मानसरोवर और राक्षसताल झीलों का रहस्य, एक में जीवन तो दूसरे में काल

अक्सर हमने सुना है ” जल ही जीवन है ” दुनिया में ऐसी लाखों समुंद्र, नदी, तालाब और झीले है। सबका अपना अलग ही महत्व होता है। मगर दुनिया में एक ऐसी भी जगह है जहां मीठे और खारे पानी की दो झीले रहस्यमयी तरीके से निर्मित हुई। जिनका जिक्र जितना आज होता है उससे कही ज्यादा ग्रंथों और पुराणों में किया गया है। जिनके जल को अमृत और विष के समान समझा जाता है। इन झीलों के नकारात्मक और सकारात्मक स्वाभाव आज भी लोगों की आस्था और मान्यताओं को जीवंत करते है।

दुनिया का केंद्र और भगवान शंकर के निवास स्थान कैलाश पर्वत के पास स्थित है कैलाश मानसरोवर और राक्षसताल नाम की दो पौराणिक झीले है। यह अद्भुत स्थान रहस्यों और चमत्कारों से भरा है। शिवपुराण, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में कैलाश खंड नाम से अलग ही अध्याय है, जहां की महिमा का गुणगान किया गया है।

एक राक्षस तो दूसरी देव की प्रतीक है-:

 

मान्यता है कि मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी वाले झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। मानसरोवर लगभग 320 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। पुराणों में मानसरोवर झील का जिक्र ‘क्षीर सागर’ से किया गया है। क्षीर सागर कैलाश से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। धार्मिक आस्था है कि विष्णु और माता लक्ष्मी इसी में शेष शैय्या पर विराजते हैं। दूसरा, राक्षस नामक का झील जो दुनिया की खारे पानी वाले झीलों में से एक है जिसका आकार चन्द्र के समान है। राक्षस ताल लगभग 225 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 84 किलोमीटर परिधि तथा 150 फुट गहरे में फैला है।

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मानसरोवर गोल है और इसे सूरज का और दिन की रोशनी का प्रतीक माना जाता है जबकि राक्षसताल के आकार की तुलना अर्धचंद्र से की जाती है और इसे रात्रि का और अंधेरे का प्रतीक माना जाता है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या इन्हें बनाया गया? राक्षसताल के बारे में यह आस्था है कि यह रावण से सम्बन्धित है, जिस कारणवश इसे रावणताल भी कहते हैं।

जहाँ मानसरोवर का पानी मीठा है, वहाँ राक्षसताल का खारा है। मानसरोवर में मछलियों और जलीय पौधों की भरमार है जबकि राक्षसताल के खारे पानी में यह नहीं पनप पाते। स्थानीय तिब्बती लोग इसके पानी को विषैला मानते हैं।
इस स्थान की गिनती देवी के 51 शक्ति पीठों में भी होती है। माना जाता है कि देवी सती का दांया हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है।

सुनाई देती डमरू और ओम की धून-:

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मानसरोवर झील के क्षेत्र में निरंतर एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो। लेकिन ध्यान से सुनने पर यह आवाज ‘डमरू’ या ‘ॐ’ की ध्वनि जैसी होती है। वैज्ञानिक का मानना है कि यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो सकती। यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है। जिससे यहां से ‘ॐ’ की आवाजें सुनाई देती हैं।
मानसरोवर में बहुत-सी खास बातें आपके आसपास होती रहती हैं, जिन्हें आप केवल महसूस कर सकते हैं। इस झील के आस-पास सुबह के 2:30 से 3:45 बजे के बीच कई तरह की अलौकिक क्रियाओं को केवल महसूस किया जा सकता है, देखा नहीं जा सकता।

आइए जानें पुराणों में कैलास मानसरोवर झील के बारे में क्या कहा गया है और क्यों लोग जान जोखिम में डालकर यहां यात्रा करने आते हैं।
कहा जाता है कि गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है तो एक प्रकार की आवाज लगातार सुनाई देती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह आवाज मृदंग की ध्वनि जैसी होती है। मान्यता यह भी है कि कोई व्यक्ति मानसरोवर में एक बार डुबकी लगा ले तो वह ‘रुद्रलोक’ को प्राप्त होता है।

मान्यता है कि मानसरोवर झील और राक्षस झील, ये दोनों झीलें सौर और चंद्र बल को प्रदर्शित करती हैं, जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब आप इन्हें दक्षिण की तरफ से देखेंगे तो एक स्वास्तिक चिह्न बना हुआ दिखेगा। इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जो ‘ॐ’ जैसा सुनाई देता है।

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