जब भारत-चीन युद्ध के दौरान पाकिस्तान बना रहा था हमले का प्लान

भारत की सरहद पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश के जमीनी सीमा से जबकि श्रीलंका का जल सीमा को छूती है । इनमे कुछ देश ऐसे है जिनकी सरहदे काफी संवेदनशील है। चीन और पाकिस्तान की सरहदे तो ऐसी है,  जहा अक्सर विवाद होता रहा है और आज भी है। जिसको लेकर भारत का पाकिस्तान और चीन से कई बार युद्ध हो चुका है।

हालही में 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 40 जवानों के शहादत के बाद एकबार फिर से भारत-पाक युद्ध होने के कयास लगाए जा रहे है। बहरहाल ये सेना और सरकार के आपसी निर्णय के बाद होगा,  अभी फ़िलहाल हम आपको इसके पहले हुए युद्धों के परिणामों से रुबरु कर देते है, जब भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाई थी और चीनी सेना को खदेड़ा था…..!

टेलीफोन का तार काटकर चीन ने भारत की सेना पर किया था हमला

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चीन और भारत के बीच युद्ध की शुरुआत 20 अक्टूबर, 1962 को हुई थीं। चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने लद्दाख और नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) में मैकमोहन लाइन के पार हमला कर दिया। युद्ध के शुरू होने तक भारत को पूरा भरोसा था कि युद्ध नहीं होगा। इस वजह से भारत की ओर से तैयारी नहीं की गई।

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यही सोचकर युद्ध क्षेत्र में भारत ने सैनिकों की सिर्फ दो टुकड़ियों को तैनात किया जबकि चीन की तरफ़ से तीन रेजिमेंट्स तैनात थीं। चीनी सैनिकों ने भारत के टेलिफोन लाइन को भी काट दिए थे। इससे भारतीय सैनिकों के लिए अपने मुख्यालय से संपर्क करना मुश्किल हो गया था। भारतीय सेना पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार नहीं थी, इस वजह से चीन की सेना तेजी से भारतीय इलाकों में घुसती गई।

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24 अक्टूबर तक चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में 15 किलोमीटर अंदर तक आ गए। चीन के पहले प्रीमियर (कभी-कभी अनौपचारिक रूप से “प्रधान मंत्री” के रूप में भी जाना जाता है।) चाऊ एन लाई ने इस बीच नेहरू को एक पत्र लिखकर संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा। एनलाई ने प्रस्ताव रखा कि भारत युद्ध समाप्त कर दें। मगर नेहरू ने प्रस्ताव खारिज कर दिया और आक्रमणकारियों को खदेड़ने’ के लिए संसद में एक प्रस्ताव पारित किया। चीनी प्रीमियर चाऊ एन लाई और जवाहर लाल नेहरू ने पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को लेकर 5 सिद्धांत दिए गए थे।

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पंचशील समझौते के एक हफ्ते बाद चीन ने एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा कर दी। लेकिन चीन ने अकसाई चिन पर कब्जा कर लिया और पूर्वोत्तर के इलाके से निकल गया। युद्ध में भारत को हार का सामना करना पड़ा और एक सबक भी मिला।

चीन से मिली शिकस्त की टीस आज भी भारतीयों के दिल में बरकरार है, पर इतिहास इसका भी गवाह है कि इस घटना के पांच साल बाद 1967 में भारत जांबाज सैनिकों ने चीन को जो सबक सिखाया था, उसे वह कभी नहीं भुला पायेगा।

मारे गए थे सैकड़ों सैनिक-:

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पहले दिन चीन की पैदल सेना ने पीछे से भी हमला किया। लगातार हो रहे नुकसान की वजह से भारतीय सैनिकों को भूटान से निकलना पड़ा। 22 अक्टूबर को चीनी सैनिकों ने एक झाड़ी में आग लगा दी जिससे भारतीय सैनिकों के बीच काफी कन्फ्यूजन पैदा हो गया।

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इसी बीच करीब 400 चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के ठिकाने पर हमला कर दिया। चीन के शुरुआती हमलों का तो भारत की ओर से मोर्टार दागकर सामना किया गया। जब भारतीय सैनिकों को पता चला गया कि चीनी सैनिक एक दर्रे में जमा हुए हैं तो इसने मोर्टार और मशीन गन से फायरिंग शुरू कर दी। जिसमे चीन के सैकड़ों सैनिक मारे गए।

