जानिए आखिर कैसे आम चुनाव से अलग होता है राज्यसभा चुनाव

इन दिनों 245 सदस्यों वाले राज्यसभा के उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड, छत्तीसगढ़, केरल और तेलंगाना राज्यों के सीटों का चुनाव चल रहा है. पर हम आपको इस लेख के माध्यम से चुनाव में हारे या जीते विजेताओं के बारे में नहीं बल्कि राज्यसभा के संपूर्ण ढ़ांचा गत चुनावी तरीकों के बारे बतायेंगे.

भारतीय संविधान के प्रवर्तन के बाद ‘काउंसिल ऑफ स्टेट्स’ (राज्यसभा) का गठन सर्वप्रथम 3 अप्रैल, 1952 को किया गया था. इसकी पहली बैठक 13 मई, 1952 को हुई थी. इसकी अध्यक्षता तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के द्वारा की गई थी. 23 अगस्त 1954 को सभापति ने सदन में घोषणा की कि, ‘काउंसिल ऑफ स्टेट्स’ को अब राज्यसभा के नाम से जाना जाएगा.

संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा का गठन 250 सदस्यों द्वारा किया गया. इनमें से 12 सदस्यों के नाम राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित किये जाते हैं तथा शेष 238 का चुनाव राज्य तथा संघ राज्यक्षेत्रों की विधान सभाओं केविधायकों द्वारा किया जाता है. राज्यसभा में राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्रों की विधान सभाओं के लिए आवंटित स्थान को संविधान की चौथी अनुसूची में अन्तर्विष्ट किया गया है. इस अनुसूची में केवल 233 स्थानों के सम्बन्ध में उल्लेख किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि, वर्तमान समय में राज्यसभा की प्रभावी संख्या 245 (राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्यों सहित) है. वे 12 सदस्य जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया जाता है, उन्हें साहित्य, विज्ञान, कला तथा समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए.

राज्यसभा निर्वाचन की चुनावी प्रक्रिया

राज्य सभा में सदस्यों का चुनाव राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है. जिसमे विधान परिषद् के सदस्य वोट नहीं डाल सकते. नामांकन फाइल करने के लिए न्यूनतम 10 सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है. सदस्‍यों का चुनाव एकल हस्‍तांतरणीय मत के द्वारा निर्धारित कानून से होता है. इसके अनुसार राज्य की कुल विधानसभा सीटों को राज्यसभा की सदस्य संख्या में एक जोड़ कर उसे विभाजित किया जाता है फिर उसमें 1 जोड़ दिया जाता है. इसे इस तरह समझें कि उ. प्र. में कुल 403 विधायक हैं और 11 राज्यसभा सीट हैं जिन्हें 12 ( 11 + 1) से विभाजित करके फिर उसमे 1 जोड़ने पर 34 की संख्या आती है जो वहां चुनाव जीतने के लिए न्यूनतम वोटों की संख्या होगी. विधायक वरीयता के अनुसार अपना वोट देते हैं और पहली वरीयता के न्यूनतम वोट जिसे मिल जाते हैं वह व्यक्ति विजयी हो जाता है. इसके पश्चात यदि सदस्यों के लिए वोटिंग होती है तो सबसे कम वोट मिलने वाले उम्मीदवार के वोटों को दूसरी वरीयता के अनुसार अन्य उम्मीदवारों को ट्रान्सफर कर दिया जाता है. यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक उम्मीदवार विजयी नहीं हो जाए. इसीलिए चुनाव होने की स्थिति में विधायकों द्वारा अन्य वरीयता के मतों का महत्व बहुत बढ़ जाता है.

राज्यसभा का स्वरूप

संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्‍यसभा में 250 सदस्‍य होते हैं जिनमे 12 सदस्‍य राष्‍ट्रपति द्वारा नामित और बाकी 238 लोग चौथी अनुसूची में जनसंख्या के आधार पर राज्यों से चुने जाते हैं. अमेरिका की सीनेट में सभी राज्यों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलता है और 1913 के 17वें संशोधन द्वारा वहां प्रत्यक्ष निर्वाचन की पद्धति लागू हो गयी है. अनुच्छेद 84 के तहत भारत का नागरिक होने के अलावा राज्‍यसभा की सदस्यता हेतु न्यूनतम आयु 30 वर्ष तय की गई जबकि निचले सदन लोक सभा के लिए यह 25 वर्ष है. संविधान के अनुच्छेद 102 में दिवालिया और कुछ अन्य वर्ग के लोगों को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है. जन प्रतिनिधित्व क़ानून की धारा 154 के अनुसार राज्‍यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है. हर 2 साल में इसके एक तिहाई सदस्‍य सेवानिवृत्त हो जाते हैं इसलिए राज्‍यसभा कभी भंग नहीं होती.

