RBI के ऐसे दो गवर्नर जिन्होंने नोटों पर कभी हस्ताक्षर नहीं किया


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एक रुपए के नोट (वित्त सचिव हस्ताक्षर करता है) को अगर छोड़ दिया जाए तो बाकी अन्य सभी नोटों पर आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।

मगर रिजर्व बैंक इंडिया (RBI) के अबतक के 25 गवर्नरों में से दो ऐसे गवर्नर भी थे जिन्हे नोटों पर हस्ताक्षर करने का मौक़ा नहीं मिला

जानिए कौन थे वो दो आरबीआई गवर्नर जो भारतीय नोटों पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए।

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ओसबोर्न स्मिथ (Sir Osborne smith):-

ब्रिटिश भारत में आरबीआई के स्थापना के बाद भारत के पहले गवर्नर सर ओसबोर्न आरकेल स्मिथ भी ऐसे भारतीय गवर्नर रहे हैं जो भारतीय नोटों पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए।

उनका कार्यकाल 1 अप्रैल 1935 से 30 जून 1937 (2 साल 90 दिन) तक चला।

वो एक पेशेवर बैंकर थे और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ बैंक में 20 साल एवं न्यू साउथ वेल्स बैंक में 10 साल की सेवाएं दी थीं।

साल 1926 में वो इंपीरियल बैंक ऑफ इण्डिया के प्रबंधक गवर्नर भी बने। अपने कार्यकाल (आरबीआई गवर्नर) में उन्होंने किसी बैंक नोट पर हस्ताक्षर नही़ किए।

के जी अंबेगाओंकर (K. G. Ambegaokar):-

के जी अंबेगाओंकर भारतीय रिजर्व बैंक के पांचवें गवर्नर थे। उन्होंने बतौर गवर्नर 14 जनवरी 1957 से 28 फरवरी 1957 तक आरबीआई को अपनी सेवाएं दीं।

यानी वो सिर्फ 45 दिन तक ही आरबीआई गवर्नर रहे। आरबीआई में डिप्टी गवर्नर बनने से पहले वो बतौर वित्त सचिव भी भारत सरकार को अपनी सेवाएं दे चुके थे।

बेनेगल रामा राऊ के इस्तीफे के बाद वो गवर्नर बने। बतौर आरबीआई गवर्नर उनके हस्ताक्षर किसी भी भारतीय नोट पर नहीं देखे गए।

हालांकि 1 रुपए के भारतीय नोट पर उनके हस्ताक्षर देखे गए, लेकिन एक रुपए के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते है और इसे वित्त मंत्रालय जारी करता है।

क्या है आरबीआई ?-:

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है।

रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है।

इसकी स्थापना 1 अप्रैल सन 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई।

भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हिल्टन यंग कमीशन के द्वारा किया गया था।

रिज़र्व बैंक का केन्द्रीय कार्यालय प्रारम्भ में कलकत्ता में स्थापित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानान्तरित कर दिया गया।

ब्रिटिश राज के दौरान प्रारम्भ में यह निजी स्वामित्व वाला बैंक हुआ करता था परन्तु स्वतन्त्र भारत में 1 जनवरी 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। उसके बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व है।

इसकी स्थापना अबतक इस बैंक के कुल 25 गवर्नर अल्पकालीन और पूर्णकालिक नियुक्त किये जा चुके है।

दिसंबर 2018 में रिजर्व बैंक के 24वें गवर्नर उर्जित पटेल निजी कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे दिया था।

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वर्त्तमान में जिनके जगह 25 गवर्नर के रूप में शक्तिकांत दास आरबीआई की कमान संभाल रहे है। शक्तिकांत दास 1980 बैच के तमिलनाडु काडर के आईएएस अधिकारी हैं।

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