सरकारी मान्यता लिव इन रिलेशनशिप को बना रही है एक जानलेवा खेल!

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अभी हाल ही में सुनने में आया की तमिल एक्ट्रेस याशिका आन्नंद ने खुदखुशी कर ली। यशिका का असली नाम मैरी शीला जेबरानी था। उन्होंने कई तमिल फिल्मों में छोटे छोटे रोल किये थे।

वह अपने बॉय फ्रेंड के साथ चार महीने लिवइन रिलेशनशिप में रह रही थी. पर कुछ दिनों से उनमें चल रहे आपसी मतभेद के कारण उनका बॉय फ्रेंड अलग रहने लगा और जब यशिका ये अलगाव बरदाश्त ना कर सकी तो उन्होंने अपना जीवन समाप्त कर लिया।

उसके पहले उन्होंने अपनी माँ को मेसेज भेजा था जिसमें लिखा था कि मेरे दोस्त ने मुझे धोखा दिया है तो उसको कड़ी सजा मिलनी चाहिये।

ऐसा याशिका ही नहीं बहुत सी जानी मानी हस्तियों के साथ हुआ है| जिन्होंने प्यार में असफलता मिलने पर अपना जीवन समाप्त कर लिया।

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लिव इन रिलेशनशिप के बाद कईयों ने की शादी तो, कुछ लोग बिछड़ गए…

लिवइन रिलेशनशिप अब आम बात हो गई है| सभी सितारे अब अपने सबंधों को खुले आम स्वीकारने लगे हैं।

फिल्म जगत में ऐसी कई जानी मानी हस्तियां हैं, जो कई वर्षों तक लिवइन रिलेशनशिप में अच्छा वक्त गुजारने के बाद शादी के पवित्र बंधन में बंध चुके हैं।

जैसे सैफ एंड करीना कपूर, किरन राव और आमिर खान, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा।

कई जोड़ियाँ ऐसी भी हैं जो कई वर्षों तक संबंधो में रहने के बाद एक दूसरे से अलग हो गए जैसे जॉन इब्राहिम और बिपाशा बासू, सुशांत राजपूत और अंकिता लोखण्डे।

‌लिव इन रिलेशनशिप की बात की जाये तो कुछ हद तक इसके कई सकारात्मक पहलू हैं, तो कुछ नकारात्मक भी। एक साथ पूरी उम्र गुजारने के लिये जरूरी है की, पहले एक दूसरे को अच्छे से समझ लिया जाये।

लिव इन में रहने के बाद एक दूसरे की खूबियाँ और खामियों का भी पता चल जाता है। किसी की किसी पर जोर जबरदस्ती और कोई बंधन नहीं रहता।

दोनों ही अपने मुताबिक जिया करते हैं, मगर एक नकारत्मक पहलू भी है। अगर एक दूसरे से स्वभाव अलग हुआ या आपस में तालमेल नहीं हुआ तो break up के लिए कोई कानूनी प्रावधान नही है।

इस कारण से ही इन संबंधों की कोई मजबूत नींव नही है, जब चाहा साथ निभाया जब चाहे साथ छोड़ दिया। समाज के बंधनों से परे होता है ये रिश्ता।

संबंध टूटने के बाद क्या आत्महत्या ही एक विकल्प है?

ऐसे रिश्ते टूटने के परिणामस्वरूप जो खुदखुशी की घटनाएं सामने आती हैं|

वो हमें सोचने पर मजबूर करती हैं की, क्या वाकयी में इंसानी रूप में तोहफे में मिला जीवन इतना सस्ता है जो प्यार में नाकाम होने पर कोई अचानक उसे खत्म कर देता है।

ये सब सुनने के बाद ये पंक्तियाँ अनायास ही याद आ जाती हैं “वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना मुमकिन हो एक मोड तक लाकर छोड़ देना अच्छा है” ये पंक्तियाँ वाकयी सच्चाई हैं|

क्यूंकि प्यार देने का नाम होता है ना की किसी से उम्मीद रखने का। प्यार एक खूबसूरत अहसास है जिसे शब्दों में व्यक्त करना नामुमकिन सा लगता है।

लिवइन के बाद जीवन का क्या कोई मोल नहीं?

जाने अंजाने अचानक से कोई किसी को अच्छा लगने लगता है, किसी को किसी का व्यक्तित्व पसंद आता है, तो कोई किसी की सुंदरता का कायल हो जाता है, किसी को किसी के साथ वक्त गुजारना अच्छा लगता है तो किसी को उसका उम्रभर का साथ चाहिए होता है।

मगर ये जरूरी नहीं की हर रिश्ते को उसकी मंजिल मिले, कई कारण ऐसे होते है जिसकी वजह से कई रिश्ते अधूरे रह जाते हैं मगर खुदखुशी करना ही उस रिश्ते की मंजिल नहीं होती।

सरकार द्वारा लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता दिए जाने के बाद ऐसा लगता है रिश्ते सस्ते हो गए हैं। रिश्तों का कोई मोल नहीं रहा जब चाहा साथ रहे, जब चाहा साथ छोड़ दिया।

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मगर ऐसा करना बिल्कुल सही नही है, क्यूँकि कोई भी इंसान परिपूर्ण नहीं होता, हर एक में कुछ ना कुछ कमियाँ होती है। हर एक व्यक्ति में वैचारिक मतभेद होते हैं।

हिट एंड ट्रियल करने से बेहतर है कि अपने साथीदार के साथ थोड़े बहुत समझौते किये जाये और जिंदगी बेहतर तरीके से जीने की कोशिश की जाये। जिंदगी बेशकीमती है उसे किसी ऐसे शक्स के लिए जाया ना करें जिसे जज्बातों की कोई कद्र ना हो।

सभी से एक गुजारिश….

“जिन्दगी अनमोल है किसी के लिये यूँ ना ज़ाया कर

कोई वफ़ा करे ना करे तू जिंदगी से वफ़ा निभाया कर

और भी खूबसूरत काम है इस दुनिया में करने के लिए

सिर्फ प्यार के लिए अपना नाम यूँ दुनिया से मिटाया ना कर”

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One thought on “सरकारी मान्यता लिव इन रिलेशनशिप को बना रही है एक जानलेवा खेल!

  • February 20, 2019 at 3:10 pm
    Permalink

    Very written and provided insights. However, I feel that government can’t play a major role in putting an end to live in relationships.
    The only way is to have call centre services catering to emotional trauma one may go through and guide them to avoid any extreme steps.

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