भारत के सबसे खतरनाक हत्यारे किसी ने बलात्कार करके खिलाया साइनट.., तो किसी ने रुमाल से की सैकड़ों हत्याएं..!

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आजकल छोटे से छोटे अपराध के लिए किसी भी देश की पब्लिक या कानून से इतनी कड़ी और सख्त से सख्त सजा मिलती है की अपराधी दोबारा किसी भी तरह का अपराध करने से सौ बार सोचता है। मगर भारत के कुछ ऐसे अपराधी रहे जिन्होंने बड़े ही वीभत्स तरीके से सैकड़ों लोगों की हत्याएं की। तो चलिए जानते ऐसे ही कुछ सनकी हत्यारों को…!

बेहराम ठग-:

ब्रिटिश काल में बेहराम के गिरोह में करीब 200 सदस्य थे। सीरियल किलर के रूप में ठग बेहराम पूरी दुनिया में कुख्यात था। उसका जन्म 1765 में हुआ था।

50 वर्षों के समय में उसने रूमाल के जरिए गला घोंटकर 900 से अधिक लोगों की हत्या की थी।

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मुगल साम्राज्य के समाप्ति के बाद दिल्ली से लेकर ग्वालियर और जबलपुर तक मौत और लूट का खौफ फैलाने वाले को दुनिया ‘बेरहम’ ठग के नाम से जानती है। जिसका नाम बेहराम था जो ठगों में सबसे खतरनाक था।

बेहराम को दुनिया का सबसे क्रूर ठग का खिताब हासिल है। जो ज्यादातर व्यापारियों के काफिले को अपना निशाना बनाता था।

जब तक बेहराम जिंदा था लोगों ने दिल्ली से लेकर ग्वालियर और जबलपुर के रास्ते से चलना बंद कर दिया था। बेहराम के गिरोह की वजह से हजारों लोग गायब हो रहे थे।

कराची, लाहौर, मंदसौर, मारवाड़, काठियावाड़, मुर्शिदाबाद के व्यापारी बड़ी तादाद में रहस्यमय परिस्थितियों में अपने पूरे के पूरे काफिलों के साथ गायब थे।

तवायफ, नई-नवेली दुल्हनें या फिर तीर्थयात्री इन गिरोहों ने किसी को नहीं छोड़ा।सबसे हैरानी की बात ये थी कि पुलिस को इन लगातार गायब हो रहे लोगों की लाश तक नहीं मिलती थी।

बेहराम को खून पसंद नहीं था, रुमाल से गला घोंटकर किया सैकड़ों हत्याएं-:

1765-1840 तक बेहराम का आतंक रहा। बेहराम पैसे के लिये निशाना बनाता था और उसका हथियार होता था रूमाल। सिर्फ एक पीले रूमाल से वह कई लोगों को मार दिया करता था। खून उसे पसंद नहीं था, इसलिए गला घोंटकर हत्या करने में यकीं करता था।

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बेहराम ने एक नहीं, दो नहीं, दो सौ नहीं तीन सौ नहीं पूरे 931 लोगों को मौत के घाट उतारा था। बेहराम ठग ने गिरफ्तार होने के बाद खुलासा किया कि उसके गिरोह ने पीले रूमाल से पूरे 931 लोगों को मौत के घाट उतारा है।

उसने खुद 150 लोगों के गले में रूमाल बांधकर हत्या की है। स्लीमैन के वंशजों के पास वह रूमाल आज भी है।

ठग मरे हुये लोगों की लाशों के घुटने की हड्डी तोड़ देते। लाशों को वहीं कब्रगाह बनाकर दबा दिया जाता था या फि‍र लाशों को पास के ही किसे सूखे कुएं या फिर नदी में फेंक देते थे। यही वजह थी कि लाश कभी नहीं मिलती थी।

उसको 75 वर्ष की उम्र में पकड़ लिया गया। 1840 में उसको फांसी की सजा दी गई। कैप्टन स्लीमैन ने इस गिरोह के 1400 ठगों को फांसी दिलवाई।

जबलपुर के जिस पेड़ों पर फांसी दे दी गई जबलपुर में ये पेड़ अभी भी है।

मोहन कुमार उर्फ साइनाइड-:

कर्नाटक के कुख्यात सीरियल किलर साइनाइड मोहन का असली नाम मोहन कुमार था। इसका जन्म 1963 में हुआ था। वह पेशे से स्कूल टीचर था।मोहन कुमार उर्फ साइनाइड कुंवारी लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनके साथ यौन संबंध बनाता था और फिर उन्हें गर्भनिरोधक गोली के बहाने साइनाइड की गोलियां खिला देता था।

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2005-2009 के बीच इसी तरह उसने 20 लड़कियों को मार डाला। वर्ष 2009 में उसने एक लड़की को शिकार बनाया। इसी के बाद उसके कुकर्मों की पोल खुल गया। दिसंबर 2013 में उसे मौत की सजा हुई।

डॉक्टर देवेंद्र शर्मा-:

