इस भारतीय की वजह से गूगल का जन्म हुआ ! जाने कैसे?

जबसे ‘गूगल’ सर्च इंजन दुनिया में आया है तबसे दुनिया में एक नए क्रन्तिकारी युग की शुरुआत हुई है . कुछ भी खोंजे, ‘गूगल’ आपको कभी निराश नहीं करेगा. आज हर पल गूगल काम आता है. पहले के दिनों में कुछ भी समस्या आती थी तो बड़े-बुजुर्गो से सलाह लेनी पड़ती थी, पर उनकी जगह अब गूगल ने ले ली हैं.

मान लीजिये आपने सिर्फ नाम टाइप करने की शुरुआत की ,और गूगल सुझाव देना शुरु कर देता है. जानकारी की यह एक बड़ी दुनिया हमारे सामने खड़ी करने वाले ‘गूगल’ की स्थापना में एक भारतीय भी शामिल है . यह बात बहुत कम लोग जानते है. आजतक दुनिया में जितने भी अविष्कार हुए या ऐतिहासिक क्रांति हुई (मानवी जीवन के भले के लिए), उनमे से बहुत सी चीजों में कही न कही भारतीयों का योगदान रहा हैं.

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ये आश्चर्य की बात है , की अगर ‘राम श्रीराम’ नहीं होते तो ‘गूगल’ सर्च इंजन तैयार नहीं होता.

‘गूगल’ स्थापित करने वाले  ‘लारी पेज’ और ‘सार्जि बिन’ ये जोड़ी बहुत अलग सोच रखती थी. सिर्फ २० साल के ये लड़के अपने इस अविष्कार से दुनिया को चकित कर देना चाहते थे. इन लड़कों को कुछ ऐसा अलग करना था की, जिससे दुनिया में धमाका हो जाये. तब उनको ये सर्च इंजन खोजने की आईडिया आई.

उनका सुझाव ये था की इस सर्च इंजन से लोगों को दुनिया की हर एक जानकारी घर बैठे मिल जाये. उन्होंने ये आईडिया अपने प्रोफेसर को दिखाया . फिर उन्होंने इन दोनों का प्लान इन्वेस्टर के सामने रखा. बहुत  से इन्वेस्टर को ये आईडिया भरोसे लायक नहीं लगा और उन्होंने इन्वेस्ट करने से मना कर दिया. पर दोनों ने प्रयास करना नहीं छोड़ा.

उसी दौरान उनकी मुलाकात ‘राम श्रीराम’ से हुयी. राम श्रीराम को भी उनके बिज़नस प्लान में दम नहीं लगा. पर दोनों युवा के जज्बे  को देखते  हुए उन्होंने इन्वेस्ट करने का सोचा. ‘राम श्रीराम’ ने गूगल  कंपनी को ५०००,००० $ का चेक दे दिया. बस! फिर दोनों युवा ने मेहनत की और आज हम देख रहे हें की गूगल एक विशाल साम्राज्य के रूप में खड़ा हैं. ‘राम श्रीराम’ ये गूगल के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के पद पर भी थे. जब ‘गूगल’ का बिज़नस बढ़ा तब निश्चित रूप से उसका फायदा ‘राम श्रीराम’ को भी हुआ और वो दुनिया के अमिर लोगों में से एक बन गए. आज ‘गूगल’  के २.८ लाख शेयर्स उनके नाम हैं.

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‘राम श्रीराम’ ने ‘जंगली’ कंपनी के लिए  भी कार्यभार संभाला था और ये कंपनी को आगे जाकर ‘अमेज़न ‘ ने खरीद लिया. ‘अमेज़न’ के कस्टमर को ३ लाख से ११ लाख तक पहुचाने में इनका ही महान योगदान रहा है . उनके सुगम और शालीन रहन-सहन की वजह से ही,वो हमेशा लोकप्रियता से दूर रहे थे.

‘सुन्दर पिचाई’ जब गूगल  के सीईओ बने तब ये न्यूज़  पुरे दुनिया में कुछ ही मिनटों में फ़ैल गयी थी . पर जिस आदमी की  वजह से google शुरू हुआ वो इतने सालों के बाद भी अज्ञात है. इसी बात से ‘राम श्रीराम’ के सादगी और विनम्रता की कल्पना आती है.

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