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भारत-चीन युद्ध के बारे में इस बात का जिक्र खूब होता है कि वायु सेना का इस्तेमाल नहीं करना ही भारत की हार का कारण था। एक महीने तक चला लंबा युद्ध केवल भारतीय थल सेना ने लड़ा था। इस युद्ध में कुल एक हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई जबकि 1,047 घायल, 1,696 लापता हुए और 3,968 को बंदी बना लिया गया। वही चीन के तरफ 722 मृत्यु और 1,697 लोग घायल हुए थे।

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी मदद मांगी थी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी को पत्र भी लिखा था कि वो चीनी हमले को रोकने के लिए भारत को जेट लड़ाकू विमान दें। नेहरू ने लड़ाकू जेट के 12 स्कवॉड्रन और एक आधुनिक रडार सिस्टम की मांग की थी। मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं।

रो पड़े थे पीएम नेहरू

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1962 के युद्ध की पृष्ठभूमि में ही लता मंगेशकर ने 27 जून 1963 को देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया था. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने ये गीत नेहरू की मौजूदगी में गाया था। सी. रामचंद्र के संगीत से सजे और प्रदीप के लिखे इस गीत ने प्रधानमंत्री की आंखों में आंसू ला दिए थे।

क्यूं हुआ भारत-चीन युद्ध ?

एक वक्त था जब चीन और भारत के बीच अच्छे संबंध थे। उसी समय भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा दिया था। लेकिन जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा करने की घोषणा की थी तो भारत ने इसका विरोध किया था।

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मार्च 1959 में दलाई लामा शरण लेने के लिए भारत आए तो यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। मगर चीनी क्रान्तिकारी, राजनैतिक विचारक और साम्यवादी दल के नेता माओ जिदोंग ने भारत पर तिब्बत में ल्हासा विद्रोह को भड़काने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आने लगा और सीमा पर छिटफुट लड़ाईया शुरु हो गयी।

युद्ध के दौरान पाकिस्तान भारत पर हमले की बना रहा था योजना

उधर पाकिस्तान सन 1947 रियासती युद्ध में शर्मनाक हार के बाद एक बार फिर मौके के तलाश में था। उसे ये मौका तीन साल बाद मिला। सन 1965 में पाकिस्तान ने ऑपरेशन जिब्रॉल्टर के तहत भारत पर हमला कर दिया। ऑपरेशन जिब्रॉल्टर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने की रणनीति का सांकेतिक नाम था।

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पाकिस्तान की योजना थी जम्मू कश्मीर में सेना भेजकर वहां भारतीय शासन के विरुद्ध विद्रोह शुरू करने की। मगर इसके जवाब में भारत ने भी पश्चिमी पाकिस्तान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर दिए। सत्रह दिनों तक चले इस युद्ध में हज़ारों की संख्या में जनहानि हुई थी।

आख़िरकार 1966 में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने ताशकन्द समझौते पर हस्ताक्षर किये। सोवियत संघ और संयुक्त राज्य द्वारा राजनयिक हस्तक्षेप करने के बाद युद्धविराम घोषित किया गया। इसके अलावा पाकिस्तान के नापाक इरादे साफ न हुए। सन 1971 में फिर हमला किया और हार गया।

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इसके एकबार फिर पाकिस्तान ने सन 1999 में घुसपैठ की। जिसे भारतीय सेना ऑपरेशन विजय के तहत मुहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की। इस लड़ाई में 30,000 भारतीय सैनिक और करीब 5,000 घुसपैठिए शामिल थे। युद्ध जहां लड़ा गया उस जगह का नाम कारगिल था यह बहुत ठंडा इलाका था। इसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है।

पुलवामा हमले के बाद से पूरे भारत में जन आक्रोश को देखते हुए भारत सरकार पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती दिखानी शुरु कर दी है। जिसकी शुरुआत हमले के मास्टरमाइंड गाजी को मारकर, जम्मू कश्मीर के कई अलगाववादी नेताओं के सुरक्षा में कटौती करके किया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा है रावी, ब्यास और सतलुज में बहने वाले भारत के हिस्से के पानी को पाक जाने से रोका जाएगा। अब एक बार फिर से भारत-पाक युद्ध की मांग जोर पकड़ रही है। हमें पूरा यकीन है, इतिहास और एक बार दोहराएगा और भारतीय सेना दुष्मन को चारो खाने चीत करेंगी |

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