जानिए… बचपन में मोदी को क्या बुलाते थे लोग, कम उम्र में ही क्यूं छोड़ दिया घर-परिवार ?

नरेंद्र मोदी भारत के एक ऐसे नेता और 16वीं लोकसभा के आम चुनाव के विजेता है; जिन्होंने पूरी दुनिया में 15वें प्रधानमंत्री के रूप में निडरता से भारत की छवी प्रस्तुत की। अपनी बुद्धि, विवेक और सहयोगियों की बदौलत भारतवासीयों समेत देश के विकास और तरक्की के लिए ऐसे कदम उठाये जिसके बारे में कभी किसी नेता ने सोचा ही नहीं।

नोटबंदी और जीएसटी जैसे वेहद संवेदनशील फैसलों का भले ही मोदी की आलोचना और विरोध किया गया हो; बावजूद इसके ये अपने लक्ष्य से नहीं भटके।

निरंतर अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहते है। यही वजह है कि आज मोदी की लोकप्रियता सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है। मोदी की इन्ही उपलब्धियों की वजह से भारत की 50 प्रतिशत से भी ज्यादा जनता एक बार फिर 2019 के सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के विजेता और दोबारा पन्द्रहवें प्रधानमंत्री के रुप में चाहती है। तो आईये जानते है दुनिया के सबसे बड़े ताकतवर नेताओं में से एक नरेंद्र मोदी के कुछ खास पहलुओं के बारे में…

बचपन में नरिया कहकर बुलाते थे लोग

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नरेंद्र मोदी यानि नरेंद्र दामोदर दास मोदी। जिनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के महेसाना जिले के वडनगर ग्राम में एक मीडिलक्लास परिवार में हुआ था। माता का नाम हीराबेन मोदी और पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था। मोदी अपने माता-पिता की कुल छ: सन्तानों में तीसरे पुत्र थे।

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नरेन्द्र मोदी के पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान थी। बचपन में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता का भी हाथ बँटाया। 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजर रहे सैनिकों को चाय पिलाई। नरेन्द्र मोदी को बचपन में नरिया कहकर बुलाया जाता था। नरेंद्र मोदी बचपन में आम बच्चों से बिलकुल अलग थे। मोदी को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। बचपन में स्कूल में एक्टिंग, वाद-विवाद, नाटकों में भाग लेते और पुरस्कार जीतते थे।

बचपन में साधु-संतों की संगत थी प्रिय, कम उम्र में शादी के बाद घर छोड़ा

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13 वर्ष की आयु में नरेन्द्र की सगाई जसोदा बेन चमनलाल के साथ कर दी गयी और जब उनका विवाह हुआ वह मात्र 17 वर्ष के थे। मोदी के जीवनी-लेखक के मुताबिक दोनों की शादी जरूर हुई परन्तु वे दोनों एक साथ कभी नहीं रहे। शादी के कुछ बरसों बाद नरेन्द्र मोदी ने घर त्याग दिया और एक प्रकार से उनका वैवाहिक जीवन लगभग समाप्त-सा ही हो गया।

नरेन्द्र मोदी बचपन में साधु-संतों से प्रभावित हुए। वे बचपन से ही संन्यासी बनना चाहते थे। संन्यासी बनने के लिए मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे। इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे।

नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी। वे आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में मैनेजमेंट का हुनर दिखाते थे। आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था।

जब पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने

मोदी ने अपनी स्कूली शिक्षा वड़नगर में पूरी की। उन्होंने आरएसएस के प्रचारक रहते हुए 1980 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की। इसके आलावा मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित तीन महीने का कोर्स किया है।

मोदी जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे। उन्होंने शुरुआती जीवन से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलायी और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभायी। गुजरात में शंकरसिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेन्द्र मोदी की ही रणनीति थी। 3 अक्टूबर 2001 को मोदी केशुभाई पटेल के जगह गुजरात के मुख्यमंत्री बने। नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री का अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया।

गोधरा काण्ड ने कर दी छवी दागदार, देना पड़ा त्यागपत्र

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गुजरात में मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान मोदी के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जिसके बारे में मोदी ने कभी सोचा न था। दरअसल 27 फ़रवरी 2002 को एक ट्रेन हादसे में 59 कारसेवकों की झुलसने से मौत हो गयी। ये सभी अयोध्या से गुजरात वापस लौट रहे थे हादसा तब हुआ जब गोधरा स्टेशन पर ट्रेन खड़ी थी जिसमे आग लग गई।

घटना के बाद धीरे-धीरे मामले ने तूल पकड़ा और मुद्दा दंगे में तब्दील हो गया। समूचे गुजरात में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क उठे। जिसमें हजारों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। इस घटना से मोदी की छवी दागदार हो गई। जिसके बाद कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों ने नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की माँग की। मोदी ने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया।

चुने गए पीएम उम्मीदवार तो….हुई ऐतिहासिक जीत

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गोधरा मुद्दे को लेकर देश-विदेश समेत विपक्षी नेता मोदी पर आरोप लगते रहे। ये सिलसिला चलता रहा। इसी बीच वो दिन भी आया जब मोदी को 13 सितम्बर 2013 को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में आगामी लोकसभा चुनावों के लिये प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।

मोदी ने प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद चुनाव अभियान की कमान राजनाथ सिंह को सौंप दी। मोदी की पहली रैली हरियाणा प्रान्त के रिवाड़ी शहर में हुई। वर्ष 2014 की लोकसभा चुनाव में एक सांसद प्रत्याशी के रूप में मोदी ने देश की दो लोकसभा सीटों वाराणसी तथा वडोदरा से चुनाव लड़ा और दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से विजयी हुए।

गुजरात की वडोदरा सीट से इस्तीफ़ा देकर संसद में उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया। नरेन्द्र मोदी स्वतन्त्र भारत में जन्म लेने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो सन 2001 से 2014 तक लगभग 13 साल गुजरात के मुख्यमन्त्री रहे और भारत के 15वें प्रधानमन्त्री बने।

प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए बीते पांच वर्षों में मोदी ने दुनिया के सामने भारत की ऐसी छवी प्रस्तुत की कि सारी दुनिया मोदी की मुरीद हो गयी। आगामी अप्रैल या मई महीने से होने वाले वर्ष 2019 के सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के विजेता और दोबारा पीएम के लिए पहली पसंद मोदी ही है। देखना ये है कि अन्य राजनीतिक पार्टियों का महागठबंधन मोदी के लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहता है।

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