दुर्गा माता मंदिर के आस-पास है चुम्बकीय शक्तियां , जहां शांति और ध्यान के लिए दुनिया भर से आते है लोग

आस्था और मंदिर दोनों का बहुत ही गहरा नाता है। क्योंकि यदि व्यक्ति के मन में आस्था न हो तो भव्य मंदिर में भी रखी हुई स्वर्ण मूर्ति भी उसे पत्थर के समान लगती है। यदि मंदिरों की बात करें तो भारत देश में ऐसे कई मंदिर हैं जिनकी बहुत मान्यता है कि इसके आसपास दक्षिण अमेरिका में स्थित माचू-पिच्चू और  इंग्लैंड के स्टोन हेंग की तरह अदभुत चुंबकीय शक्ति के केंद्र हैं. जहां शांति और साधना के लिए लोग दुनिया भर से आते हैं.

नासा के वैज्ञानिक भी इस पर कर चुके है शोध 

 

आप शायद ही ये जानते होंगे कि उत्तराखंड में एक ऐसा स्थान भी है, जहां मां दुर्गा साक्षात् प्रकट हुई थीं. देवभूमि का ये स्थान भारत का एकमात्र और दुनिया का तीसरा ऐसा स्थान है, जहां खास चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं. खुद नासा के वैज्ञानिक भी इस पर शोध कर चुके हैं.

उत्तराखंड में अल्मोड़ा स्थिति कसारदेवी शक्तिपीठ है. स्वामी विवेकानंद ने 1890 में ध्यान के लिए कुछ महीनों के लिए आए थे. बताया जाता है कि अल्मोड़ा से करीब 22 किमी दूर काकड़ीघाट में उन्हें विशेष ज्ञान की अनुभूति हुई थी. पर्यावरणविदों का मानना है कि कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है. इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं.

अल्मोड़ा में कसाय पर्वत पर मौजूद मां दुर्गा के मंदिर में अनोखी शक्तियां मौजूद हैं. यहां आने वाले भक्त आसानी से सैकड़ों सीढ़ियां बिना किसी थकावट के ही चढ़ जाते हैं. मान्यता है कि ढाई हजार साल पहले मां दुर्गा ने दो राक्षसों का वध करने के लिये कात्यायनी रूप में अवतार लिया था. तब से इस जगह को विशेष स्थान के रूप में जाना जाता है.

हिन्दुस्तान के लोग शायद ही ये जानते होंगे कि ये स्थान जितना प्राचीन और धार्मिक महत्व का है उतना ही वैज्ञानिक लिहाज से भी अहम है. नासा के वैज्ञानिक भी साल 2012 में इस जगह का शोध कर हैरान रह गये क्योंकि दुनिया भर में पेरू के माचू पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग के बाद कसार देवी ही एकमात्र स्थान है जहां विशेष चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं.

इतिहासकार और पर्यावरण के जानकार प्रोफेसर अजय रावत के मुताबिक कसार देवी के आस-पास के क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है.यहां विशेष चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं जो ध्यान और तप के लिये इसे एक उत्तम स्थान बनाती हैं. बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने गुफा में रहकर विशेष साधना की थी. हर साल इंग्लैंड और अन्य देशों से अब भी शांति प्राप्ति के लिए सैलानी यहां आकर कुछ माह तक ठहरते हैं.

यहां आकर श्रद्धालु असीम मानसिक शांति का अनुभव करते हैं. ऐसा क्यों? क्योंकि यह अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र भी है. अनूठी मानसिक शांति मिलने के कारण यहां देश-विदेश से कई पर्यटक आते हैं.

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