इन देशों में सेना नहीं है फिर भी शांति और उन्नति के प्रतिक है ये देश

गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस इन अवसरों पर भारत अपने सैन्य बल का प्रदर्शन बड़े ही आकर्षक तरीके से करता है. जिसे दुनिया देखकर भारत के सैन्य शक्ति का नदाजा लगा लेती है. अब २६ जनवरी नजदीक है तो भारत के तीनों सेना जल, थल, और वायु सेना का शक्ति प्रदर्शन दिल्ली में किया जायगा. मगर दुनिया में ऐसे दर्जनों देश है जिनकी पास अपनी कोई सेना नहीं है. ये अपने देश की सीमा सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा या तो स्थानीय पुलिस के भरोसे  करते है या फिर पड़ोसी देशों के सेना के भरोसे रहते है.  तो आईये जानते है आखिर वो कौन से देश है जिनके पास अपनी  सेना नहीं और इसकी क्या वजह है…?

एंडोरा (Andorra)

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यूरोप में स्थित ये देश 1276 में बना. एंडोरा कुल 467.6 वर्ग किलोमीटर की हद में है. ये देश इतना छोटा है कि इसकी अपनी कोई सेना नहीं है. यहां पर सुरक्षा की सारी जिम्‍मेदारी पुलिस के कंधो पर ही है. यहां की ख़ास बात ये है कि जो भी शख्स पुलिस फ़ोर्स में भर्ती होना चाहता है उसके पास खुद का हथियार होना चाहिए.  किसी बाहरी खतरे और वॉर के दौरान इस देश की मदद के लिए स्पेन और फ्रांस हमेशा सक्रिय रहे हैं. एंडोरा स्की रिजॉर्ट और ड्यूटी फ्री चीज़ों के लिए चर्चित है. यह देश टैक्स बचाने वाले देश में स्वर्ग माना जाता है.

कोस्‍टारिका (Costa Rica)

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मध्य अमेरिका में निकारागुआ और पनामा के बीच स्थित कोस्टारिका के पास वर्ष 1948 से पहले अपनी सेना थी. लेकिन 1948 में हुए गृह युद्ध के बाद यहां सेना को हटा दिया गया. क्षेत्रफल के हिसाब से यह देश काफी छोटा है, जिसके पास अपनी सेना नहीं है. आंतरिक सुरक्षा के लिए यह देश पूरी तरह पुलिस प्रशासन पर निर्भर है। गौर करने वाली बात यह है कि अपने पड़ोसी देश निकारागुआ से सीमा पर तनाव के बावजूद कोस्टारिका ने सुरक्षा के लिए सेना नहीं बनाई है।

डोमिनिका (Dominica)

इस देश में 1981 से कोई भी सेना नहीं है और यहां पर भी सुरक्षा की पूरी जिम्‍मेदारी पुलिस के ऊपर है.

ग्रेनेडा (Grenada)

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यह देश 348.5 वर्ग किलोमीटर लंबा है. ग्रेनेडा एक बार अमरीका जैसे शक्तिशाली देश का हमला झेल चूका है. ये हमला तत्कालीन सरकार और सेना के विवाद के कारण हुआ था उस समय इस देश के पीएम माऊरिक बिशप थे. हमले के बाद ग्रेनेडा लोकतांत्रिक देश बन गया. इस देश की सारी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के सुपुर्द है. एंटीगुआ, बारबाडोसा, डोमिनिका जैसे देश ग्रेनेडा की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते है.

मार्शल आइलैंड (Iceland)

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यह देश 1983 में स्वतंत्र देश हुआ लेकिन इसे आज भी अमेरिका का ही हिस्सा माना जाता है. इस देश पर हमला करना मतलब सीधे अमेरिका पर हमला करना है. मार्शल आइलैंड के पास भी अपनी सैन्य ताकत नहीं है और ज्यादातर अमेरिका पर ही निर्भर रहता है. यह देश 181.4 वर्ग किलोमीटर लम्बा है.
आपको जानकर हैरानी होगी इस देश में 1869 से कोई भी सेना नहीं है. ये देश नाटो का मेंबर है.

लिंचटेंस्टाइन (Liechtenstein)

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ये देश उन देशों की लिस्ट में है, जिन्हें सेना की जरूरत महसूस नहीं होती. एस्ट्रो-पर्सियन वॉर (1868) के बाद इस देश ने अपनी सेना तैयार की थी, लेकिन ज्यादा खर्च के चलते इसे खत्म कर दिया गया क्योंकि देश इस खर्च को झेल पाने की स्थिति में नहीं था. सेना की गैरमौजूदगी में यहां की पुलिस सुरक्षा और कानून व्यवस्था संभालती है. इस देश ने एक प्रोविजन बना रखा है जिसके तहत खतरे के समय ये सेना का निर्माण कर सकता है. हालांकि, सुरक्षा के लिए इस देश की नजर स्विट्जरलैंड मिलिट्री पर रहती है. इसका कुल क्षेत्रफल 160 वर्ग किलोमीटर है.
मॉरीशस (Mauritius)

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ये दुनिया के उन पॉपुलर देशों में से एक है जिसकी अपनी कोई सेना नहीं है. हालांकि यहां 10,000 पुलिसकर्मी हैं जो सेना, पुलिस और सिक्‍योरिटी की सारी जिम्‍मेदार संभालते हैं.