पेशे से आयुर्वेद के डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने 2002-2004 के बीच कई टैक्सी ड्राइवरों को अपना निशाना बनाया। वह टूरिस्ट बन कर इन गाड़ियों में बैठता था और रास्ते में अपने साथियों के साथ मिल कर ड्राइवरों का खून कर देता था।

टैक्सी चोरी कर उन्हें चोर बाजार में बेचता था और पैसे कमाता था। जुर्म कबूल करने पर उसने बताया कि उसने 30-40 ड्राइवरों का खून किया। 2008 में उसे मौत की सजा हुई।

रेणुका शिंदे और सीमा गवित-:

रेणुका शिंदे और सीमा गावित ने 1990 से 1996 के बीच पुणे, थाणे, कोल्हापुर और नासिक जैसे तमाम शहरों से बच्चों का अपहरण किया था।

रेणुका शिंदे और उसकी बहन सीमा गवित ने कई मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया।

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ये दोनों बच्चों का अपहरण करके उनसे चोरी कराती थी और जो बच्चे इनके काम नहीं आते थे, उन्हें मार डालती थी।

1990 में रेणुका पुणे के एक मंदिर में चोरी करते हुए पकड़ी गई और एक बच्चे की आड़ में वहां से बच निकली थी। उसी नवजात बच्चे की वजह से रेणुका भीड़ की सहानुभूति हासिल की और वहां से भाग गई थी।

कहा जाता है कि तभी से उसके दिमाग में बच्चा चोरी का ख्याल आया था। इसके बाद रेणुका अपनी बहन सीमा और मां के साथ मिलकर बच्चा चोरी को अंजाम देने लगी थी।

1996 में एक बच्चे के अपहरण के आरोप में पुलिस ने इन्हें नासिक से गिरफ्तार किया था।

सभी ने अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया कि कई शहरों से करीब 13 बच्चों का अपहरण किया था और उनमें से 6 को मौत के घाट उतारा था।

कहा जाता है कि सीमा ने एक सात महीने के बच्चे को तो सिर्फ इसलिए जमीन पर फेंककर मार दिया था क्योंकि वह रोते हुए चुप नहीं हो रहा था।

वहीं एक दो साल के बच्चे का सिर पहले दीवार से पटक-पटक के उसकी जान ली। फिर उसके छोटे-छोट टुकड़े करके एक थैले में भर दिए और उसके बाद कोल्हापुर के एक सिनेमा हॉल में पिक्चर देखी थी।

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद रेणुका के पति किरण शिंदे ने सरकारी गवाह बनकर पुलिस की मदद की थी। वहीं इनके खुद के वकील ने दोनों बहनों की मां अंजना को मुख्य साजिशकर्ता बताया था, जिसने दोनों को अपराध की दुनिया में उतारा था।

हालाकिं इन दोनों बहनों की मां बीमारी के चलते 1998 में मर गई थी। 29 जून 2001 को सेशन कोर्ट ने रेणुका शिंदे और सीमा गावित को 13 बच्चों के अपहरण और 6 बच्चों के कत्ल का दोषी पाया था।

31, अगस्त 2006 को हाई कोर्ट ने इन दोनों सीरियल किलर बहनों को फांसी की सजा सुनाई थी, इससे पहले आजादी के बाद भारत में किसी महिला को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई थी।

सुरिंदर कोली लाशों के साथ करता था रेप-:

नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित सुरिंदर कोली नाम के सीरियल किलर को करीब 9 लोगों के निर्मम हत्या करने के आरोप नौ बार फांसी की सजा सुनाई गयी थी। नोएडा के ‌निठारी कांड को कौन नहीं जानता। जहां कोली नौकर का काम करता था।

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नोएडा के कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी में अक्सर कॉलगर्ल्स आया करती थी। उनके लिए घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली ही खाने-पीने की व्यवस्था करता था।

इस दौरान वो उनसे नजदीकी बढ़ाना चाहता था, लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था।

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इसलिए वह धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया। इस वजह से वो छोटे बच्चों के प्रति सेक्शुअली अट्रैक्ट होने लगा।

जब इलाके में सन्नाटा छा जाता था तो कोठी से गुजरने वाली लड़कियों को वो पकड़ लेता और उनका मुंह बांधकर उनका रेप करता था।

इतना ही नहीं, वो हत्या करने के बाद शव के साथ भी रेप करता था। 24 जुलाई 2017 को सुरेंदर कोली और मोनिंदर पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई। फिलहाल कोली की मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा है।

मल्लिका-:

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बेंगलुरू की मल्लिका ने 1999 से 2007 के बीच छ: औरतों का खून किया। वह घरेलू हिंसा झेल रही मिडिल क्लास महिलाओं की हमदर्द बनने का नाटक करती, उन्हें साइनाइड खिला कर मार डालती थी और उनका सारा सामान लूट ले जाती थी।

2007 में इसकी ग‌िरफ्तारी हुई और 2012 में इसे मौत की सजा सुनाई गई जो बाद में आजीवन कारावास में बदल दी गई।

