जापान में आज भी होती है हिंदू देवी-देवताओं की पूजा

हममे से बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि जापान में कम से कम २० हिन्दू देवी-देवताओं की नियमित पूजा होती है. माँ सरस्वती के जापान में अनगिनत मंदिर में हैं. सरस्वती के आलावा लक्ष्मी माता, इन्द्रदेव, ब्रम्हा, और गणेशजी इनकी भी पूजा होती  हैं. इतना ही नहीं भारतीय हिन्दू जिन देवतों को भूल गए उनकी भी जापान में पूजा की जाती है.

जापान फाउंडेशन और फिल्म निर्माता art-historian – Benoy K Behl इन्होने 11 जनवरी से 21 जनवरी, 2016 के दौरान जापान के Indian Museum में कुछ दुर्लभ तस्वीरों का प्रदर्शन आयोजीत किया था. इन तस्वीरों के माध्यम से जापान का भारतीय संस्कृति के प्रति रिश्ता स्पष्ट रूप से  दिखाई देता हें.

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स्त्रोत

बहल अपने research में कहते हैं कि –

गौतम बौद्ध की शिक्षाओं का जापानी लोगों के जीवन तथा अस्तित्व पर प्रभाव है. हर दिन कई लोग बौद्ध मंदिर जाते है. गौतम बुद्ध के आलावा जपान के कई प्राचीन भारतीय देवताओं को पूजा जा रहा है. (इसीलिए) जापान में, भारतीयों को घर (भारत) जैसा लगता है. जापान में भारत की विरासत सम्हाल के रखने का एक उदाहरण है , हालाँकि भारत में ६वीं शताब्दी की संस्कृति की सिद्दम लिपी विलुप्त हो गयी है  फिर भी जापान में वह आज भी महफूज रखी गयी है.

इतना ही नहीं इस लिपी के संस्कृत अक्षर भी संजोकर रखे  गए है. हर एक देवों का एक अक्षर रखा गया है. इस वजह से इन अक्षरों का अर्थ अगर समझ नहीं आता तब भी उनको पवित्र माना जाता है.

‘बहल’ के शोध के अनुसार, वहाँ कोयासन में अभी भी “सिद्धम” लिपी में संस्कृत वर्णमाला पढ़ाई  जाती  है.

कई जापानी शब्द भी  संस्कृत से निकले  है. यही नहीं, जापान में “सुजाता” प्रमुख दूध ब्रांड का नाम है.

बहल के शोध के अनुसार Colonial education system के वजह से भारत का अपना इतिहास खो गया था,वैसा जापान का नहीं हुआ.
इसीलिए जापान में ऐतिहासिक विरासत संजोये गए और भारत को अपना इतिहास पश्चिमी लोगों से सिखना पड़ रहा है.

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