माइक्रोनेशिया  (Micronesia)

इस देश की भी अप कोई सेना नहीं है. किसी भी तरह की मुश्‍किल के समय अमेरीकी सेना इस देश की मदद करता है.

मोनाको (Monaco)

17 वीं शताब्दी में ही इस देश ने अपनी सेना को हटा दिया था. वैसे रोचक बात तो ये है कि इस देश में दो सेना की टुकड़ी है. एक टुकड़ी प्रिंस की रक्षा करती है और दूसरी आम नागरिकों की. इस देश की डिफेंस की सुरक्षा फ्रांस के हाथों है.

पनामा (panama)

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इस लैटिन अमेरिकी देश में वर्ष 1990 में सेना का प्रावधान खत्म कर दिया गया था. इस सूची के अन्य देशों की तरह ही यहां की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी पुलिस पर है. इस देश में अपनी कोई सेना नहीं है लेकिन Panamanian Public Forces है जो देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा करती है.

वेटिकन सिटी (Vatican City)

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वेटिकन सिटी भी दुनिया के सबसे छोटे देशों में शुमार है. यह इटली की राजधानी रोम में स्थित है. इस देश का क्षेत्रफल 0.44 वर्ग किलोमीटर तथा आबादी 840 है.  जिसकी वजह से इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी इटली के पास है. यहां सिर्फ स्विस गार्ड तैनात रहते हैं. जिसका काम पोप और उनके महल की रक्षा करना होता है. यहां जेंडरमेरी कार्प्स भी हैं, लेकिन उनको सेना नहीं कहा जा सकता है. ये पुलिस बल सिर्फ वेटिकन सिटी में कानून व्यवस्था, सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और आपराधिक गतिविधियों की जांच का जिम्मा संभालता है.

पलाऊ

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पलाऊ के पास भी अपनी सेना नहीं है. यह देश भी अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स पर आश्रित है. ऐसे में हमला होने की स्थिति में उसकी मदद को सबसे पहले अमेरिका ही आता है. 1983 में हुए एक समझौते के तहत अमेरिका, पलाऊ को हर स्थिति में सैन्य मदद देता है. इसका कुल क्षेत्रफल 465.6 वर्ग किलोमीटर है.

नॉरू

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प्रशांत महासागर में स्थित नॉरू दुनिया के सबसे छोटे देशों में शुमार किया जाता है. इसका क्षेत्रफल महज 21.10 वर्ग किलोमीटर ही है. इस कारण से यहां पर सेना नहीं है, बल्कि पुलिस के जिम्मे ही सुरक्षा की जिम्मेदारी है. हालांकि, जरूरत पड़ने पर ऑस्ट्रेलिया इस देश की मदद करने के साथ सुरक्षा के साजो­-सामान भी मुहैया कराता है.

सोलोमन आयलैंड
यह देश कई द्वीपों का समूह है. सोलोमन आइलैंड 1893 तक ब्रिटेन के संरक्षण में था. इस देश की पहली सरकार 1976 बनी जो ज्यादा दीन नहीं टिक पाई. दअरसल यहां जातिय संघर्ष और अपराधिक मामलों के चलते विवाद बढ़ता चला गया. विवाद इतना बढ़ चूका था कि न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया को मध्यस्थता करते हुए शांति बनानी पड़ी. अब आस्ट्रेलिया इस देश की देखरेख कर रहा है. सोलोमन आइलैंड 28 हजार 400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

समोआ

समोआ 1962 में न्यूजीलैंड की गुलामी से आज़ाद हुआ. आजादी के 54 साल के बाद भी इस देश के पास सैन्यबल नही है. समोआ एक शांतिप्रिय देश है और इनका काम पुलिसबल से चल जाता है. न्यूज़ीलैंड ने आश्वासन दिया है कि ज़रूरत पड़ने पर वो इस देश की मदद के लिये आगे बढ़ेगा. इस देश का छेत्रफल 2842 किलोमीटर तक फैला हुआ है.

हैती
हैती में सेना ने कई बार निर्वाचित सरकार सत्ता पलट कर पर कब्जा जमा लिया था. दर्जनों बार यहां सैन्य शासन रहा. यही वजह है कि वर्ष 1995 में यहां सेना का प्रावधान खत्म कर दिया गया. हालांकि, यहां एक बार फिर सेना को बनाए जाने की मांग उठ रही है.

तो ये हैं वो दस देश जिनके पास सैन्यबल नहीं है पर आत्मबल जरूर है. ये देश दुनिया को शांति का संदेश देते है.

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