जानिए… किनके निधन पर झुकाया जाता राष्ट्रीय ध्वज और किसके नहीं..!


हमारे अन्य लेख पढने के लिये फॉलो करे : फेसबुक

===
हालही में गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर का निधन हो गया था। जिसके बाद पूरे देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया।

इसके आलावा मुख्यमंत्री पदपर कार्यकाल के दौरान हुई मृत्यु के की वजह से गोवा राज्य के सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झुका कर रखा गया।

आज आपको बताते है की किन किन स्थितियों में ध्वज को झुकाने का नियम है।

कुछ खास लोगों के निधन पर झुकाया जाता है आधा ध्वज-:

राष्ट्रीय ध्वज किसी भी देश के लिए सामान और गर्व का विषय होने के साथ साथ देश काफी महत्वपूर्ण अंग होता है।

जब देश के राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की अपने कार्यकाल के दौरान मौत हो जाए तो तब देश के सभी सरकारी भवनों से तिरंगे को आधा झुकाया जाता है।

जब देश के मुख्य न्यायधीश , लोकसभा अध्यक्ष की मृत्यु हो जाती तब भी दिल्ली के सभी सरकारी भवनों और अन्य राज्य के संबधित भवनों पर तिरंगे को आधा झुकाया जाता है। सर्वोच्च न्यायलय और केेंद्रिय मंत्री की मृत्यु के बाद संबधित सराकारी भवनों से भी तिरंगा आधा झुकाया जाता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश या लोकसभा अध्यक्ष की मृत्यु पर राजकीय शोक के प्रतीक के रूप में दिल्ली के सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है. इसके अलावा संबंधित व्यक्ति के राज्य में भी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और केन्द्रीय मंत्री के निधन पर संबंधित व्यक्ति के कार्यालय एवं संबंधित व्यक्ति के राज्य में सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है।

किसी राज्य या केन्द्रशासित प्रदेश के राज्यपाल, उप-राज्यपाल, लेफ्टिनेंट गवर्नर, मुख्यमंत्री या उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश की मृत्यु पर संबंधित राज्य एवं केन्द्रशासित प्रदेश में राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है, जबकि उच्च न्यायलय के न्यायाधीश या किसी मंत्री के निधन पर संबंधित व्यक्ति के जिले में राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है।

किसी भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु के बाद ग्रह मंत्रालय द्वारा प्राप्त निर्देशों के आधार पर राजकिय शोक के रुप में तिरंगा आधा झुकाया जाता है। यदि किसी राज्य प्रमुख या सरकारी अधिकारी की मृत्यु किसी विदेशी सरजमीं पर हो जाती है तो उस संबधित देशी के दुतावास में तिरंगा झुकाया जाता है।

राष्ट्रपति को है अधिकार-:

भारत के राष्ट्रिय ध्वज को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व 22 जुलाई, 1947 को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था।

भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाना राष्ट्रीय या राजकीय शोक का प्रतीक है।

किसी व्यक्ति के निधन पर राष्ट्रीय या राजकीय शोक घोषित करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति के पास है, जो इस तरह के शोक की अवधि का भी फैसला करते हैं.

जब राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है, तो इसे पहले पूरी ऊंचाई में ऊपर उठाया जाता है और फिर धीरे-धीरे नीचे लाते हुए आधा झुकाया जाता है।

यदि किसी भवन पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ अन्य किसी देश या संस्था का ध्वज स्थित है तो ऐसी परिस्थिति में केवल राष्ट्रीय ध्वज को ही आधा झुकाया जाता है, जबकि अन्य सभी झंडे सामान्य ऊंचाई पर ही रहते हैं।

आम आदमी के लिए ध्वज का इस्तेमाल अपराध-:

मगर किसी आम नागरिक के पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज को लपेटना राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 का उल्लंघन है. ऐसा करने पर संबंधित व्यक्तियों को तीन साल का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

किसी राजनेता, सैन्यकर्मी या केन्द्रीय अर्धसैनिक बल की अंत्येष्टि के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज को अर्थी या ताबूत के ऊपर लपेटते समय इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि केसरिया रंग सिर की ओर होना चाहिए।

किसी व्यक्ति को जलाने या दफनाने से पहले राष्ट्रीय ध्वज को उस व्यक्ति के शव से हटा दिया जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को ना तो शव के दफनाना चाहिए और ना ही जलाना चाहिए.

कुछ खास मौकों पर किसी के भी मृत्यु पर नहीं झुकाया जाता ध्वज-:

अगर किसी भी विशिष्ट व्यक्ति की मृत्यु गणतंत्र दिवस , स्वतंत्र दिवस और 2 अक्टूबर को होती है तो उस समय देश के किसी भी सरकारी भवनों में कहीं पर भी तिरंगा नहीं झुकाया जाता है सिर्फ उसी भवन में तिरंगा झुकाया जाता है जिसमें पार्थिव शरीर रखा हों।

लेकिन जैसे ही उस इंसान का पार्थिव शरीर उस भवन से निकाला जाता है तो फिर वहां पर काफी ऊंचाई तक राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।

स्रोतदैनिक जागरण, आजतक, विकिपीडिया और अन्य।

===

हमारे अन्य लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें: KuchhNaya.com |  कॉपीराइट © KuchhNaya.com | सभी अधिकार सुरक्षित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *