वैलेंटाइन डे पर हजारों प्रेमी जोड़े पहुंचते है लैला-मजनू के मजार पर

फरवरी का महीना  प्यार का मौसम माना जाता है. ऐसे में एक सच्ची प्रेम कहानी के प्रेरणा श्रोत लैला-मजनू के बारे जिक्र होना लाजमी है. मगर हम आपको आज लैला मजनू की कहानी ही नहीं बल्कि उनके मजार के बारे में बतायेंगे. जहां अक्सर इस मौसम में प्रेमी जोड़े खूब जाया करते है. हिंदी फिल्म में आपने अटूट प्रेम करने वाले लैला और मजनू को जरूर देखा होगा. जिनके प्यार की मिसालें दी जाती हैं, वो लैला-मजनू आखिर थे कौन, कहां से थे और कैसी थी उनके प्यार की कहानी, ये जानने के लिए इस वक्त से बेहतर और क्या हो सकता है…

laila majnu kuchhnaya
लैला-मजनू

वैसे लैला-मजनू के प्रेम कहनी कई लोगों ने अलग-अलग तरीके से कही है. जिसमे एक कहानी ये है कि 11 वी शताब्दी में अरब देश के एक अमीर परिवार में एक लड़के जन्म हुआ जिसका नाम कायस इब्न अल-मुलाव्वाह (मजनू ) था. इसके बारे में कई ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि यह लड़का बड़ा होकर किसी लड़की के प्यार में पागल हो जाएगा.

भविष्यवाणी सच हुई और कायस इब्न अल-मुलाव्वाह को मदरसे में पढ़ते समय लैला नाम की लड़की से प्यार हो गया और लैला भी मजनू से बेपनाह इश्क करने लगी. जल्द ही उसने अपने और लैला के प्यार पर कविताए लिखना शुरू कर दी. कविताओ में वह लैला के नाम का जिक्र भी किया करता था. लैला को मनाने के लिए उसके द्वारा की जा रही कोशिशो को देखते हुए स्थानिक लोगो ने उसे मजनू का नाम दिया था.

जब मजनूं ने लैला के पिता से शादी का हाथ माँगा तो लैला के पिता ने इंकार कर दिया था, उन्होंने ऐसा कहकर इंकार कर दिया की लैला किसी पागल इंसान से शादी नही करेंगी. इसके बाद लैला की शादी वरद अल्थाकफी नाम के किसी अमीर व्यापारी से करवा दी गयी.

जब मजनूं ने लैला की शादी के बारे में सुना तो वह आदिवासी इलाके से भाग गया और आस-पास के रेगिस्तान में आवारागर्दी करने लगा. उनके परिवार ने उसके वापिस आने की आशा भी छोड़ दी थी और वे जंगल में उसके लिए खाना छोड़ चले जाते थे. लैला को भी शादी के बाद अपने शौहर के साथ उत्तरी अरबिया में भेज दिया गया था.

दूसरी तरफ लैला ने भी अपने पति को साफ-साफ बता दिया कि वह मजनू से प्यार करती है और वह उसी की होगी अन्यथा अपने प्राण दे देगी. यह बात सुनकर लैला के पति ने लैला को तलाक दे दिया और उसे वापस उसके पिता के घर भेज दिया.

जब मजनू ने फिर से लैला को देखा तो दोनों ने वहां से भाग गये. जब यह बात लैला के भाइयों को पता चली तो वह उन दोनों को मारने के लिए उन्हें ढूंढने लगे. इसी दौरान लैला मजनू दर-दर भटकते हुए एक दिन राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में प्यास के कारण प्राण त्याग दिए. इन दोनों की इस महान प्रेम कहानी के बारे में पता चला तो गांववालों ने उन दोनों को एक साथ दफना दिया.

दूसरी कहानी ये भी लोग कहते है कि लैला-मजनू पाकिस्तान से थे, जहां सिंध में अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस उर्फ मजनू और लैला नाम की गरीब लड़की को आपस में प्रेम हो गया था. लैला के भाई को जब दोनों के प्यार का पता चला, तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और आखिर उसने निर्ममता से मजनू की हत्या कर दी. लैला को जब इस बात का पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और वहीं उसने खुदकुशी करके अपनी जान दे दी. कहने वाले ये भी कहते हैं जब दोनों के परिवार वालों और समाज ने उनके प्यार को नहीं अपनाया तो दोनों ने इससे तंग आकर अपनी जान दे दी थी.

laila majanu kuchhnaya

राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित अनूपगढ़ तहसील में लैला-मजनू की मजारें कई वर्षों से प्रेम और धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के चलते लोगों को भाईचारे और सद्भाव से रहने की सीख देती हैं. यहां और भी कई बातें हैं, जो लोगों को आनंदित व रोमांचित करती हैं.

हर साल जून माह में यहां लैला-मजनू मेला भी लगता है. जहां बड़ी संख्या में प्रेमी जोड़े अपने अपने प्यार की सलामती की दुआएं मांगने आते हैं और मजार के सामने मत्था टेककर जीवनभर एक दूजे का साथ निभाने की कसमें भी खाते हैं.

यही लैला और मजनूं की एक शोकपूर्ण प्रेम कहानी है. इस तरह की प्रेम कहानी को अक्सर “कुँवारा प्यार” कहा जाता है क्योकि ऐसी प्रेम कहानियो में प्रेमी जोड़ो को कभी शादी नही होती. इतिहास में ऐसी बहुत सी प्रेम कहानियाँ हमें देखने को मिलती है, जिनमे लैला और मजनूं के साथ-साथ रोमियो और जूलिएट का भी समावेश है.

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