रद्द हो चुकी है समझौता एक्सप्रेस कई बार…

आतंकवाद को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए हालही में दोनों देशों के बीच चलने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस को सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया गया। ये कोई पहला मामला नहीं है जब इस ट्रेन को रद्द कर दिया गया हो। इससे पहले भी इस ट्रेन को कई बार अलग-अलग कारणों से रद्द किया जा चुका है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे समझौता एक्सप्रेस की शुरुआत कैसे हुई और इसे कितनी बार रद्द किया गया और क्यू किया गया?

इसलिए चली है समझौता एक्सप्रेस-:

भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली यह अंतर्राष्ट्रीय ट्रेन है। समझौता का मतलब होता है एग्रीमेंट और एग्रीमेंट दो पक्षों के बीच होता है। जो पाकिस्तान और भारत के बटवारे बाद हुआ था। समझौता एक्सप्रेस की शुरुआत 22 जुलाई 1976 में हुई थी। शुरुआत में यह ट्रेन रोजाना चलती थी, लेकिन साल 1994 में इसका संचालन हफ्ते में दो दिन कर दिया गया।

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भारत में यह ट्रेन दिल्ली से पंजाब स्थित अटारी तक चलती है। दिल्ली से अटारी के बीच इस ट्रेन का कोई अन्य स्टॉपेज नहीं है। लाहौर से वापसी के समय यह ट्रेन भारत में सोमवार और गुरुवार को पहुंचती है। इस ट्रेन में छह शयनयान तथा एक वातानुकूलित तृतीय श्रेणी कोच है।

आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार बार युद्ध (1947, 1965,1971, 1999) हो चूका है और सीमा के पर तो आयेदिन घुसपैठ और सीजफायर के उल्लंघन के बाद झड़प होती रहती है। इन सब के बावजूद दोनों देशों के बीच समझौता एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन होता है। मगर कई बार आतंकिगतिविधियों के कारण रद्द करना पड़ता है।

सफर के लिए टिकट ही नहीं पासपोर्ट और वीजा की भी जरुरत-:

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समझौता एक्सप्रेस ट्रेन का टिकट लेने के लिए यात्री के पास पासपोर्ट और वीजा होना जरुरी होता। बिना इसके टिकट नहीं लिया जा सकता। टिकट लेने के लिए कई लोग वीजा के लिए आवेदन करते है लेकिन उनमे से कुछ लोगो को ही वीजा मिल पाता है।

रद्द हो चुकी है कई बार-:

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भारत की संसद पर 13 दिसंबर 2001 को हुए हमले के बाद इस ट्रेन का संचालन बंद कर दिया गया था। हालांकि इसका संचालन 15 जनवरी 2004 को वापस शुरू किया गया। इसके बाद 27 दिसंबर 2007 को बेनजीर भुट्टो पर हुए हमले के बाद भी इस ट्रेन का संचालन रोका गया था। 8 अक्टूबर साल 2012 में दिल्ली आते वक्त वाघा बॉर्डर पर जांच के दौरान ट्रेन से 100 किलो हेरोइन और गोला बारूद जब्त किया गया था।

सुरक्षा के होते है कड़े इंतजाम-:

दोनों ही देशों की तरफ से ट्रेन के चलने से पहले सघन जांच होती है। पाकिस्तान से भारत आते वक्त यात्री को वाघा रेलवे स्टेशन पर पाकिस्तान कस्टम और इमिग्रेशन अधिकारीयों का सामना करना होता है। जहां बहुत ही सख्ती से ट्रेन, यात्री, पासपोर्ट और वीजा की जाँच होती है।

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वाघा रेलवे स्टेशन से चलने के बाद ट्रेन नो मैन लैंड में प्रवेश करती है और दोनों देशों के बीच जीरो लाइन पर ट्रेन रुक जाती है। इसके बाद जब अगले स्टेशन जो भारत का पहला सीमावर्ती स्टेशन अटारी है, वहां से अनुमति मिलने के बाद लाहौर से आ रही समझौता एक्सप्रेस भारत की सीमा में प्रवेश करती है। अटारी स्टेशन पर पहुंचते ही ट्रेन की सघन जांच होती है।

ट्रेन और सभी यात्रियों की जांच भारतीय सेना फिर करती है इस दौरान स्टेशन और ट्रेन पूरी तरह सील कर दिए जाते है। इस दौरान न कोई आ सकता और न जा सकता है। ट्रेन के अंदर हथियार बंद सुरक्षा कर्मी होते हैं जो ट्रेन के अंदर सफ़र कर रहे यात्रियों के हिफाजत के लिए होते हैं।

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ट्रेन के चलने से पहले पटरियों की अच्छे से जांच की जाती है। बीएसएफ के जवान घोड़े पर सवार होकर ट्रेन के साथ चलते हैं। ट्रेन के हर कोच पर उनकी नजर होती है। वे कोई भी संवेदनशील घटना होने पर तुरंत एक्शन लेते हैं।

थार एक्सप्रेस भी चलती भारत-पाकिस्तान बीच-:

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थार एक्सप्रेस भी एक अंतर्राष्ट्रीय रेलगाड़ी है जो पाकिस्तान में कराँची एवं भारत में जोधपुर शहरों को आपस में जोड़ती है। मुनाबाओ एवं खोखरापार जो एक दूसरे से छह किलोमीटर दूर है क्रमश: भारत एवं पाकिस्तान में अंतिम सीमांत स्टेशन हैं। इन दो देशों के बीच चलने वाली ये सबसे पुरानी रेल सेवा है। यह रेल सेवा 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद पटरियाँ क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण रोक दी गयी थी। जिसे 41 साल बाद 18 फरवरी 2006 को फिर से शुरु किया गया।

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