अब आधार नंबर नहीं वर्चुअल आईडी से चल जायेगा काम

आधार डाटा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधार अथॉरिटी यूआईडीएआई (इंडिया यूनिक आइडेंटिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया) ने एक नई व्यवस्था कर दी है. जहां भी आपको आधार डिटेल देने की जरूरत पड़ेगी, वहां आप अपनी वर्चुअल आईडी देंगे. इसके अलावा UIDAI सीईओ अजय भूषण पांडे ने आधार से जुड़े कई सुविधाओं के बारे एक इंटरव्यू में बताया. तो आईये जानते जानते है आधार से जुड़े खुछ खास बात…!

 

आधार नंबर की तरह ही इसतेमाल होगा वर्चुअल आईडी

वर्चुअल आईडी आधार संख्या की तरह है. अगर आप कहीं जा रहे हैं और आपको अपनी पहचान साबित करनी है, तो आप अपना आधार नंबर दे देंगे. यहां तक ​​कि ऑनलाइन सत्यापन के लिए, आप आधार संख्या देते हैं. आधार गुप्त जानकारी नहीं है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर बैंक खाता नंबर और मोबाइल नंबर जैसे संवेदनशील डेटा हैं. हमने आधार पर एक और सेफ्टी फीचर जोड़ा है. पिछले डेढ़ साल से इस पर काम कर रहे हैं. 2010 के बाद से यह सबसे बड़ा इनोवेशन है.

इसे आधार 2.0 की तरह ही मान लें कि आपके पास आधार संख्या है. यूआईडीएआई पोर्टल पर जा कर अपना नंबर दर्ज करते हैं. संख्या दर्ज करने के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी मिलेगा और आप की सहायता से 16 नंबरों का वर्चुअल आईडी नंबर जनरेट किया जाएगा. इस नंबर का इस्तेमाल आप आधार की तरह ही कर सकेंगे.

जहां भी आपको खुद को प्रमाणित करना है, आप अपनी आधार संख्या के बजाय अपनी वर्चुअल आईडी का उपयोग कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, आप एक सिम कार्ड पाने के लिए या मोबाइल नंबर की पुष्टि करने के लिए एक दूरसंचार कंपनी गए हैं या आप अपने बैंक खाते को सत्यापित करने के लिए बैंक गए हैं, तो आपको आधार संख्या नहीं देनी है, आप अपना वर्चुअल आईडी देंगे और फिंगरप्रिंट आधार प्रणाली को पता चल जाएगा कि यह वर्चुअल आईडी इस सिस्टम से संबंधित है. वर्चुअल आईडी को किसी भी समय बदला जा सकता है. जितनी बार यूजर्स चाहें और जब तक उसे बदलने की इच्छा नहीं हो तब उस इस्तेमाल किया सकता है.

सुरक्षा व्यवस्था में होता रहता है सुधार 

भूषण ने आगे बताया सुरक्षा और डेटा के लिए अधिकतम महत्व देते हैं क्योंकि हमारे पास 1.2 अरब लोगों का डेटा है. हमारे पास उनकी बुनियादी जानकारी और उनके बायोमेट्रिक डिटेल है. हम कई कारणों से सुरक्षा उपायों पर चर्चा नहीं करते हैं. इसमें सुरक्षा की कई लेयर हैं जो हम चर्चा नहीं करना चाहते हैं हम सुरक्षा में सुधार करते रहते हैं.  पिछले सात साल में, हम लगातार हमारे सिस्टम को बेहतर कर रहे हैं. नए इनोवेशन का भी मतलब यह नहीं है कि हमारी प्रणाली पहले कमजोर थी. हमने पाया कि सुधार के लिए स्पेश था और यहीं कारण है कि हम वर्चुअल आईडी लाए. ऐसा नहीं है कि लोग इससे पहले असुरक्षा में जी रहे थे, लेकिन हम चीजें आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

नहीं हो  सकती धोखाधडी 

आधार के डेटा सुरक्षा को लेकर भूषण ने बताया कि लोगों की कई शिकायत है जो हमें अक्सर मिलती है. यह केवल आधार अधिनियम का उल्लंघन नहीं है, बल्कि आपराधिक विश्वास का उल्लंघन है. उदाहरण के लिए, आप एक विशिष्ट सेवा के लिए आवेदन करते हैं और अगले दिन आपको कॉल प्राप्त करना शुरू करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से आपका डेटा कहीं और चला गया है. इससे एक बड़ा डेटा सेफ मुद्दा उठता है और इसके लिए, एक समिति भी है. मैं उस समिति का भी सदस्य हूं इसलिए हम सभी सुरक्षा मुद्दों पर गौर करेंगे, जिसमें आधार भी शामिल होगा. आपके द्वारा दिया गया डेटा किसी अन्य प्रस्ताव के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और यदि ऐसा होता है तो कुछ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इन सभी चीजों को देखा जा सकता है.

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