धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के मुताबिक गिने चुने लोगों को दान देने से बदल जाती है किस्मत

किसी भी जरूरतमंद को उसकी सहायता के लिए अपनी तरफ से उसे कुछ दान करना सभी मत-मान्यताओं में श्रेष्ठ माना गया है. दान देना आपको उदार बनाता है और आपकी व्यस्तता के बावजूद किसी का सहयोगी होने का अवसर प्रदान करता है.

लेकिन दान निस्वार्थ भाव से दिया जाना चाहिए अगर इसके पीछे आपका थोड़ा सा भी स्वार्थ छुपा होता हैं तो वह दान, दान नहीं माना जाता. जब भी आप किसी असहाय को दान देते हैं तो बदले में वह आपको दुआ जरूर देता है, बोलकर बेशक दुआ ना दें परंतु अपने मन ही मन में भगवान से आपकी कामयाबी की दुआ जरूर करता है.

हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी गरीब को दान देने के बहुत लाभ बताए हैं. पंचतंत्र में कहा गया है कि जब भी कोई जरूरतमंद आपके घर आता है तो उसे खाली हाथ कभी नहीं जाने देना चाहिए. आईयें आपको बताते हैं ग्रंथों में किन किन लोगों को दान देना सर्वोत्तम माना गया है.

भिखारी को दान न देना मतलब नारायण भगवान का अपमान

जब भी कोई भिखारी आपके घर आए तो उसे खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए. ऐसा करने से नारायण जी नाराज हो जाते हैं. कुछ लोग भिखारियों को तुच्छ समझते हैं और उनको अपने पास भी नहीं आने देते, जो की गलत है. ग्रंथों में माना जाता है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है.

इसलिए घर आए भिखारी को कभी घर से खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए. उसे जो हो सके अपनी इच्छानुसार भोजन या कपड़े दान में जरूर देने चाहिए. क्योंकि कहा जाता है कि किसी को दान देने से कभीं धन नहीं घटता. भिखारी को दान देने से मां लक्ष्मी आप पर कृपा करती है और कभी पैसों की कमी नहीं होने देती.

किन्नरों को दान देने का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में किन्नर को बुध ग्रह का प्रतीक माना गया है, कहा जाता है कि ये बुध ग्रह को शांत कर देते है. अगर ये किसी जातक को बुधवार के दिन आर्शीवाद दे दे तो उसकी किस्मत खुल जाती है. माना जाता है कि इनका आशीर्वाद जल्दी फलित होता है. इसलिए कभी घर आए किन्नर को बिना दान दिए खाली हाथ भेजना काफी गलत माना जाता है. किन्नर की दुआ में बहुत ही अधिक शक्ति होती है, आप जब भी इनको कुछ दान करते हो बदले में ये आपको दुआ जरूर देते हैं.

दिव्यांगों को दान देने का महत्त्व

जब कोई अंधा, भूखा या अपाहिज व्यक्ति आपसे कुछ मांगे तो उसे कभी मना नहीं करना चाहिए, इन्हें शनि और राहु का कारक माना जाता है और इनको किया हुआ दान कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है.

इसलिए जब भी आप को कोई अंधा, भूखा या अपाहिज व्यक्ति मिलें तो उसे अपनी हैसियत के हिसाब से कुछ ना कुछ दान जरूर करें. इन्हें दान देने से आपके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है. आपको बता दें कि इन्हें दिए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.

साधू-संत को दान देने का महत्त्व
किसी साधु संत को भी घर से खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए. इन्हें जरूरत की वस्तुएं अवश्य दान करनी चाहिए. इनको दान देने वाले की आयु में वृद्धि होती है और यश मिलता है इससे अलावा आपकी कुंडली में पापी ग्रहों का बुरा प्रभाव भी कम हो जाता है.

आजकल के आधुनिक काल में इन सब बातों को भले ही अंधविश्वास समझा जाता हो. मगर दान-पुण्य का परंपरा  कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लिखित है.

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