जानिए भारत के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कारों के बारे में

भारत में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल में सेवा देने वाले बेहतर नागरिकों को भारत सरकार देश सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से समानित करता है. आज हम इस लेख के माध्यम से आपको देश के उन महत्वपूर्ण पुरस्कारों के बारे में जानकारी देंगे.

भारत रत्न 

इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी. भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. जो 26 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है. यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है. पहला भारत रत्न पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को प्रदान कर सम्मानित किया गया था.

इस पदक के डिज़ाइन तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बना होता है. जिसके नीचे चाँदी में लिखा रहता है “भारत रत्न” और यह सफ़ेद फीते के साथ गले में पहनाया जाता है. अब तक करीब 45 भारतीय नागरिकों समेत दो विदेशी नागरिक को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चूका है जिसमे कुछ को मरणोपरांत दिया गया.

प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में जोड़ा गया. तत्पश्चात् 13 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया. सुभाष चन्द्र बोस को घोषित सम्मान वापस लिए जाने के उपरान्त मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 12 मानी जा सकती है. एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है.

जनता पार्टी द्वारा इस पुरस्कार को 1977 में बंद कर दिया गया था किंतु 1980 में कांग्रेस सरकार ने इसे फिर से दोबारा शुरू किया. 1980 में दोबारा शुरू होने पर इसे सर्वप्रथम मदर टेरेसा को प्रदान कर सम्मानित किया गया.

पद्म विभूषण

पद्म विभूषण भारत का दूसरा उच्च नागरिक सम्मान है. यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है. इस सम्मान में एक पदक और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में की गयी थी. भारत रत्‍न के बाद यह दूसरा प्रतिष्ठित सम्मान है. इस सम्मान की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा 2 जनवरी 1954 में की गयी थी. 1955 में इसमें कुछ फेरबदल किए गये. सन 1977 से 1980 और 1992 से 1998 के बीच यह सम्मान स्थगित रहे. 2009 के अंत तक यह सम्मान केवल 264 व्यक्तियों को ही दिये गये. पद्म विभूषण का पहला पदक सत्येन्द्र नाथ बोस को सन 1954 प्रदान कर सम्मानित किया गया था.

ह पदक 1954 से 1955 तक ही दिया गया. यह स्वर्ण द्वारा निर्मित एक गोल पदक हुआ करता था. जिसका व्यास 8 इंच हुआ करता था. इसके बीच में उभरा हुआ कमल का फूल, उपर लिखा हुआ, पद्म विभूषण, और नीचे पुष्पहार अंकित था. पदक के दूसरी ओर भारत सरकार का चिह्न, ऊपर, देश सेवा, लिखा हुआ होता था और नीचे कमल की माला बनी होती थी.

सन 1955 में पदक के स्वरूप में बदलाव किया गया 16 इंच व्यास के, ज्यामिति स्वरूप वाले कांस्य वर्ण के पदक का प्रयोग किया गया जिसके बीच में कमल की चार उभरी हुई पत्तियाँ सफ़ेद सोने में बनी थी. इस फूल के ऊपर और नीचे रजत रंग में पद्म विभूषण अंकित था. सन 1957 में इस पदक में सुधार कर इसके प्रचलित कांस्य वर्ण को चमकते हुए कांस्य वर्ण में बदल दिया गया.

पद्म भूषण

पद्म विभूषण के बाद तीसरा भारतीय नागरिक सम्मान पद्म भूषण है. यह सम्मान किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय सेवा के लिए प्रदान किया जाता है. इसमें सरकारी कर्मचारियों द्वारा की गई सेवाएं भी शामिल हैं. पद्म पुरस्कार मुख्य तौर पर शासकीय सेवकों द्वारा प्रदत्त सेवा के साथ-साथ किसी भी क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन करने वाले व्यक्ति को दिए जाते हैं.

पद्म पुरस्‍कारों की सिफारिश राज्‍य सरकार/संघ राज्‍य प्रशासन, केन्‍द्रीय मंत्रालय/विभाग के साथ-साथ उत्‍कृष्‍टता संस्‍थानों आदि से प्राप्‍त की जाती है. इसके बाद एक समिति इन नामों पर विचार करती है. पुरस्कार समिति जब एक बार सिफारिश कर देती है फिर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्रपति इस पर अपना अनुमोदन देते हैं और इसके बाद गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन सम्मानों की घोषणा की जाती है. 26 जनवरी 2009 तक 1036 व्यक्तियों को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है.

इस सम्मान में कांसे का बिल्ला दिया जाता है, जो 16 इंच का होता है. इसमें भी बीच में कमल का फूल बना होता है, जिसकी तीन पत्तियां इसे घेरे रहती हैं. इस फूल के ऊपर नीचे पद्मभूषण लिखा रहता है.

पद्म श्री

पद्म श्री या पद्मश्री, भारत सरकार द्वारा आम तौर पर सिर्फ भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला सम्मान है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि, कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करने के लिए दिया जाता है. भारत के नागरिक पुरस्कारों के पदानुक्रम में यह चौथा पुरस्कार है. सन पुरस्कार के स्थापना सन 1954 से लेकर 2010  तक, 2336 व्यक्ति इस पुरस्कार को प्राप्त कर चुके हैं. इसके अग्रभाग पर, “पद्म” और “श्री” शब्द देवनागरी लिपि में अंकित रहते हैं.

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