एक ऐसा रहस्यमय पत्थर जिसे सैकड़ों लोग मिलकर नहीं उठा सकते

भारत में कई ऐसे धार्मिक स्थल है जहाँ पर कई चमत्कारिक शक्तियां है। यह शक्तियां वहां निवास कर चुके और दफनाए गए साधू, संतो, फकीरों और सूफियों के कारण है। ऐसी ही एक जगह है ‘बाबा हजरत कमर अली की दरगाह’। जहां एक ऐसा चमत्कारी पत्थर है जो काफी चर्चित है। आज हम उसके बारे में आपको बताएंगे ऐसा क्यूँ है और क्या खास बात है इस दरगाह की..!

ध्यान-ज्ञान में विश्वास ही बनाया चमत्कारी-:

वैदिक संस्कृति

आज से लगभग 700 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के शिवपुर गांव में एक चमत्कारी हजरत कमर अली दरवेश बाबा हुआ करते थे। जो अपने चमत्कारों की वजह से काफी प्रचलित थे। वो अपने बड़े भाई से अलग थे और ताकतवर होने की जगह ध्यान-ज्ञान में विश्वास रखते थे। जब वो सिर्फ 6 साल के थे उन्होंने सूफी पीर नक्शे कदम पर चलने लगे थे।

जल्द ही उनकी चमत्कारिक शक्तियों की वजह से बहुत सारे लोग उनके पास आने लगे। कमर अली ये शाबित करना चाहते थे कि शारीरिक शक्ति से ज्यादा शक्तिशाली आध्यात्मिक शक्ति होती है। इसी बात को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने मरने से पहले ही कहा दिया था कि उनके मरने के बाद एक पत्थर उनकी मजार पर रखा जाए और उनका नाम लेकर 11 लोग इसे उठाएंगे तो ये पत्थर सिर से भी ऊपर तक उठ जाएगा।

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बाबा का मात्र 18 साल की उम्र में निधन हो गया था। बाबा के मरने के बाद लोगों ने महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से 180 किलोमीटर दूर पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर शिवपुर गांव में बाबा को दफनाया दिया। आज इनकी मजार हजरत कमर अली दरवेश बाबा की दरगाह के नाम से मशहूर है।

चमत्कारी पत्थर उठाने के लिए सिर्फ 11 लोग न कम न ज्यादा-:

इस दरगाह में सूफी संत की चमत्कारिक शक्तियां आज भी विधमान है। इसका जीता जागता उदाहरण दरगाह परिसर में रखा करीब 90 किलोग्राम का पत्थर है। इस पत्थर को यदि 11 लोग सूफी संत का नाम लेते हुए अपनी तर्जनी अंगुली (इंडेक्स फिंगर) से उठाते है तो यह पत्थर आसानी से ऊपर उठ जाता है। लेकिन यदि इस पत्थर को दरगाह परिसर से बाहर ले जाकर उठाए तो यह टस से मस भी नहीं होता है।

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भक्त लोग इसका कारण दरगाह में आज भी विधमान हजरत कमर अली दरवेश बाबा की शक्तियों को मानते है। इसके अलावा भी इस पत्थर से एक और रहस्य जुड़ा है यदि लोग तर्जनी अंगुली के अलावा कोई दूसरी अंगुली का इस्तेमाल करे या लोगों की संख्या 11 से कम या ज्यादा हो तो भी पत्थर नहीं हिलता है।

दरगाह में किसी के लिए कोई पाबंदी नहीं-:

इस दरगाह पर मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह की तरह ही साल भर सभी धर्म, जाती और समुदाय के लोगो का तांता लगा रहता है। एक ख़ास बात यह है की अन्य दरगाहों की तरह यहाँ पर महिलाओं को लेकर कोई बंदिश नहीं है। अन्य धार्मिक स्थलों की तरह यहाँ भी भक्तों की मान्यता है की यहाँ मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है।

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