कहानी भारत के पहले सुपर कंप्यूटर की….!!!

हर एक देश के पास खुद का सुपर कंप्यूटर होना ये बड़ी स्वाभिमान वाली बात होती हैं. टेक्नोलॉजी की दुनिया पर कब्ज़ा करने वाले पश्चिमी देशों ने ५० से ६० साल पहले ही सुपर कंप्यूटर का अविष्कार कर लिया था. इस सुपर कंप्यूटर का फायदा इतना ज्यादा है कि दुनिया के सभी देशों को इस तरह के विशाल सुपर कंप्यूटर चाहिए थे. उसमें अपना भारत देश भी पीछे नहीं था.
१९८५ में इसी आशाअनुरूप  भारत ने अमरीका से सुपर कंप्यूटर की मांग की. खुद भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने वैयक्तिक स्तर पर इसकी मांग की, पर अमरीकी राष्ट्रपति Renold Regan ने भारत को सुपर कंप्यूटर देने से इंकार कर दिया. ऐसे २१वी सदी की दहलीज़ पर होकर इस इंकार का, प्रगति के पथ पर चलने वाले अपने देश को बहुत बुरा लगा. खास कर राजीव गाँधी को, क्योंकि दुनियाभर में भारत की विकासशील छवी को बदलने के अपने सपने को एक इंकार ने मिट्टी में मिला दिया.
परन्तु तब भी १९८७ तक वो कोशिश करते रहे और अमरीका इंकार करता रहा. अमरीका अपने अत्याधुनिक प्रद्योगिक टेक्नोलॉजी को भारत जैसे एक विकासशील देश को नहीं देना चाहता था.

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इस बार विदेश मंत्रालय ने रूस से सुपर कंप्यूटर खरीदने की सलाह प्रधानमंत्री को दी.

उस समय भारत और रूस के राजनीतिक रिश्ते काफी अच्छे थे. बातचीत हुई और रूस भारत को सुपर कंप्यूटर देने को तैयार भी हुआ पर ऐनवक़्त पर अमरीका ने अपनी टांग इस डील  में अड़ा दी. अमरीका रूस को सहायता करता था. सब देश रूस के विरोध में हो गए और  अमरीका रूस के साथ खड़ा रहा. ये सब जानते हुए रूस को ये समझ आया कि अमरीका को अपने भारत को सुपर कंप्यूटर देना मान्य नहीं हैं. कोई पर्याय न होने से रूस ने यह डील स्थगित की और फिर से एक बार भारत का सपना टूटा.

एक ही समय में प्रसिद्ध computer firm IBM को भारत में अपना व्यवसाय स्थापित्त करना था और उनका लक्ष्य सुपर कंप्यूटर निर्माण करने का था.

भारत सरकार को ये विचार अच्छा लगा, पर IBM एक अमरिकी  कंपनी थी, फिर एक बार अमरीकी सरकार  ने हस्तक्षेप किया. इस बार अमरिकी  सरकार  ने  कहा सुपर कंप्यूटर भारत को बेचने के लिए हमारा विरोध है  क्यूंकि इसकी  वजह से हमारी  टेक्नोलॉजी सिक्यूरिटी को खतरा  हो सकता हें. अमेरिका का ये दावा भी झूठ निकला क्योंकि भारत ने पहले ही ये बात स्पष्ट कर दिया था कि भारत को सुपर कंप्यूटर सिर्फ मौसम पर नजर रखने के लिए चाहिए और उसका कोई कुछ अलग उपयोग नहीं किया जायेगा.

सब प्रयास करके भी कोई फायदा नहीं हुआ और राजीव गाँधी फिर से एक बार और हताश हो गए.

उस दौरान CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) यहाँ १९८७ में एक सम्मलेन आयोजित किया गया,राजीव गांधी भी इस सम्मेलन में उपस्थित थे। तब वैज्ञनिकों ने राजीव गाँधी से यह बात राजी करवाई की हम भी अपना सुपर कंप्यूटर बना सकते हें. तब राजीव गाँधी ने इंडियन साइंटिस्ट को सुपर कंप्यूटर बनाने की इजाजत दे दी, पर अभी भी राजीव गाँधी के मन में अविश्वास था की इंडियन साइंटिस्ट अमरीका जैसा सुपर कंप्यूटर  बना सकते है.

अनुमति मिलने पर ये परियोजना पुणे सिटी के CDAC( Center for Development and Advanced Computing) संस्थान को सौपा गया . भारत के लिए सुपर कंप्यूटर बनाने वाले आजतक के सबसे बड़े परियोजना में योगदान देने के लिए देश भर से अलग अलग जगह से scientist सम्मिलित  हुए थे.
इस पूरी परियोजना के लिए भारत सरकार  ने $३० मिलियन की राशी प्रदान की. हालांकि ये राशी बड़ी लग रही हो, पर सुपर कंप्यूटर बनाने के लिए आने वाले खर्चे से बहुत कम थी.

और निर्धारित समय में, अथक प्रयासों के साथ , वैज्ञानिकों ने अंत में इस परियोजना को पूरा कर लिया …! इतिहास अपने हाथों से बनाया गया था उस दिन …!

भारत जैसे विकासशील देश ने , दुनिया में अपना पहला सुपर कंप्यूटर बना लिया था । सभी विकसित देशों ने जब इसका प्रदर्शन देखा तो मुंह में उंगलियां दबा ली. भारत का यह फैसला संयुक्त राज्य अमेरिका के सीधे विपरीत चला गया था। पहले सुपर कंप्यूटर को “8000 परम” नामित किया गया था.

और ये ऐतिहासिक परियोजना का नेतृत्व जिन्होंने किया था वो थे …डॉक्टर विजय भाटकर !!!

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भारत का दूसरे देशों से सुपर कंप्यूटर के लिए भींख मांगना, इस बात का डॉक्टर विजय भाटकर को बहुत  दुःख था. उनका भारतीय वैज्ञानिकों पर पूरा भरोसा था और इसी कारण उन्होंने भारत सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि भारत भी सुपर कंप्यूटर बना सकता है . इसी डॉक्टर भाटकर ने १९९८ में परम १००००  भारत का दूसरा सुपर कंप्यूटर बनाने का मिशन लिया और ये भी पुरी तरह सफल हुआ.

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परम सुपर कंप्यूटर की सीरीज के कुछ विशेषताए.

1. परम सीरीज पुर्णतः भारतीय बनावट की हैं.
2. २००८ तक ५२ परम सुपर कंप्यूटर बनाये  गए , जिसमे से ८ सुपर कंप्यूटर रूस, सिंगापूर, जर्मनी ,एंड कनाडा इन देशो में हैं.
3. तंजानिया, आर्मीनिया, सऊदी अरब, घाना, म्यांमार, नेपाल, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान और वियतनाम इन देशों ने भारत से सुपर कंप्यूटर ख़रीदे हैं.
4. दुनिया के किसी भी अन्य सुपर कंप्यूटर के स्पीड इतनी नहीं हैं जितनी परम सुपर कंप्यूटर की स्पीड हैं.

5. परम का निर्माण की लागत दुनिया के अन्य सुपर कंप्यूटर के निमार्ण की लागत से बहुत ही कम हैं.
6. अबतक भारत ने परम सीरीज के ४ मुख्य सुपर कंप्यूटर बनाये हैं .परम युवा इस सीरीज का सबसे लेटेस्ट होगा.

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