वहा का राजा बना दिया। अग्नीन्ध्र के पुत्रों का नाम इलावृत, भद्राश्व, किंपुरुष, नाभि, हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरु और हिरण्यमय था।

अग्नीन्ध्र ने अपने पुत्र नाभि को जो स्थान दिया था उसे नाभि खंड कहा गया। नाभि की एक पत्नी मेरू देवी से जो पुत्र पैदा हुआ उसका नाम ऋषभ था। ऋषभ के पुत्र भरत और बाहुबली थे। उन्होंने भरत को राज्य सौंप दिया तब इस नाभि खंड का नाम भरत के नाम पर भारतवर्ष पड़ा, क्योंकि महान चक्रवर्ती सम्राट भरत ने ही इस संपूर्ण नाभि खंड को एकछत्र शासन देकर न्याय, धर्म और राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना की थी।

चक्रवर्ती सम्राट भरत के बाद कालांतर में भारतवर्ष के सबसे बड़े शासक हुए वैवस्वत मनु। इनके बाद ययाति और उनके 5 पुत्र यदु, कुरु, पुरु, द्रुहु और अनु ने शासन किया। फिर राजा हरिशचन्द्र, राजा रामचन्द्र, राजा सुदास, संवरण पुत्र कुरु, राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत, राजा युधिष्ठिर, महापद्म, सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, सम्राट विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त द्वितीय, राजा भोज और हर्षवर्धन ने एकछत्र राज किया। जिसके बाद भारत का पतन होने लगा।

अफगानिस्तान-:

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17वीं सदी तक अफगानिस्तान नाम का कोई राष्ट्र नहीं था। अफगानिस्तान नाम का विशेष प्रचलन अहमद शाह दुर्रानी के शासनकाल (1747-1773) में ही हुआ। 1834 में एक प्रकिया के तहत 26 मई 1876 को रूसी व ब्रिटिश शासकों (भारत) के बीच गंडामक संधि के रूप में निर्णय हुआ और अफगानिस्तान नाम से एक बफर स्टेट अर्थात राजनीतिक देश को दोनों ताकतों के बीच स्थापित किया गया। इससे अफगानिस्तान अर्थात पठान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से अलग हो गए। 18 अगस्त 1919 को अफगानिस्तान को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी।

सिन्ध (पाकिस्तान)-:

7वीं सदी के मध्य में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कई क्षेत्र हिन्दू राजाओं के हाथ से जाते रहे। लगभग 712 में इराकी शासक अल हज्जाज के भतीजे एवं दामाद मुहम्मद बिन कासिम ने 17 वर्ष की अवस्था में सिन्ध और बलूच पर कई अभियानों का सफल नेतृत्व किया। सिन्ध पर ईस्वी सन् 638 से 711 ई. तक के 74 वर्षों के काल में 9 खलीफाओं ने 15 बार आक्रमण किया। 15वें आक्रमण का नेतृत्व मोहम्मद बिन कासिम ने किया।

इस आक्रमण के दौरान सिन्ध पर हिन्दू राजा दाहिर का राज था। राजा दाहिर (679 ईस्वी) और उनकी पत्नियां और पुत्रियां अपनी मातृभूमि और अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर शहीद हो गए। सिन्ध भी हिन्दू राजाओं के हाथ से जाता रहा। भारत के विभाजन के बाद 14 अगस्त 1947 को आजादी मिलाने के बाद एक इस्लामिक देश बना।

बलूचिस्तान-:

बलूचिस्तान भारत के 16 महा-जनपदों में से एक जनपद संभवत: गांधार जनपद का हिस्सा था। 321 ई.पू. यह क्षेत्र चन्द्रगुप्त मौर्य के साम्राजय के अंतर्गत आता था। वर्ष 711 में मुहम्मद-बिन-कासिम और फिर 11वीं सदी में महमूद गजनवी ने बलूचिस्तान पर आक्रमण किया। इस आक्रमण के बाद बलूचिस्तान के लोगों को इस्लाम कबूल करना पड़ा। इसके बाद अगले 300 सालों तक यहां मुगलों और गिलजियों का शासन रहा। अकबर के शासन काल में बलूचिस्तान मुगल साम्राज्य के अधीन था। मुगल काल में इसकी अधीनता बदलती रही। दरअसल, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के पहले बलूचिस्तान 11 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था।

नेपाल भी अखण्त भारतवर्ष का हिस्सा-:

1500 ईसा पूर्व से ही हिन्दू आर्य लोगों का शासन रहा है। 250 ईसा पूर्व यह मौर्यों के साम्राज्य का एक हिस्सा था।नेपाल को देवघर कहा जाता है। यह भी कभी अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था। भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का जन्म स्थल मिथिला नेपाल में है। नेपाल के जनकपुर में सीता जन्म स्थल पर सीता माता का विशाल मंदिर भी बना हुआ है।

भगवान बुद्ध का जन्म भी नेपाल के लुंबिनी में हुआ था। यहां पर फिर चौथी शताब्दी में गुप्त वंश का एक जनपद रहा। 7वीं शताब्दी में इस पर तिब्बत का आधिपत्य हो गया था।

11वीं शताब्दी में नेपाल में ठाकुरी वंश के राजा राज्य करते थे। उनके बाद यहां पर मल्ल वंश का शासन रहा, फिर गोरखाओं ने राज किया। मध्यकाल के रजवाड़ों की सदियों से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता को समाप्त करने का श्रेय गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह को जाता है। शाह ने 1765 में नेपाल की एकता की मुहिम शुरू की और मध्य हिमालय के 46 से अधिक छोटे-बड़े राज्यों को संगठित कर 1768 तक इसमें सफल हो गए। यहीं से आधुनिक नेपाल का गठन हुआ।

भूटान -:

