भारत में इंसानों की ही नहीं जानवरों और पेड़ों की भी होती है शादी

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मनुष्यों में शादी विवाह एक संस्कार है, संस्कृति है और परंपरा है। जिसका उद्देश्य अपने वंशज को बनाये रखना है। मगर दुनिया में इंसानों के आलावा कई जानवर, पशु-पक्षी और वनस्पतियों का विवाह देखने सुनने को मिलता है।

आज इस लेख के माध्यम से हम आपको ऐसी कुछ शादियों के बारे जानकारी देंगे जो बेहद अजीब है।

मेंढक की शादी-:
भारत के ऐसे कई इलाके है जहां सूखा पड़ने पर लोग बारिस के लिए मेंढक और मेंढकी की शादी करते है।

मई 2018 में मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर की राज्यमंत्री ललिता यादव ने मेंढकों की शादी करवाई थी।

इस अनोखी शादी को देखने के लिए वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। मंदिर में हुई इस शादी में लोगों को प्रसाद भी दिया गया ।

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इसके बाद वहां भंडारे का आयोजन भी किया गया। यह अन्धविश्वास नहीं है मगर प्रकृति के संतुलन के लिए ईश्वर की पूजा अर्चना के साथ ही इस प्रकार की परम्पराएं निभाया जाता रहा है।

मध्य प्रदेश समेत भारत कई राज्यों मेढ़क मेंढकी के शादी की परंपरा कई सालों से चली आ रही है। असम में लोग मेंढक और मेंढकी की शादी करते हैं।

यहां भी मान्यता है इससे प्रकृति प्रसन्न होती है और इसी वजह से बरसात होती है। असम में इसे ‘बेखुली बियाह’ कहते हैं।

असमिया भाषा में ‘बेखुली’ मेंढक को कहते हैं, जबकि ‘बियाह’ का मतलब शादी होता है।

बारिश के मौसम में ही मेंढकों का मिलन होता है, जिसके बाद माना जाता है कि मेंढक प्रसन्न होकर बोलते हैं, जिसे सुनकर इंद्र वर्षा करते हैं।

इस अद्भुत शादी में सभी परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। मेंढक की शादी के बाद नवविवाहित जोड़े को पानी में छोड़ दिया जाता है।

कुत्तों की शादी-:
वैसे तो कई मांगलिक दोष के कारण इंसान कुत्तों से शादी करते रहे है। मगर मार्च 2016 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में अच्छे संबंध के लिए पवारा गांव और शुक्लन गांव ने दो कुत्तों की शादी करवा दी। शादी में 12 गांवों से 5000 से अधिक लोग शामिल हुए।

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हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हुई इस शादी में लगभग एक लाख रुपए खर्च भी किए गए। जहां शगुनिया नाम की कुतिया के मालिक जंग बहादुर थे तो वही शगुन नाम के कुत्ते के मालिक त्रिपाठी थे। इस शादी का मकसद पवारा व शुक्लन गांवों के बीच संबंध जोड़ना था।

इनमें से एक गांव ब्राह्मण और दूसरा दलित वर्ग का है। दोनों के बीच संबंध कायम करने के लिए कुत्तों की शादी रची गई। इसके आलावा कुत्तों के शादी जुड़ी एक कहानी जूनागढ़ के नवाब महबत खां रसूल खांजी तृतीय की चर्चित रही।

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जिनका कुत्‍तों से प्रेम सिर्फ इतना था कि उन्‍होंने 800 कुत्‍ते पाले थे और शादी में 20 लाख उड़ा दिए बल्कि जिस दिन कुत्‍तों की शादी हुई, उसी दिन उन्‍होंने पब्लिक हॉलीडे भी घोषित कर दिया था।

पेड़ की पेड़ से करा दी गई शादी-:
जून 2017 में मध्य प्रदेश के इंदौर में एक पेड़ की दूसरे पेड़ से शादी करने की एक घटना सामने आयी थी। जिसके पीछे एक रोचक कहनी है।

दरअसल इस विवाह में पीपल और बरगद के पेड़ की लोगों ने शादी रचाई। जिसमें बरगद दूल्हे और पीपल को दुल्हन का रूप दिया गया। बरगद के पेड़ की उम्र 40 वर्ष तो पीपल के पेड़ की उम्र महज 32 वर्ष है।

बरगद की बारात में करीब 200 लोग शामिल हुए। जैसे आमतौर पर शादी के रीति-रिवाज होते हैं, ठीक उसी तरह इन पेड़ों की शादी की गई। दूल्हे की तरफ से आयोजक मुन्नीबाई के मुताबिक उनके पति ने सालों पहले बरगद का पेड़ लगाया था।

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उनकी मौत के बाद से उन्होंने पेड़ की देखभाल की।

उनके अनुसार बरगद सालों से रोता था। रात को रोने की आवाज भी आती थी तो दिन में आंसू दूध और पानी नीचे बैठने वाले लोगों पर गिरते थे।

बुजुर्गों से सलाह के बाद मुन्नीबाई ने घर से 500 मीटर दूर एक घर में लगे पीपल के पेड़ से बरगद की शादी तय हुई। दोनों की कुंडली मिलवाई और दोनों की शादी करवा दी गई।

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