…तो अब पशुओं का बनेगा आधार कार्ड

भारत जैसे देश में आम इंसान का ठीक तरह से कोई दस्तावेत तो बनता नहीं और राज्य सरकारें अब पशुओं का आधार कार्ड बनाने की योजना बना रही है. फिलहाल ये काम गुजरात की तर्ज पर गाय-भैंस वंशीय पशुओं को आधार से जोडऩे की तैयारी शुरू कर दी गई है. पशुपालन विभाग को इसके लिए टैबलेट और टैग का इंतजार है. एक मार्च से इस प्रक्रिया को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है.

दो लाख 16 हजार पशुओं को आधार के दायरे में लाया चुका है 

मीडिया खबरों के मुताबिक विभागीय  केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में गुजरात के इस मॉडल को पूरे देश के राज्यों में लागू करने का फैसला किया गया है. इसके आधार पर ही पशुपालन योजनाओं के लिए बजट दिया जाएगा. इसके बाद मप्र में इन पशुओं को आधार टैग से जोडने का लक्ष्य तय किया गया है. छिंदवाड़ा जिले में 2 लाख 16 हजार पशुओं को आधार के दायरे में लाया जाएगा.

इस कवायद में इतनी संख्या में पशुओं के कान में लगाए जानेवाले आधार टैग और 143 एप्लीकेटर मशीन की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए 180 एआई टेक्नीशियन और 16 सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षित किया गया है. पशु पालन विभाग के सहायक संचालक डॉ.अभिषेक शुक्ला ने के मुताबिक भोपाल से टैग और टैबलेट आते ही पशुओं को आधार से जोडऩे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. एक मार्च से हमने इसे शुरू करने का लक्ष्य रखा है. अब आधार टैग से ही पशुपालन योजनाओं का लाभ मिल सकेगा.

आधार नम्बर से ही पूरा बॉयोडाटा

जिस तरह आम आदमी का आधार नम्बर डालते ही उसका पूरा बायोडाटा सामने आ जाता है, उसी तरह गाय-भैंस वंशीय पशुओं के साथ भी एेसा होगा. आधार नम्बर से उनकी नस्ल, मालिक, स्थान समेत अन्य ब्यौरा सामने आ जाएगा. इसके बाद कोई भी फर्जीवाड़ा करने की हिमाकत नहीं कर पाएगा. उनके कान में लगे आधार टैग से उनकी पहचान होगी.

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