जब दुनिया की सबसे महंगी कारों से अलवर के राजा ने लगवाया झाडू, तोड़ा कंपनी का गुरुर

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आज दुनिया में भले ही फरारी, बीएमडब्ल्यू जैसे महंगी गाड़ियां रईसों और अमीरों की शान होगी। मगर भारतीय इतिहास में एक वाक्या ऐसा भी था जब एक राजा ने अपने अपमान का बदला 1920 के दौर की सबसे महंगी कारों से झाडू लगवाकर और कचरा उठाकर कंपनी का गुरुर तोड़ा था। 

कार विक्रेता ने बेइज्जत कर शोरूम निकाला बाहर-:

दरअसल सन 1920 में भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ब्रिटेन का परचम बुलंद था। इसके साथ ही ब्रिटेन की सबसे मशहूर कार निर्माता कंपनी रोल्स रॉयस की कारें बहुत चर्चित थी।

जिसकी रईसों और शाही घरानों में एक अलग ही पहचान थी। उस दौर में भारत में भी राजाओं-महाराजाओं का दौर हुआ करता था।

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सन 1920 में ही जब इंग्लैंड की सड़कों पर अलवर के महाराजा जय सिंह प्रभाकर सैर-सपाटे पर निकले। बदन पर अंग्रेजी लिबास था और रंगत भारतीय की, ऐसे ही घूमते हुए उनकी नजर रॉल्स रॉयस कार के शोरूम पर पड़ी।

उत्सुकता वश वो शोरूम में दाखिल हो गएं और वहां पर मौजूद गाड़ियों के फीचर्स और कीमत के बारे में जानने के लिए सेल्समैन से बात करने लगें।

गुरुर में अहंकार में चूर शायद उस वक्त सेल्समैन के दिमाग पर ब्रितानी हुकूमत का नशा रहा होगा जो एक भारतीय चेहरे के पीछे छिपे महाराज को पहचान न सका।

साधारण वेशभूषा और एक भारतीय चेहरे को देख कर उस सेल्समैन ने राजा जय सिंह को उपर से नीचे तक देखा और उन्हें शोरूम से बाहर निकाल दिया।

शोरूम से बाहर निकलने के बाद जय सिंह सीधे होटल पहुंचें और अपने नौकरों को कहा कि रॉल्स रॉयस के शोरूम को तत्काल इस बात की सूचना दी जाए कि अलवर के महाराज जय सिंह शोरूम पर आ रहे हैं।

खरीद ली शोरूम की सभी कारें-:

महाराज के आगमन की खबर शोरूम तक पहुंचते ही वहां पर अफरा तफरी मच गई और तत्काल स्वागत के लिए रेड कॉर्पेट तक बिछा दिया गया।

निर्धारित समय के अनुसार जय सिंह अपने शाही पोषक और जेवरातों को पहने हुए शोरूम पर पहुंचें।

उन्होंने उस वक्त अपमान करने वाले सेल्समैन से तो कुछ नहीं कहा बस शोरूम में मौजूद कारों के बारे में पूछताछ की। उस वक्त शोरूम में केवल 6 कारें मौजूद थीं।

जय सिंह ने सभी 6 कारें तत्काल खरीद लीं और उनकी कीमत नकद और जेवरात में चुकाई। जय सिंह ने कारों की कीमत के साथ साथ उनकी डिलिवरी चार्जेज का भी बखूबी भुगतान किया।

कारों को खरीदने के बाद महाराज जय सिंह वापस अपने वतन लौट चुके थें। रॉल्स रॉयस की सभी 6 कारें भी कुछ दिनों बाद भारत पहुंची और उन्हें महाराज के महल में लाया गया।

जय सिंह के जेहन में अभी भी अपनी बेइज्जती का घाव ताजा था। उन्होनें उन सभी कारों को शहर का कचरा साफ करने के लिए नगर निगम के हवाले कर दिया।

जब रॉल्स रॉयस की कारों के आगे और पीछे झाडू बांध कर शहर की सड़कों पर उतारा गया तो ये खबर किसी जंगल में लगी आग की तरह फैल गई।

बेशक इसमें वक्त लगा होगा लेकिन इस आग की तपिश ब्रिटेन तक भी पहुंची। रॉल्स रॉयस की कारें जिनकी छवि उस वक्त की सबसे शाही कारों की थी उससे भारत में एक राजा शहर की सड़कें साफ करवा रहा था।

इस खबर से रॉल्स रॉयस की छवि भी धूमिल हो गई और बाजार में भी उसे तगड़ा झटका लगा। साख के साथ साथ शेयर भी गिर चुके थें।

जिसके बाद कंपनी ने राजा जय सिंह को एक पत्र लिखकर उनके सेल्समैन द्वारा किए गए बर्ताव के लिए माफी मांगी और उन्हें 6 और रॉल्स रॉयस कारें मुफ्त में देने की बात कही।

राजा जय सिंह ने रोल्स रॉयस के माफीनामे को मान लिया और नगर निगम को आदेश दिया कि अब वो कारों से कचड़ा न उठाएं।

इस तरह जय सिंह ने बड़े ही सूझबूझ से ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार कंपनी का गुरूर तोड़ दिया।

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