समुद्र के खारे पानी को शुद्ध करके पांच पैसे प्रति लीटर शुद्ध पेयजल देगी सरकार

हर भारतीय को यह ज्ञात होगा कि वर्तमान में देश के करीब 13 राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं. एक ओर जहां देश में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, वहीं राजनीतिक पार्टियां इस स्थिति को चुनावी मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ती रही  है.

पिछले साल भारत के प्रधानमंत्री जब इजराइल के दौरे पर गये थे. जहां मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतान्याहू के साथ खारे पानी को पीने लायक बनाने वाली बुग्गी जीप में बैठकर भूमध्य सागर के तट की सैर की थी और खारे पानी को पीने लायक बनने का नमूना भी देखा था.

पूरी दुनिया समुद्र के पानी को मीठे जल में परिवर्तित करने की तकनीक की खोज में लगी है, लेकिन इजराइल के अलावा अन्य किसी देश को इस तकनीक के आविष्कार में अब तक सफलता नहीं मिली है. भारत भी इस प्रौद्योगिकी की खोज में लगा है, लेकिन असफल ही रहा.

तमिलनाडु में हो रहा है खारे पानी को पीने लायक बनाने का ट्रायल 

हाल ही में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में दो दिवसीय पांचवें नदी महोत्सव के उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि बहुत जल्द समुंद्र के पानी को पीने लायक बनाकर भारत के घर-घर तक पहुंचाया जाएगा. ये पानी 5 पैसे प्रति लीटर की दर से मिलेगा. जिससे देश में पीने के पानी की कमी को दूर किया जा सकेगा. समुद्री जल को पीने के पानी के तौर पर तब्दील करने का ट्रायल तमिलनाडु के तूतकोरिन में चल रहा है.

पानी को शुद्ध करने लिए पुरे देश में आठ लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर हो रहा काम 

नितिन गड़करी ने बताया कि सरकार पीने के पानी की परेशानी को दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि हम आठ लाख करोड़ रुपए के 30 प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, हमने नागपुर में 18 करोड़ में केवल टॉयलेट का पानी बेचा, जिससे मीथेन गैस बन रही है। गडकरी ने नदियों को बचाने पर भी इस दौरान जौर दिया और कहा कि हमारी नदियां जीवन और समृद्धि का आधार हैं, उनका संरक्षण न केवल जीवन बल्कि हमारे देश को गरीबी और भुखमरी से बचाएगा.

भारत के नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने की अपील 

नितिन गडकरी ने इस दौरान कहा कि पानी के लिए हमारे देश के राज्यों में लड़ाई होती रहती है लेकिन देश की तीन नदियों का पानी पाकिस्तान में बहकर बर्बाद हो रहा है, इसकी किसी को फिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय हमें और पाकिस्तान को तीन-तीन नदियां मिली. हमारे अधिकार का पानी पाकिस्तान जा रहा है और हम उसे बचा नहीं पा रहे हैं.

समुद्र के पानी को शुद्ध करने में वैज्ञानिकों की भी कोशिश जारी 

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) के वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु के कलपक्कम में एक पायलट प्लांट तैयार किया है. इस प्लांट में समुद्र के पानी को शुद्ध करने के लिए अपशिष्‍ट भाप (वेस्‍ट स्‍टीम) का उपयोग किया जाता है. इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 6.3 मिलियन लीटर पानी को शुद्ध करने की है. हालांकि इस समय कुडनकुलम न्‍यूक्लियर प्‍लांट में ताजे पानी को इस्‍तेमाल किया जा रहा है. वैज्ञानिकों ने ऐसा शोधन तरीका (फिल्टरेशन मेथड) भी खोज निकाला है, जिससे आर्सेनिक और यूरेनियम युक्‍त पानी को भी पीने लायक बनाया जा सकता है.

महंगी है खारेपानी को शुद्ध करने की तकनीक
फिलहाल समुद्री पानी को खारेपन से मुक्त करने की तकनीक अपनाना बहुत महंगा है। अर्थात इसकी लागत 1000 डॉलर प्रति एकड़-फ़ुट आती है। जबकि साधारण तरीके से पानी के स्रोत से जल को शुद्ध बनाने की प्रक्रिया पर 200 डॉलर प्रति एकड़-फफुट का खर्च आता है। डी-सेलिनेशन की तकनीक धीरे-धीरे उन्नत हो रही है। विभिन्न देशों के वैज्ञानिक इसका समाधान ढूंढने और इसे कम लागत वाला बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। कीमतें कम होने भी लगी हैं।

सऊदी में नहीं है नदी और झरना फिर भी मिलाता है पर्याप्त शुद्ध जल  

रेगिस्‍तान में बसे सऊदी अरब में नदी या झरन नहीं है. इसके बावजूद वहां पानी की कोई कमी नहीं है. साफ-सफाई से लेकर रोजमर्रा के लिए पानी की कोई कमी नहीं होती. देश की राजधानी ने तमाम परेशानियों के बावजूद कई ऐसे नए-नए तरीके ईजाद किए हैं, जिससे वह अपने देश में पानी की मांग को पूरा कर पा रहा है. पानी से जुड़े सभी मामले जल और विद्युत मंत्रालय के हवाले होते हैं. सऊदी अरब में पानी का अहम स्‍त्रोत अकवीफर्स हैं. अकवीफर्स में अंडरग्राउंड जल का संग्रह किया जाता है. 1970 में सरकार ने अकवीफर्स पर काम शुरू किया था. इसका नतीजा ये हुआ कि देश में हजारों अकवीफर्स बनाए गए. इन्हें शहरी और कृषि दोनों जरूरतों में इस्तेमाल किया जाता है.

देश में पानी का दूसरा अहम स्रोत समुद्र है. समुद्री पानी को पीने लायक बनाने की प्रक्रिया को डीसेलीनेशन कहते हैं. सऊदी अरब दुनिया में डीसेलीनेटेड वाटर का सबसे बड़ा स्रोत है. सेलीन वाटर कनवर्जन कॉर्पोरेशन SWCC 27 डीसेलीनेशन स्टेशन को ऑपरेट करता है. इससे 3 मिलियन क्यूबिक मीटर पोटेबल वाटर हर दिन निकलता है. ये प्लांट शहरों में इस्तेमाल होने वाले 70 फीसदी जल को उपलब्ध कराते हैं. साथ ही इंडस्ट्रीज के इस्तेमाल लायक पानी भी उपलब्ध कराते हैं. इलेक्ट्रिक पावर जनरेशन के भी ये अहम सोर्स हैं.

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई के डायरेक्टर के.एन. व्यास के अनुसार, यूरेनियम-आर्सेनिक युक्त पानी को भी कम लागत में पीने लायक बनाया है. ऐसे कई प्लांट पंजाब के अलावा पश्चिम बंगाल में भी स्थापित किए गए हैं. उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं ‘बार्क ने ऐसी झिल्लियां भी विकसित की हैं, जिनके जरिये बेहद कम लागत पर यूरेनियम या आर्सेनिक युक्त पानी को साफ और शुद्ध करके पीने लायक बनाया जा सकता है. इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने घर में प्रयोग किए जा सकने वाले ऐसे वारट प्‍यूरीफायर भी बनाए हैं, जिनकी मार्केटिंग सूखे से बुरी तरह प्रभावित मराठवाड़ा में की जा रही है.

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