हिन्दू धर्म में रंग-बिरंगे धागे पहनने का महत्व

आपने बहुत सारे हिन्दू अनुयायीयों को विभिन्न प्रकार के धागे पहने हुए अवश्य देखा होगा. जिन्हें जनेऊ, करधन, बाजूबंद जैसे तमाम नामों से भी जाना जाता हैं. जो विविध प्रकार के रंग जैसे – लाल, केसरिया, सफ़ेद, काला, और पीला रंग इन पवित्र धागों के श्रेणी में आते है. सभी धागे किसी के भी द्वारा किसी भी उद्देश्य के लिए धारण नही किया जा सकता. इनके अपने महत्वपूर्ण कारण तथा व्यक्तित्व होते है. आइये, इन रंगीन धागों के प्रभाव तथा महत्व को समझते है.

कुंडली में बृहस्पति मजबूत करने के लिए पीला धागा

अगर किसी की कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो तो पीला धागा पहनकर बृहस्पति मजबूत किया जा सकता है. ऐसी मान्यता है कि पीला धागा धारण करने से व्यक्ति में एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है. इसके आलावा पीला रंग शुद्धता और अच्छे स्वास्थ्य का रंग है. लोग इस रंग को शुभ कामों जैसे विवाह और गृह-प्रवेश के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानते है.

हिन्दू एक मोटे सूती धागे में हल्दी डालकर रखते है तथा विवाह के दौरान इसे शुभ संयोग का प्रतिक मानते है. दुल्हन इसे तीन गांठ डालकर अपने गले या बाजु में बांधती है. ऐसा कहा जाता है की यह वैवाहिक जीवन को सुखमय और सफल बनाता है. यह दुल्हन के पति की लंबी उम्र को भी सुनिश्चित करता है.

केसरिया धागा सबसे पवित्र 

केसरिया सूत्र दक्षिण और पूर्वी भारत में काफी प्रचलित है. लोग इसे विभिन्न कारणों से पहनते है. यह एक लंबा धागा होता है जिसे कमर के चारों तरफ धागे के पुलिंदे (बंडल) से अनेक बार बाँधते है. ऐसा कहा जाता है की यह धागा यश और पराक्रम दिलाता है तथा सभी बुराइयों से इन्सान की रक्षा करता है. केसरिया, हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र रंग माना जाता है.

केसरिया रंग के सूत्र और वस्त्र सामान्यतया संन्यासी धारण करते हैं. यह रंग आध्यात्मिक भावनाओं की वृद्धि करने वाला और मुक्ति की ओर ले जाने वाला माना गया है. इस रंग का संबंध भी गुरु ग्रह से माना जाता है.

बुरी नजर से रक्षा करता है काला धागा

काला धागा शनि और राहु से संबंधित माना गया है. इसका संबंध भैरो से भी माना जाता है. काले रंग के धागों का प्रयोग बुरी नजर और नकारात्क ऊर्जा से बचने के लिए किया जाता है. वैष्णो देवी से श्रद्धालु भैरो का काला धागा अच्छे स्वास्थ्य के लिए लाते हैं.

इसके अतिरिक्त, हिन्दुओं द्वारा पहना जाने वाला यह एक और दूसरा शक्तिशाली धागा है. आमतौर पर इसे बच्चों के कमर में और बड़े अपने बाएँ कलाई या बाजु में बाँधते है. कुछ लोग एक विशेष प्रकार के जड़ को इसके साथ बांध कर माला के रूप में पहनते है. जो लोग काला जादू , तांत्रिक विद्या का अभ्यास करते है वो इसे दाँये पाँव में भी पहनते है. ऐसा कहा जाता है की यह बच्चों की बुरी नजर से रक्षा करता है. यह लोगों को बुरी आत्मा या अवांछित तंत्र-मंत्र से भी बचाता है.

हृदय रोग से बचाता है जनेऊ


जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है. तीन सूत्रों वाले यज्ञोपवीत को गुरु दीक्षा के बाद हमेशा धारण किया जाता है. वैज्ञानिक दृष्टि से जनेऊ स्वास्थ्य और पौरुष के लिए बहुत ही लाभकारी होता है. जनेऊ को धारण करने से हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है.

कलावा (लाल सूत्र) बांधने के लाभ

हिंदू धर्म में प्रत्येक धार्मिक कर्म यानि पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन आदि से पहले पुरोहित यजमान की कलाई में कलावा बांधते हैं. कलावा को मौली और रक्षासूत्र भी कहते हैं. माना जाता है कि कलाई पर इसे बांधने से जीवन में आने वाले संकट से रक्षा होती है. कलावा बांधने से त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आशीर्वाद मिलता है. मान्यता है कि कलावा बांधने से ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी रोग, डायबिटीज से काफी बचाव होता है.

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