पूरा शरीर लकवा ग्रस्त होने के बावजूद वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग ने ब्रह्मांड के कई रहस्यों से उठाया था पर्दा

ब्रिटेन के मशहूर भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग का बुधवार (13 मार्च) को उनका निधन हो गया. वे 76 साल के थे. 1974 में ब्लैक हॉल्स (कृष्ण छिद्र) पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने वाले स्टीफन हॉकिन्स साइंस की दुनिया के बड़े नाम रहे हैं. आइए जानते हैं उनकी और खास बातें..

स्टीफ़न हॉकिंग को मिला था अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान

स्टीफ़न हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग के घर में हुआ. परिवार वित्तीय बाधाओं के बावजूद, माता पिता दोनों की शिक्षा ऑक्‍सफोर्ड विश्‍वविद्यालय में की. जहाँ फ्रेंक ने आयुर्विज्ञान की शिक्षा प्राप्‍त की और इसाबेल ने दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया. स्टीफ़न पास 12 मानद डिग्रियां थीं और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया था. यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर रहे स्टीफन हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतकशास्त्रियों में होती है. उनकी ब्रह्मांड के रहस्यों पर किताब ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ भी दुनिया भर में काफी मशहूर हुई थी.

अपनी बीमारी को बताया था सफलत का कारण 

हॉकिंग मूल रूप से ब्रिटेन के रहने वाले थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एम्योट्रोपिक लेट्रल स्क्लेरोसिस नामक न्यूरोडीजेनरेटिव बीमारी से पीड़ित थे. 1963 में जब वह 21 साल के थे, तभी उन्हें यह बीमारी ने अपना शिकार बना लिया था.

बता दें कि स्टीफन हॉकिंग का इस बीमारी के प्रभाव से मस्तिष्क छोड़कर पूरा शरीर लकवाग्रस्त था. इसके बावजूद अपनी सफलता का राज बताते हुए उन्होंने एक बार कहा था कि उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है. बीमारी से पहले वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रहेंगे तो उन्होंने अपना सारा ध्याना रिसर्च पर लगा दिया. हॉकिन्स ने ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च की है

हॉकिंग के हिम्मत और खोज से पूरी दुनिया प्रभावित

हॉकिंग के पुत्र लकी, रॉबर्ट और टिम ने कहा कि हमें अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे प्यारे पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे. वह अक महान वैज्ञानिक तो थे ही एक महान इंसान भी थे जिसने विज्ञान की दुनिया में इतना काम किया है जिसे दुनिया सदियों तक याद रखेगी. उनकी हिम्मत और खोज से पूरी दुनिया प्रभावित रही है.

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