पाकिस्तान के ऐसे मंदिर जहां हिंदू-मुस्लिम सभी करते है पूजा-पाठ

भारत में जितनी श्रधा से मंदिरों में पूजा-पाठ की जाती है उतना ही पाकिस्तान में भी होती है. जिसका प्रमाण है यहां के कई प्रसिद्ध मंदिर. पाकिस्तान में भले ही हिन्दुओं की संख्या घटी हो मगर श्रद्धा और आस्था में कोई कमी नहीं है. इस देश में मौजूद मंदिरों में सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी आते है. मंदिरों में हिन्दू मुस्लिम के इस सामूहिक आस्था के आलावा मंदिरों के निर्माण के पीछे छुपी है चौंका देने वाली बातें शायद ही जानते हो. जी हां, इस बारे में जानकर शायद आप भी चौक जाये..

हिंगलाज माता मंदिर (ब्लूचिस्तान)

इस मंदिर से जुड़ी हिंदू पौराणिक कथा है कि विष्णु भगवान ने सती माता के शव को काटने के लिए चक्र फेंका था. चक्र से सर कटकर जहां गिरा था. जहा हिंगलाज माता मंदिर की स्थापना हुई. मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सिंध राज्य की राजधानी कराची से 120 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में हिंगोल नदी के तट पर ल्यारी तहसील के मकराना के तटीय क्षेत्र में हिंगलाज में स्थित है. यह 51 शक्तिपीठों में से एक है. सदियों पुराने इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है.

पंचमुखी हनुमान मंदिर (कराची)

मान्यता है कि यह मंदिर 1500 साल पुराना है. त्रेतायुग से 17 लाख साल पुरानी हनुमान जी की एकमात्र मूर्ति यहीं पर विराजमान है. मंदिर का पुनर्निमाण साल 1882 में कराया गया. इस मंदिर में हमेशा भीड़ रहती है.

शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर में भगवान श्रीराम आ चुके हैं. मंदिर में उपस्थित पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति कोई साधारण मूर्ति नहीं है क्योंकि इस मूर्ति का इतिहास 17 लाख साल पुरानी त्रेता युग से है. मान्यता है कि पंचमुखी मूर्ति जमीन के अंदर से प्रकट हुई थी. जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है उस जगह से ठीक 11 मुट्ठी मिट्टी हटाई गई थी और हनुमान जी मूर्ति प्रकट हुई. पुजारी के अनुसार मंदिर में सिर्फ 11 या 21 परिक्रमा लगाने से सारी मनोकामना पूरी हो जाती है.

कटास राज मंदिर (चकवाल-पाकिस्तान)

भगवान शिव की पत्नी जब सती हुई तो महादेव की आंख से गिरे दो आंसू जिनमें से एक राजस्थान के अजमेर में टपका और यहाँ पर पुष्करराज तीर्थ हुआ और दूसरा आंसू पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में गिरा जहाँ अमृत बन गया यह आज भी महान सरोवर अमृत कुण्ड तीर्थ स्थान कटास राज के रूप में है. बताते हैं कि पाकिस्तान में करीब 900 साल पहले कटासराज मंदिर बनवाया गया था.

इसके अतिरिक्त महाभारत काल में पांडव बनवास के दिनों में इन्ही पहाड़ियों में अज्ञातवास में रहे. यहीं वह कुण्ड है जहाँ पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे. कुण्ड पर यक्ष का अधिकार था. यक्ष के मना करने के बावजूद भी नकुल, सहदेव, अर्जुन व भीम चारों भाई पानी पीने लगे. यक्ष ने सबको मूर्छित कर दिया. चारों भाइयों को ढूंढते हुए युधिष्ठिर कुण्ड के किनारे पहुंचे और यक्ष के सवालों जवाब दिया और अपने भाइयों चेतना दिलवाई.

स्वामी नारायण मंदिर (कराची)

कराची शहर के बंदर रोड पर यह मंदिर बना है। यह तकरीबन 32,306 हजार स्कवेयर यार्ड में बनाया गया है. करीब 160 साल पुराने इस मंदिर में हिंदू-मुस्लिम लोगों की आवाजाही रहती है. यही नहीं देश के बंटवारे के वक्त इस मंदिर का इस्तेमाल रिफ्यूजी कैंप की तरह हुआ था. इसी परिसर में एक गुरुनानक गुरुद्वारा भी है. इस मंदिर से हिंगराज मंदिर के लिए यात्रा शुरू होती है.

सूर्य मंदिर (मुल्तान)

ऐसी मान्यता है कि रामायण वाले रामवंत ने अपनी बेटी जामवंती की शादी कृष्ण से करवाई थी. जामवंती और कृष्ण के बेटे का नाम था ‘साम’. उन्हीं ने यह मंदिर बनवाया था. वजह थी शिव से पिता को मिले श्राप से मुक्ति. 1500 साल पहले मुल्तान के इस मंदिर में टहलने आए चीनी बौद्ध भिक्षु ने इस मंदिर के बारे में लिखा है. उन्होंने लिखा कि मोहम्मद बिन कासिम और मोहम्मद गजनी ने इस मंदिर को कई बार लूटा था.

श्री वरुण देव मंदिर (कराची)

पाकिस्तान सिंध में कराची के मनोड़ा आइलैंड में बना यह मंदिर 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. इस मंदिर का इस्तेमाल अब हिंदू काउंसिल ऑफ पाकिस्तान के कामों के लिए किया जाता है. कहते हैं 16वीं सदी से मंदिर अस्तित्व में था लेकिन मौजूदा ढांचा 1917-18 का बना हुआ है.

राम मंदिर (इस्लाम कोट)
राम मंदिर को लेकर भारत में गहरी आस्था है. यहां बहुत से राम मंदिर मौजूद हैं, लेकिन कुछ राम मंदिर पाकिस्तान में भी है. इनमें से विशेष इस्लाम कोटा का राम मंदिर है.

देश और धर्म कोई भी हो पर आस्था और विश्वास  के लिए कोई सरहद नहीं होती है. जिसका जीता-जागता प्रमाण है ये प्राचीन मंदिर जहां सर झुकने के लिए किसी धर्म और मजहब की जरुरत नहीं.

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