भूटान भी कभी भारतीय महाजनपदों के अंतर्गत एक जनपद था। संभवत: या विदेही जनपद का हिस्सा था। यहां वैदिक और बौद्ध मान्यताओं के मिले-जुले समाज हैं। यह सांस्कृतिक और धार्मिक तौर पर तिब्बत से ज्यादा जुड़ा हुआ है, क्योंकि यहां का राजधर्म बौद्ध है। तिब्बत कभी जम्बूद्वीप खंड का त्रिविष्‍टप क्षेत्र हुआ करता था, जो किंपुरुष का एक जनपद था। किंपुरुष भारतवर्ष के अंतर्गत नहीं आता है। जहां तक सवाल भूटान का है तो यह तिब्बत के अंतर्गत नहीं आता है तथा यह भौगोलिक रूप से भारत से जुड़ा हुआ है।

म्यांमार-:

म्यांमार कभी ब्रह्मदेश हुआ करता था। इसे बर्मा भी कहते हैं, जो कि ब्रह्मा का अपभ्रंश है। म्यांमार प्राचीनकाल से ही भारत का ही एक उपनिवेश रहा है। अशोक के काल में म्यांमार बौद्ध धर्म और संस्कृति का पूर्वी केंद्र बन गया था। यहां के बहुसंख्यक बौद्ध मतावलंबी ही हैं। मुस्लिम काल में म्यांमार शेष भारत से कटा रहा और यहां पर स्वतंत्र राजसत्ताएं कायम हो गईं। 1886 ई. में पूरा देश ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के अंतर्गत आ गया किंतु ब्रिटिशों ने 1935 ई. के भारतीय शासन विधान के अंतर्गत म्यांमार को भारत से अलग कर दिया।

श्रीलंका-:

‘श्रीलंका’ भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित एक बड़ा द्वीप है। यह भारत के चोल और पांडय जनपद के अंतर्गत आता था। 2,350 वर्ष पूर्व तक श्रीलंका की संपूर्ण आबादी वैदिक धर्म का पालन करती थी। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र को श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा और वहां के सिंहल राजा ने बौद्ध धर्म अपनाकर इसे राजधर्म घोषित कर दिया। बौद्ध और हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार यहां पर प्राचीनकाल में शैव, यक्ष और नागवंशियों का राज था। श्रीलंका के प्राचीन इतिहास के बारे में जानने के लिए सबसे महत्वपूर्ण लिखित स्रोत सुप्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ ‘महावंस’ है।

श्रीलंका के आदिम निवासी और दक्षिण भारत के आदिमानव एक ही थे। एक खुदाई से पता चला है कि श्रीलंका के शुरुआती मानव का संबंध उत्तर भारत के लोगों से था। भाषिक विश्लेषणों से पता चलता है कि सिंहली भाषा गुजराती और सिन्धी भाषा से जुड़ी है। ऐसी मान्यता है कि श्रीलंका को भगवान शिव ने बसाया था। बाद में उन्होंने इसे कुबेर को दे दिया था। कुबेर से रावण ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था। ईसा पूर्व 5076 साल पहले भगवान राम ने रावण का संहार कर श्रीलंका को भारतवर्ष का एक जनपद बना दिया था।

मलेशिया-:

वर्तमान के मुख्‍य 4 देश मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया प्राचीन भारत के मलय प्रायद्वीप के जनपद हुआ करते थे। मलय प्रायद्वीप का दक्षिणी भाग मलेशिया देश के नाम से जाना जाता है। इसके उत्तर में थाईलैंड, पूर्व में चीन का सागर तथा दक्षिण और पश्चिम में मलक्का का जलडमरूमध्य है। उत्तर मलेशिया में बुजांग घाटी तथा मरबाक के समुद्री किनारे के पास पुराने समय के अनेक हिन्दू तथा बौद्ध मंदिर आज भी हैं। मलेशिया अंग्रेजों की गुलामी से 1957 में मुक्त हुआ। मलेशिया वर्तमान में एक मुस्लिम राष्ट्र है।

सिंगापुर-:

सिंगापुर मलय महाद्वीप के दक्षिण सिरे के पास छोटा-सा द्वीप है। हालांकि यह मलेशिया का ही हिस्सा था। कहते हैं कि श्रीविजय के एक राजकुमार, श्री त्रिभुवन (जिसे संगनीला भी कहा जाता है) ने यहां एक सिंह को देखा तो उन्होंने इसे एक शुभ संकेत मानकर यहां सिंगपुरा नामक एक बस्ती का निर्माण कर दिया जिसका संस्कृत में अर्थ होता है ‘सिंह का शहर’। बाद में यह सिंहपुर हो गया। फिर यह टेमासेक नाम से जाना जाने लगा।

सिंगापुर का हिन्दू धर्म और अखंड भारत से गहरा संबंध है। दूसरे विश्‍वयुद्ध के समय 1942 से 1945 तक यह जापान के अधीन रहा। युद्ध समाप्त होने के बाद सिंगापुर वापस अंग्रेजों के नियंत्रण में चला गया। 1963 में फेडरेशन ऑफ मलाया के साथ सिंगापुर का विलय कर मलेशिया का निर्माण किया गया। हालांकि विवाद और संघर्ष के बाद 9 अगस्त 1965 को सिंगापुर एक स्वतंत्र गणतंत्र बन गया।

तो ये थी वास्तविक अखंड भारतवर्ष की कहानी; इसके अलावा एक भ्रम आज भी कई लोगों में है कि भारत का नाम दशरथ पुत्र भरत के नाम पर है जबकि ऐसा नहीं है। भारत का नाम ऋषभ के पुत्र भरत के पर भारतवर्ष पड़ा। वर्त्तमान में भारत है।

स्रोत-वेबदुनिया

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