सीरियल किलर जयशंकर वैश्या महिलाओं को बनाता था शिकार, खौफ खाती थी तीन राज्यों की पुलिस-:

अपनी करतूतों से पूरे देश को झकझोर देने वाले सीरियल किलर और रेपिस्ट एम. जयशंकर पर तमिलनाडु और कर्नाटक में 30 बलात्कार और 15 हत्याओं के आरोप था। जयशंकर हमेशा औरतों को ही श‌िकार बनाता था। वह पेशे से ट्रक ड्राइवर था।

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साल 2011 में उसकी शादी हुई थी। उसकी तीन बेटियां हैं। उसने साल 2008 में अपराध की दुनिया में कदम रखा. जयशंकर हमेशा अपने साथ एक काला बैग रखता था. उसमें एक हथियार होता था|

उसका पहला अपराध 3 जुलाई 2009 को सामने आया, जब उसने 45 वर्षीय महिला के साथ रेप की कोशिश की और उसकी हत्या कर दी।

अगस्त 2009 में उसने 12 महिलाओं के साथ रेप करके उनकी हत्या कर दी। वही छह अन्य महिलाओं के साथ भी रेप किया। उसके निशाने पर अधिकांश वेश्याएं रहती थी।

आखिरी बार 6 सितंबर 2013 को पकड़े जाने से पहले पुलिस ने उसे दो बार गिरफ्तार किया, लेकिन वह जेल से भागने में सफल हो जाता था।

दक्षिण भारत के तीन राज्य तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उसकी ऐसी दहशत कायम थी कि लोग खौफ से कांप उठते थे। वह जेल में दस साल की सजा काट रहा था।

फरवरी 2018 में जयशंकर ने जेल के अंदर खुदकुशी कर ली है।

बंगलुरु के बाहरी इलाके में परप्पन अग्रहारा जेल में उसने शेविंग ब्लेड से अपना गला काट लिया। खून से लथपथ गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

गौरी शंकर उर्फ़ ऑटो शंकर-:

गौरीशंकर एक ऐसा सीरियल किलर था जिसने करीब 9 से ज्यादा लड़कियों को अपना शिकार बनाया था।

कहा जाता है कि यह ऐसा हत्यारा था लड़कियों को अपहरण कर पहले खुद उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता था, फिर अपने साथियों को दुष्कर्म करने के लिए बेच देता था।

जब साथियों का मन भर जाता था तो लड़कियों को मारकर जला देता था और राख बंगाल की खाड़ी में फेंक देता था।

90 के दशक में चेन्नई में लगातार गायब हो रही लड़कियों से लोग दहशत में रहने लगे थे। साल 1987 से 88 तक 9 लड़कियां गायब हो चुकी थीं और पुलिस पूरी कोशिशों के बाद लड़कियों का पता लगाने में नाकाम साबित हो रही थी।

जब एक लड़की ने एक ऑटो रिक्शा चालक के खिलाफ छेड़छाड़ और अपहरण की कोशिश का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के दौरान ऑटो रिक्शा चालक गौरीशंकर का हाथ पाया लेकिन सबूत सिर्फ 6 लड़कियों के मिले।

गौरीशंकर ने 6 लड़कियों के अपहरण और हत्या की बात कबूली थी। सीरियल किलर गौरीशंकर को ऑटो शंकर के नाम से भी जाना जाता है।

27 अप्रैल साल 1995 में ऑटो शंकर को उसके गुनाहों की सजा मिली थी। सालेम जेल में गौरी शंकर उर्फ़ ऑटो शंकर को फांसी पर लटका दिया गया था।

रहस्यमय स्टोनमैन-:

सितंबर 1983 में मुंबई में फुटपाथ पर सोने वाले लोगों की रात में कोई हत्या कर दिया जाता था। यह सिलसिला लगातार चला। हत्यारा सबूत के तौर पर हर शिकार के पास एक भारी पत्थर छोड़ देता था। कई बार वह उसी पत्थर से हत्या करता था।

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जिसे लोगों ने उसे स्टोनमैन का नाम दिया। पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही। अचानक उस अनजान हत्यारे ने हत्याएँ करना बंद कर दिया। आज भी यह रहस्य सुलझा नहीं कि वह कौन था और लोगों को मारने के पीछे उसका क्या मकसद था?

बीयर मैन-:

साल 2006 से 2007 के बीच मुंबई में ही छ: लोगों की एक ही तरह से हत्या हुई। पुलिस ने हर बार लाश के पास बीयर की एक बोतल पाई जिससे लगा कि यह कोई सीरियल किलर है। लोगों ने इसका नाम ‘बीयर मैन’ रख दिया।

2008 में रविंद्र कंट्रोले को एक खून के आरोप में पकड़ा गया और उसके पास से बीयर की खाली बोतल भी म‌िला लेक‌िन पुख्ता सबूतों की कमी के चलते उसे छोड़ दिया गया।

स्रोत-दैनिक भास्कर, जनसत्ता, आजतक

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