जानिए आखिर क्यों फेसबुक को लोग कह रहे है अलविदा

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक छात्र मार्क ज़ुकेरबर्ग ने सन 2004 में शुरू किया था. आकड़ों  मुताबिक जनवरी 2018 तक फेसबुक के दो खरब से ज्यादा उपभोक्त सक्रीय है. मगर इन दिनों फेसबुक के सितारे गर्दिस में है. जी हां दरअसल दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक विवादों में घिर गया है. दावा किया जा रहा है कि फेसबुक पर करीब 5 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारियां लीक हुईं जिसका फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के लिए काम कर रही फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने उठाया.

आरोप हैं कि फर्म ने वोटर्स की राय को मैनिप्युलेट करने के लिए फेसबुक यूजर्स डेटा में सेंध लगाई. अब इस मामले में फेसबुक के संस्थापक जकरबर्ग से जवाब तलब किया गया है. वर्ष 2008 के फेसबुक सालाना आमदनी करीब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यदि फेसबुक को उल्लंघन का दोषी पाया तो उसे प्रति उल्लंघन 40 हजार डॉलर का जुर्माना भरना पड़ सकता है.

क्या है पूरा मामला 

दरअसल फेसबुक पर लोगों की व्यक्तिगत जानकारियों के दुरुपयोग आरोप है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 2016 का चुनाव अभियान देख रही ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका पर ये आरोप है कि उसने फेसबुक के पांच करोड़ उपयोक्ताओं से जुड़ी जानकारियों का दुरुपयोग किया था. इस मामले के सामने आने के बाद फेसुबक को वैश्विक स्तर पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा. यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की संसद ने इसे लेकर फेसुबक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को पेश होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया. फिलहाल मामले की जांच अमेरिका में उपभोक्ता एवं प्रतिस्पर्धा नियामक संघीय व्यापार आयोग कर रही है.

फेसबुक को  हुआ नुकसान 

फेसबुक से जुड़े डेटा चोरी के इस मामले की खबर के बाद महज 48 घंटे में मार्क जुकरबर्ग को करीब 58,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसके आलावा फेसबुक के शेयर लगभग 5.2 फीसदी गिरकर 175 डॉलर पर आ गया. यह गिरावट बाद में बढ़कर 6 फीसदी से ज्‍यादा हो गई. 12 जनवरी के बाद स्टॉक में सबसे बड़ी गिरावट हुई. इससे कंपनी की मार्केट कैप लगभग 32 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 500 अरब डॉलर रह गया. इसका असर फेसबुक के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग की पर्सनल वेल्थ पर भी पड़ा, जिसमें कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 6.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. अमीरों की वेल्थ के बारे में बताने वाले फोर्ब्स के रियल टाइम बिलेनायर इंडेक्स के मुताबिक जुकरबर्ग की पर्सनल वेल्थ लगभग 4.6 अरब डॉलर घटकर 70 अरब डॉलर रह गई. घटना के बाद से लाखों लोग अपना फेसबुक अकाउंट भी डिलीट कर दिया.

जानिए, कौन है कैम्ब्रिज एनालिटिका के पीछे

पिछले वर्षों में राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया पर सशक्त पकड़ की होड़ मची हुई है. सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच को देखते हुए बड़ी कंपनियां और सरकारों का बिग डेटा की तरफ रुझान तेजी से बढ़ा. दक्षिणपंथी वेबसाइट Breitbart के संस्थापक स्टीव बैनन ने इसे एक मौके के रूप में लिया. स्टीव ने क्रिस्टोफर वाइली में डेटा को हथियार बनाने क्षमता देखी और साथ मिलकर ब्रिटेन में कैम्ब्रिज एनालिटिका की नींव रखी. कंजरवेटिव हेजफंड के अरबपति रॉबर्ट मर्सर ने इस पूरी प्लैनिंग के लिए फंड जुटाया.

आरोप सिद्ध होने पर हो सकता है करोड़ों डॉलर जुर्माना 

अमेरिकी अखबार दी न्यूयॉर्क टाइम्स तथा ब्रिटिश अखबार ऑब्जर्वर की संयुक्त जांच के अनुसार, कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के पांच करोड़ उपयोक्ताओं की जानकारियों के आधार पर लोगों की मानसिकता का प्रोफाइल तैयार किया था. कंपनी ने इसके लिए व्यक्तित्व संबंधी आकलन बताने वाले एक एप का इस्तेमाल किया था जिसे 2.70 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था.

कंपनी ने डाउनलोड करने वाले लोगों तथा उनकी मित्रसूची के लोगों की जानकारियों का इस्तेमाल किया था. उसका लक्ष्य अमेरिकी मतदाताओं के व्यवहार का अनुमान लगाना था। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रपट के अनुसार, संघीय व्यापार आयोग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या फेसबुक ने कैंब्रिज एनालिटिका को उपभोक्ताओं की जानकारियां देकर उन प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जिनके तहत उसने लोगों से उनकी व्यक्तिगत जानकारियां जमा करने व उन्हें साझा करने की सहमति ली थी? वाशिंगटन पोस्ट ने इस मसले पर अपनी रपट में कहा है कि यदि आयोग ने फेसबुक को उल्लंघन का दोषी पाया तो उसे प्रति उल्लंघन 40 हजार डॉलर का जुर्माना भरना पड़ सकता है.

भारत से भी है कैम्ब्रिज एनालिटिका का कनेक्शन

ट्रंप का चुनावी कैंपेन संभाल चुकी कैंम्ब्रिज एनालिटिका का भारत के चुनावों के साथ भी कनेक्शन है. इसकी वेबसाइट पर जानकारी दी गई है कि 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में इसे कॉन्ट्रैक्ट मिला था और कुल टारगेट सीटों में से 90 फीसदी से अधिक पर इसके क्लाइंट को भारी जीत हुई थी. अब इस बात के भी चर्चे हैं कि यह फर्म भारत में 2019 के आम चुनावों के लिए भी राजनीतिक दलों के संपर्क में है. यानी केवल अमेरिका ही नहीं, भारत समेत पूरी दुनिया के चुनाव इस नई तरह के बिग डेटा ऐनालिसिस से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. 2016 में अमेरिकी चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित जीत का श्रेय कैम्ब्रिज एनालिटिका को भी दिया गया.

भारत के मंत्री ने दे डाली फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग को चेतावानी

आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए और फेसबुक डेटा के चोरी होने को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को चेतावानी दी है. रवि शंकर प्रसाद ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ”श्री मार्क ज़करबर्ग आप भारत के आईटी मंत्री के अवलोकन को बेहतर ढंग से जानते हैं, यदि किसी भी भारतीय का डेटा चोरी होता है और वह फेसबुक के डेटा सिस्टम से मिलान करता है, तो यह हमारे द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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