जानिए आखिर क्यों पहनते है चाइनीस बच्चें फटी चड्ढी और पैंट ?

ग्रामीण इलाकों में आपने देखा होगा अक्सर छोटे बच्चों के पीछे की पैंट या चड्ढी फटने की वजह से पीछे छेद रहता है. जो लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से और बैठने उठने के दौरान घिसने की  वजह से फट जाती है. मगर चीन की बात करे तो यहाँ ये मज़बूरी एक परंपरा है. जी हां यहाँ अच्छे घरों के बच्चों के के पीछे की पैंट या चड्ढी में अक्सर छेद देखने को मिलता है. ये एक बहुत ही पुरानी परंपरा है. तो आईये जानते है आखिर चीन के बच्चों के पेंट के पीछे क्यों होता है छेद…!

चीन में बच्चों की परेशानियों का हल है पैंट और चड्ढी छेद

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अगर आप किसी बच्चे को गली, पार्क या शॉपिंग सेंटर में सरेआम किसी बच्चे को बैठकर शौच कर देखें तो आप क्या सोचेंगे…? जाहिर सी बात है सबसे पहले नाक पर रुमाल और बच्चे के माँ -बाप को तलाशेंगे. मगर चीन में ऐसा होते दिखना आम बात है. बच्चों को चलने-फिरने में दिक्कत न हो इसलिए चीन के बहुत से लोग उन्हें एक तरह की पारंपरिक ड्रेस पहनाते हैं जो पीछे से छेद रहता है. इसे ‘कई डांग कू’ कहा जाता है.

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जो यह एक ख़ास तरह की पैंट होती है जिसके पिछले हिस्से में बड़ा से छेद होता है. ताकि पोट्टी आने पर बच्चे कही भी किधर शुरू हो जाये बिना परेशानी के. ये सच है कि पहले की तुलना में अब इनका कम इस्तेमाल होता है लेकिन ये चलन खत्म भी नहीं हुआ है.

विदेशियों को इस तरह की पैंट का कोई मतलब समझ नहीं आता. बाहर से आए ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि ये अच्छी आदत नहीं है और इससे बच्चों को परेशानी होती है.

सुनने में ये भले ही कितना गंदा और अजीब लगता हो लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इससे सिर्फ़ नुकसान ही होते हैं. इसके कुछ फ़ायदे भी हैं.

पैंट और चड्ढी छेद  फ़ायदे

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चीन में लोगों का मानना है कि ऐसी पैंट पहनने वाले बच्चे जल्दी वॉशरूम इस्तेमाल करना सीखते हैं. वहीं, डायपर पहनने वाले बच्चों को वॉशरूम जाने की आदत देर से लगती है.

अगर बच्चे ग़लत जगह पर पॉटी करने के लिए बैठते हैं बड़े उन्हें रोकते हैं. चीन में तीन-चार महीने की उम्र से ही बच्चों को बाथरूम में जाना सिखाया जाता है, जबकि पश्चिमी देशों में एक-डेढ़ साल की उम्र से.

बना चर्चा का विषय 

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चीनी बच्चों का यह पहनावा लोगों का ध्यान इस कदर अपनी ओर खींच रहा है कि इंटरनेट पर इस बारे में बात करने के लिए बाकायदा फ़ोरम बनाए जा रहे हैं.

‘कई डांग कू’ की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन के ज्यादातर बाज़ारों में कपड़ों की दुकानों पर बिना छेद वाली पैंट मिलना मुश्किल होता है.

 पैंट और चड्ढी छेद नुक़सान

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इन पैंटों का नुक़सान ये है कि आपको जगह-जगह घरों के बार पॉटी करते बच्चे दिखाई देंगे. नतीजन, सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और बदबू फैली रहती है जो बीमारियों को जन्म देती है. इस मामले में शहरों के मुकाबले चीन के गांवों की स्थिति ज़्यादा ख़राब है.

दुनिया में इस मुद्दे पर विवाद हो रहा है कि क्या ‘कई डांग कू’ का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए अच्छा है या नहीं. कहा जा रहा है कि इसके इस्तेमाल से कई टन कूड़े का ख़तरा कम हो रहा है. कई यूरोपीय देशों में भी अब लोगों से कहा जा रहा है कि वो बच्चों को कपड़े के डायपर पहनाएं.

हालांकि अब चीनी डॉक्टर ये मानने लगे हैं कि डिस्पोजेबल डायपर का इस्तेमाल करना ज़्यादा अच्छा है. बशर्ते उन्हें जल्दी-जल्दी बदला जाए वर्ना बीमारियों का ख़तरा रहता है. इसके अलावा डायपर के इस्तेमाल को अब स्टेटस सिंबल से जोड़कर भी देखा जाने लगा है.

श्रोत- बीबीसी 

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