लोकसभा द्वारा पारित प्रस्तावों की जांच करता है राज्यसभा 

भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत 1921 में पहली बार दूसरा सदन काउंसिल ऑफ स्टेट्स अस्तित्व में आया, जिसका गवर्नर-जनरल पदेन अध्यक्ष होता था. संविधान सभा के निर्णय के अनुसार स्वतंत्र भारत में राज्य सभा के गठन की घोषणा 23 अगस्त 1954 को की गई थी. जब उपराष्ट्रपति को इसका पदेन सभापति बनाया गया. राज्य सभा का गठन संघीय व्यवस्था में राज्यों के हितों की रक्षा करने के लिए किया गया है. परन्तु इसके सदस्यों की संख्या लोकसभा से कम रखी गयी है. राज्यसभा में विशेषज्ञों की नियुक्ति की वजह से इसे पुनरीक्षण सदन भी माना जाता है जो लोकसभा द्वारा पारित प्रस्तावों की ढंग से जांच कर सके और इसके सदस्य मंत्रिपरिषद को भी बेहतर स्वरुप दे सकते हैं.

राज्यसभा चुनावों पर पर विवादों की छाया

डॉ. अम्बेडकर ने यह स्पष्ट किया था कि राज्यसभा के लिए सदस्य को उसी राज्य का निवासी होना आवश्यक होगा पर मामला जब सुप्रीम कोर्ट में गया तो इस तर्क को नहीं माना गया. बाहरी लोग भी दूसरे राज्यों में जाकर राज्यसभा का चुनाव लड़कर सांसद बन जाते हैं, जिससे स्थानीय नेताओं में ख़ासा असंतोष रहता है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2006 में दिए गए निर्णय के अनुसार राज्य सभा चुनावों में 10वीं अनुसूची और दलबदल विरोधी क़ानून के प्रावधान लागू नहीं होते जिस वजह से राजनीतिक दल विधायकों पर कानूनी व्हिप नहीं जारी कर सकते. इसी वजह से कुछ माह पूर्व मार्च 2016 में असम में भाजपा और बोडो पीपुल्स फ्रंट के विधायक की क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस ने राज्यसभा की दोनों सीट जीत ली थी. अभी होने वाले राज्यसभा चुनाओं में भी विधायकों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला अगर इसी तरह जारी रहा तो कमज़ोर राज्यसभा को समाप्त करने की मांग भविष्य में और भी मज़बूत होगी.

राज्यसभा और लोकसभा में अंतर 

भारतीय संसदीय प्रणाली में संसद के दो सदन हैं जिसमे लोकसभा जिसे ‘आम जनता का सदन’ या संसद के निचले सदन के रूप में जाना जाता है और राज्यसभा जिसे ‘राज्यों का परिषद्’ या संसद के ऊपरी सदन के रूप में जाना जाता है. लोकसभा वास्तविक कार्यकारी है जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में शासन चलाता है.

लोकसभा

लोकसभा के सदस्य आम जनता द्वारा वयस्क मतदान की प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं. लोक सभा का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है. इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 552 है. धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है. यह सदन देश में शासन चलाने हेतु धन आवंटित करता है. केन्द्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है. लोकसभा के बैठकों की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं. जो वर्तमान में सुमित्रा महाजन है. इसे निचला सदन या आम जनता का सदन कहा जाता है. यदि कैबिनेट मंत्री द्वारा प्रस्तुत कोई विधेयक इस सदन में पारित नहीं हो पाता है, तो पूरी कैबिनेट को इस्तीफा देना पड़ता है. भारत के राष्ट्रपति इस सदन में आंग्ल-भारतीय समुदाय के 2 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं. लोकसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु-सीमा 25 वर्ष है.

राज्यसभा

इसके सदस्य राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं. यह एक स्थायी सदन है जिसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो साल बाद रिटायर हो जाते हैं. इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 है. धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा को अधिक शक्तियां प्राप्त नहीं है. केन्द्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नहीं होती है. राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता उप-राष्ट्रपति करते हैं. जो वर्तमान में वेंकैया नायडू है. ऊपरी सदन या ‘राज्यों की परिषद्’ कहा जाता है. यदि कैबिनेट मंत्री द्वारा प्रस्तुत कोई विधेयक इस सदन में पारित नहीं हो पाता है, तो पूरी कैबिनेट को इस्तीफा नहीं देना पड़ता है. भारत के राष्ट्रपति इस सदन में कला, शिक्षा, समाजसेवा एवं खेल जैसे क्षेत्रों से संबंधित 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं. राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु-सीमा 30 वर्ष है.

 

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