जानिए… आखिर क्यूं मुंबई के ताजमहल होटल में अंग्रेजों और बिल्लियों का प्रवेश था वर्जित

आज भारत में दुनियाभर के सेवन स्टार, फाइव स्टार होटलों की सुमार है। जिनमे कोई भी कमरा बुक करके मनचाहे दिनों तक रह सकता है। मगर एक वक्त ऐसा भी था जब भारतीयों को बड़े होटलों में जाने तक की मनाही थी। जी हाँ हम बात कर रहे है सन 1896 की जब अंग्रेज भारतियों को भारत में स्थित बड़े होटल में जाने से रोका करते थे। होटल के बाहर लिखा होता था भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते। ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों के इसी भेदभाव और दुर्व्यवहार का नतीजा है मुंबई स्थित ताजमहल पैलेस एंड टॉवर पांच सितारा यानि फाइव स्टार होटल। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे एशिया के सबसे प्रमुख होटलों में से एक ताजमहल होटल के निर्माण की वजह और खासियतें…..!

जमशेदजी टाटा की इच्छा रह गयी थी अधूरी :-

इस होटल के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छुपी हुई है। दरअसल इतिहास के पहले फिल्म लुमीएरे भाई, अगस्टे मैरी लुई निकोलस और लुई जीन ने अपनी खोज के छ: महीनों बाद अपनी पहली फ़िल्म का प्रदर्शन मुंबई में प्रदर्शित किया था। वे ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में उन्होंने मुंबई में फ़िल्म प्रदर्शन की बात सोची। 7 जुलाई 1896 को उन्होंने मुंबई के आलीशान वोटसन होटल में अपनी 6 अलग-अलग फ़िल्मों के प्रदर्शन आयोजित किए। इन प्रदर्शन को देखने के लिए मात्र ब्रिटिश लोग आए थे, क्योंकि वोटसन होटल के बाहर एक तख्ती लगी रहती थी, जिस पर लिखा होता था- भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते हैं।

टाटा समूह के जमशेदजी टाटा भी लुमायर भाईयों की फ़िल्में देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें वोटसन होटल में प्रवेश नहीं मिला। रंगभेद की इस घृणित नीति के ख़िलाफ़ उन्होंनें आवाज़ उठाई और दो साल बाद वोटसन होटल की आभा को धूमिल कर देने वाले भव्य ताजमहल होटल का निर्माण शुरू करवाया। 1903 में यह अति सुंदर होटल बनकर तैयार हो गया। कुछ समय तक इस होटल के दरवाज़े पर एक तख्ती भी लटकती थी जिस पर लिखा होता था – ब्रिटिश और बिल्लियाँ अंदर नहीं आ सकती। इसके अलावा कहा तो यह भी जाता है कि जब स्थानीय भारतीयों को बेहतरीन यूरोपियन होटलों में घुसने नही दिया जाता था तब तब ताज महल होटल का निर्माण दि टाइम्स ऑफ़ इंडिया के संपादक के कहने पर हुआ था जिन्होनें महसूस किया कि बाम्बे के अनुरूप एक होटल की आवश्यकता है।

एक शताब्दी के बाद भी शान से खड़ा है:-

करीब 115 साल पुराने इस आलिशान होटल पर 26 नवम्बर 2008 में आतंकियों का शिकार हुआ। जिसमे अंधाधुन गोलीबारी हुई आग लगी और लगभग 60 घंटों तक आतंकवादियों के कब्ज़े में होने बाद आज भी शान से खड़ा है। अब इस होटल में भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया भर के अमीर और लोग आते-जाते रहते हैं। विदेशी पर्यटकों में भी गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास स्थित ताज महल होटल काफ़ी लोकप्रिय है।

महाराष्ट्र की राजधानी और देश आर्थिक राजधानी मुंबई स्थित कोलाबा में ताज महल होटल है जो कि गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास है। ‘ताज होटल, रिसॉर्ट्स एंड पैलेस’ का एक हिस्सा है। होटल में 565 कमरे है। ताज होटल में रेस्टोरेंट, बार, कॉफी की दुकान, नाइट कल्ब, पेस्टी की दुकान, किताब की दुकान, शॉपिंग सेंटर, पार्किंग, स्विमिंग पूल, हेल्थ क्‍लब, गोल्फ़, बेबी सिटिंग, ब्यूटी सैलून, लाउंडरी, डॉक्टर-आन-कॉल, अटेच्ड बाथ, गर्म पानी, टी.वी., आदि सुविधाएँ है।

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