रेडियम की खोज करने वाली मेरी क्यूरी को भी करना पड़ा था भेदभाव का सामना

प्रसिद्ध भौतिकऔर रसायनशास्त्री मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी (लघु नाम –  मैरी क्यूरी) को कौन नहीं जानता? जिन्होंने रेडियम की खोज की थी. विज्ञान की दो शाखाओं (भौतिकी एवं रसायन विज्ञान) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक थी. वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया.

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बडी बेटी आइरीन को १९३५ में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को १९६५ में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला. इतना सम्मान होने के बावजूद क्यूरी को बदनामी, चरित्रहीन और भेदभाव का समाना करना पड़ा. हम आज आपको क्यूरी के जीवन में घटित उन घटनाओं से अवगत कराएँगे जिसमे क्यूरी को बड़ी मुस्किले झेलनी पड़ी|

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महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन ने दो शादियां की थीं. उनकी दूसरी पत्नी उनकी कजिन थीं. पहली पत्नी से तलाक के पीछे आइंस्टीन का अपनी महिला प्रशंसकों से कुछ ज्यादा ही करीब रहना था. आइंस्टीन ने अपने छोटे बेटे के लिए ये भी कहा था कि अच्छा रहता अगर वो पैदा ही न हुआ होता. इसकी वजह थी कि वो  सिजोफ्रेनिया का मरीज था. आप सोच रहे होंगे ये सब बातें यहां क्यों लिखी जा रही हैं. आइंस्टीन ने दुनिया को बहुत कुछ दिया. उनकी शादी का उससे कोई संबंध नहीं. मगर दुनिया को, दुनिया भर के वैज्ञानिकों को और नोबेल कमेटी को मैडम क्यूरी से समस्या थी. वो चाहते थे कि क्यूरी अपना नोबेल ग्रहण करने न आए.

मैरी और उनके पति पियरे क्यूरी

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मैरी पेरिसविश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला थी. यहीं उनकी मुलाक़ात पियरे क्यूरी से हुई जो उनके पति बने. मैरी के पति पियरे क्यूरी की 1906 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई.

क्यूरी के प्रेम प्रसंग को उजागर करने के लिए अखबार में छपा मैरी का प्रेम पत्र-:

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पति के मौत के चार साल बाद उनका अपने जूनियर रिसर्चर पॉल लैवेंग्वीन से अफेयर हुआ. मैरी तब 43 साल की थीं और पॉल 37 के. पॉल की पहले से एक पत्नी और चार बच्चे थे. अखबारों ने दोनों को लेकर कई खबरें छापीं. क्यूरी को नाजायज़ संबंध बनाने वाली चरित्रहीन औरत कहा गया. जबकि पॉल अपनी पत्नी से कानूनी रूप से अलग होकर (तलाक लिए बिना) रहते थे. पॉल की पत्नी ने मैरी के लिखे प्रेम पत्रों को अखबारों को दे दिया. जो पूरे फ्रांस में ये पत्र स्कैंडल की तरह छापे गए.

नोबल कमेटी नहीं चाहती थी पुरस्कार देना-:

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नोबेल कमेटी का कहना था कि मैरी को पुरस्कार लेने न बुलाया जाए. कमेटी नहीं चाहती कि कोई चरित्रहीन राजा के साथ हाथ मिलाए. 1902 में जब क्यूरी को रेडिएशन की खोज के लिए नोबेल कमेटी ने नामित नहीं किया था. मैरी और उनके पति ने मिलकर ये खोज की थी. मगर पुरस्कार कमेटी ने सिर्फ पियरे क्यूरी का नाम दिया. पियरे के कड़ा ऐतराज जताने के बाद ही मैरी को 1903 में नोबेल मिला. जिसके चलते वो नोबेल जीतने वाली पहली महिला बनीं.

मैरी क्यूरी के साथ हुआ भेदभाव-:

महिला होने के कारण तत्कालीन वारसॉ में उन्हें सीमित शिक्षा की ही अनुमति थी। इसलिए उन्हें छुप-छुपाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करनी पड़ी. ये पहला मौका नहीं था जब मैरी के साथ एक महिला होने की वजह से भेदभाव हुआ हो. मैरी क्यूरी के जमाने को गुजरे हुए शताब्दी से ज्यादा समय हो चुका है. मगर 2016 तक केमिस्ट्री के 172 नोबेल अवॉर्ड्स में कुल 4 महिलाओं को, दवा के क्षेत्र में 208 में से महज 11 महिलाओं को, अर्थशास्त्र में सिर्फ एक महिला को और भौतिक विज्ञान में बस दो महिलाओं (क्यूरी को मिलाकर) को नोबेल दिया गया है. आप सोच सकते हैं कि इन सौ सालों में लैंगिक समानता के तमाम दावे कितनी हकीकत बन पाए हैं.

विरोध के कारण डिप्रेशन की शिकार हुई क्यूरी-:

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1911 में दूसरी बार क्यूरी को रेडियम और पोलोनियम की खोज के लिए केमिस्ट्री का नोबेल दिया गया. क्यूरी के घर के सामने इस समय तक कई विरोध प्रदर्शन हो चुके थे. इन सबके चलते वो डिप्रेशन में आ गई थीं, इसके साथ ही रेडियम के लगातार संपर्क में रहने का बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा था. नोबेल ग्रहण करने के एक महीने बाद ही मैरी को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा.

घर वापसी का मिला था निमंत्रण

ऐसे में मैरी के देश पोलैंड ने उनसे फ्रांस छोड़ वापस पोलैंड आने को कहा. मैरी ने मना कर दिया. कारण था कि फ्रांस में रेडियम इंस्टिट्यूट शुरू करने के लिए बेहतर सुविधाएं थीं. मैरी को लंबे समय तक भेदभाव झेलना पड़ा हो मगर विज्ञान और दुनिया की भलाई के लिए उनकी प्रतिबद्धता अभूतपूर्व थी. अमेरिका ने क्यूरी के काम का सम्मान करते हुए अपने यहां मौजूद एक ग्राम रेडियम दान करने की घोषणा की. मैरी ने कहा कि ये रेडियम उन्हें नहीं उनके संस्थान को दान किया जाए ताकि मैरी के मरने के बाद इस कीमती धरोहर पर उनका परिवार दावा न कर सके.

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